संदर्भ:
हाल ही में विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) पर जारी दिल्ली बर्ड एटलस ने पहली बार दिल्ली में पक्षी प्रजातियों के वितरण (Distribution) और उनकी प्रचुरता (Abundance) का मानचित्रण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पक्षी विविधता के मामले में दिल्ली दुनिया की राष्ट्रीय राजधानियों में नैरोबी के बाद दूसरे स्थान पर है।
दिल्ली बर्ड एटलस के प्रमुख निष्कर्ष:
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- इस एटलस को दिल्ली वन विभाग, बर्ड काउंट इंडिया, WWF-इंडिया तथा अन्य सहयोगी संगठनों द्वारा नागरिक स्वयंसेवकों, शोधकर्ताओं और पक्षी-दर्शकों (Birdwatchers) के सहयोग से तैयार किया गया है।
- रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पक्षी सूची (Delhi Bird List) में अब 471 पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं।
- सर्वेक्षण के पहले वर्ष के दौरान 221 प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें:
- 126 स्थानीय (Resident) प्रजातियाँ
- 81 शीतकालीन प्रवासी (Winter Migrant) प्रजातियाँ
- 14 ग्रीष्मकालीन प्रवासी (Summer Migrant) प्रजातियाँ शामिल हैं।
- 126 स्थानीय (Resident) प्रजातियाँ
- एटलस में 18 स्थानिक (Endemic) प्रजातियों का भी उल्लेख किया गया है।
- इसके अलावा कई संकटग्रस्त पक्षियों का दस्तावेजीकरण किया गया है, जिनमें लुप्तप्राय मिस्री गिद्ध (Egyptian Vulture) तथा ब्लैक-बेलीड टर्न (Black-bellied Tern) प्रमुख हैं।
- इस एटलस को दिल्ली वन विभाग, बर्ड काउंट इंडिया, WWF-इंडिया तथा अन्य सहयोगी संगठनों द्वारा नागरिक स्वयंसेवकों, शोधकर्ताओं और पक्षी-दर्शकों (Birdwatchers) के सहयोग से तैयार किया गया है।
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दिल्ली में पक्षी विविधता इतनी समृद्ध क्यों है?
दिल्ली की असाधारण पक्षी विविधता का प्रमुख कारण इसकी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति है।
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- यह शहर अरावली क्षेत्र, यमुना के बाढ़ मैदानों (Floodplains), आर्द्रभूमियों (Wetlands) तथा सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway - CAF) के संगम पर स्थित है।
- सेंट्रल एशियन फ्लाईवे विश्व के प्रमुख प्रवासी पक्षी मार्गों में से एक है, जिसके माध्यम से लाखों पक्षी मौसमी प्रवास करते हैं।
- पश्चिमी हिमालय के निकट होने के कारण भी दिल्ली में पक्षियों की मौसमी आवाजाही को बढ़ावा मिलता है।
- यही कारण है कि दिल्ली स्थानीय (Resident) और प्रवासी (Migratory) दोनों प्रकार की पक्षी प्रजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास (Habitat) के रूप में उभरती है।
- यह शहर अरावली क्षेत्र, यमुना के बाढ़ मैदानों (Floodplains), आर्द्रभूमियों (Wetlands) तथा सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (Central Asian Flyway - CAF) के संगम पर स्थित है।
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काजीरंगा में घासभूमि पक्षी जनगणना के बारे में:
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- असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2025 में पहली बार घासभूमि पक्षी जनगणना आयोजित की गई।
- इस सर्वेक्षण में घासभूमि से संबंधित 43 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की गईं, जिनमें आईयूसीएन रेड लिस्ट के अनुसार एक अति संकटग्रस्त (Critically Endangered), दो संकटग्रस्त (Endangered) और छह असुरक्षित (Vulnerable) प्रजातियाँ शामिल थीं।
- इस सर्वेक्षण की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि संकटग्रस्त फिन्स वीवर (Finn's Weaver) की प्रजनन कॉलोनी की खोज थी, जो ब्रह्मपुत्र बाढ़ मैदानों की एक स्थानिक (Endemic) प्रजाति है।
- असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में वर्ष 2025 में पहली बार घासभूमि पक्षी जनगणना आयोजित की गई।
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काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान क्यों प्रसिद्ध है?
