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Blog / 09 Feb 2026

‘डीप टेक’ स्टार्ट-अप

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने डीप टेक स्टार्ट-अपकी आधिकारिक परिभाषा निर्धारित की है और स्टार्ट-अप इंडिया ढांचे के अंतर्गत इन्हें मान्यता देने के लिए पृथक पात्रता मानदंड अधिसूचित किए हैं। यह अधिसूचना उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा जारी की गई है। यह पहला अवसर है जब डीप टेक से जुड़े उद्यमों को भारतीय स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र में एक अलग श्रेणी के रूप में औपचारिक मान्यता दी गई है, जिससे उन्हें नवाचार और विस्तार के लिए लक्षित नीतिगत सहयोग उपलब्ध हो सकेगा।

डीप टेक स्टार्ट-अप क्या होता है?

        • डीप टेक स्टार्ट-अप वह संस्था होती है जो मुख्य रूप से विज्ञान या इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नए ज्ञान, उन्नत अनुसंधान या अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित समाधान विकसित करती है। ऐसे स्टार्ट-अप्स की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
          • ये केवल व्यावसायिक गतिविधियों पर नहीं, बल्कि अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर अधिक निवेश करते हैं।
          • इनके पास महत्वपूर्ण और नवीन बौद्धिक संपदा होती है, या वे इसे विकसित करने की प्रक्रिया में होते हैं तथा इसके व्यावसायीकरण की दिशा में कार्य करते हैं।
          • इनके उत्पाद या तकनीक के विकास में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है, साथ ही इसमें उच्च पूंजी निवेश, उन्नत अवसंरचना और तकनीकी अथवा वैज्ञानिक अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है।

Deep Technology: Definition, Use Cases & Perspectives

स्टार्ट-अप मान्यता के लिए संशोधित मानदंड:

        • डीपीआईआईटी की नई अधिसूचना के तहत डीप टेक स्टार्ट-अप के लिए सामान्य स्टार्ट-अप से अलग मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
          • आयु सीमा: डीप टेक स्टार्ट-अप्स को स्थापना या पंजीकरण की तिथि से अधिकतम 20 वर्ष तक मान्यता दी जा सकती है, जबकि अन्य स्टार्ट-अप के लिए यह सीमा 10 वर्ष निर्धारित है।
          • वार्षिक टर्नओवर सीमा: डीप टेक स्टार्ट-अप के लिए अधिकतम वार्षिक टर्नओवर सीमा ₹300 करोड़ निर्धारित किया गया है, जबकि सामान्य स्टार्ट-अप्स के लिए यह सीमा ₹200 करोड़ बनी रहेगी।
          • आवेदन की आवश्यकता: डीप टेक स्टार्ट-अप के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए संस्था को डीपीआईआईटी के समक्ष आवेदन करना होगा। यह मान्यता आर एंड डी पर केंद्रित गतिविधियों और नवाचार की संभावनाओं के मूल्यांकन के आधार पर दी जाएगी।

मान्यता की प्रक्रिया:

किसी कंपनी को स्टार्ट-अप या डीप टेक स्टार्ट-अप के रूप में मान्यता देने का अंतिम अधिकार डीपीआईआईटी के पास होगा। इस निर्णय प्रक्रिया में एक अंतर-मंत्रालयी प्रमाणन बोर्ड मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिसमें डीपीआईआईटी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।

महत्त्व और प्रभाव:

        • लंबे विकास चक्र को समर्थन: डीप टेक कंपनियों को नवाचारी तकनीकों को बाज़ार तक पहुँचाने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगता है। विस्तारित मान्यता अवधि उनकी वास्तविक अनुसंधान और विकास आवश्यकताओं के अनुरूप नीतिगत समर्थन सुनिश्चित करती है।
        • नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती: डीप टेक के लिए अलग श्रेणी बनाकर सरकार ने यह स्वीकार किया है कि ऐसी तकनीकें समय, पूंजी और जोखिम की दृष्टि से अधिक मांग वाली होती हैं, जिससे दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
        • लाभों तक बेहतर पहुँच: मान्यता प्राप्त डीप टेक स्टार्ट-अप को तेज़ पेटेंट प्रक्रिया, आयकर अधिनियम की धारा 80-आईएसी के अंतर्गत कर छूट (शर्तों के अधीन) तथा अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की आर डी आई निधि जैसी योजनाओं के तहत वित्तपोषण की पात्रता प्राप्त हो सकती है।

निष्कर्ष:

डीप टेक स्टार्ट-अप के लिए स्पष्ट परिभाषा और पृथक पात्रता मानदंड निर्धारित करना भारत की नवाचार नीति में एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। लंबी मान्यता अवधि, उच्च टर्नओवर सीमा और सुव्यवस्थित मूल्यांकन तंत्र के माध्यम से सरकार का उद्देश्य गहन वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग नवाचार को बढ़ावा देना, दीर्घकालिक पूंजी आकर्षित करना और भारत को वैश्विक डीप टेक केंद्र के रूप में स्थापित करना है।