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- 42,996 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है। यह ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ मैदानों का सबसे बड़ा अविच्छिन्न और प्रतिनिधिक क्षेत्र है।
- इसे वर्ष 1985 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी। यह एक-सींग वाले गैंडों की विशाल आबादी के लिए विश्वविख्यात है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तितली आवास भी है, जहाँ तितलियों की 446 प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- 42,996 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है। यह ब्रह्मपुत्र घाटी के बाढ़ मैदानों का सबसे बड़ा अविच्छिन्न और प्रतिनिधिक क्षेत्र है।
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बर्ड एटलस का संरक्षण के लिए महत्त्व:
दिल्ली बर्ड एटलस और काजीरंगा की घासभूमि पक्षी जनगणना दोनों ही जैव विविधता संरक्षण में वैज्ञानिक निगरानी के महत्व को रेखांकित करते हैं। ये अध्ययन आवास प्रबंधन, संरक्षण योजना निर्माण तथा संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण आँकड़े उपलब्ध कराते हैं। इनके निष्कर्ष यह भी दर्शाते हैं कि समृद्ध पक्षी विविधता को बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमियों, घासभूमियों और शहरी हरित क्षेत्रों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष:
दिल्ली बर्ड एटलस और काजीरंगा पक्षी जनगणना भारत की जैव विविधता संरक्षण के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हैं। बढ़ते पर्यावरणीय दबावों के बीच पक्षियों की आबादी की सुरक्षा तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए यमुना बाढ़ मैदानों और ब्रह्मपुत्र की घासभूमियों जैसे महत्वपूर्ण आवासों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक होगा।
FAQ:
दिल्ली बर्ड एटलस क्या है?
दिल्ली बर्ड एटलस दिल्ली में पक्षियों के वितरण और उनकी प्रचुरता का पहला व्यापक मानचित्रण है, जिसे विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर जारी किया गया था।
सेंट्रल एशियन फ्लाईवे (CAF) क्या है?
सेंट्रल एशियन फ्लाईवे एक प्रमुख प्रवासी पक्षी मार्ग है, जो आर्कटिक और मध्य एशिया के प्रजनन क्षेत्रों को दक्षिण एशिया के शीतकालीन आवासों से जोड़ता है। दिल्ली इस मार्ग पर स्थित है, जिसके कारण हर वर्ष हजारों प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं।
दिल्ली में उच्च पक्षी विविधता के लिए कौन-से भौगोलिक कारक जिम्मेदार हैं?
दिल्ली की पक्षी विविधता निम्नलिखित कारकों के संगम के कारण है-
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- अरावली रिज पारिस्थितिकी तंत्र
- यमुना के बाढ़ मैदान और आर्द्रभूमियाँ
- पश्चिमी हिमालय की निकटता
- सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर इसकी स्थिति
- अरावली रिज पारिस्थितिकी तंत्र
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दिल्ली के प्रमुख पक्षी अवलोकन (बर्डिंग) स्थल कौन-कौन से हैं?
दिल्ली के प्रमुख पक्षी आवासों में शामिल हैं—
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- ओखला पक्षी विहार
- यमुना जैव विविधता उद्यान
- सुंदर नर्सरी
- दिल्ली रिज
- ओखला पक्षी विहार
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दिल्ली की पक्षी विविधता का पारिस्थितिक महत्त्व क्या है?
दिल्ली की समृद्ध पक्षी विविधता यह दर्शाती है कि शहरी आर्द्रभूमियाँ, वन क्षेत्र और हरित स्थान जैव विविधता संरक्षण, प्रवासी पक्षियों को आश्रय प्रदान करने तथा पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

