संदर्भ:
हाल ही में सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) द्वारा किए गए एक विश्लेषण में पाया गया कि भारत के 238 में से 204 शहर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों (National Air Quality Standards) को पूरा करने में असफल रहे हैं। यह देश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
इस अध्ययन में PM2.5 की सांद्रता के आधार पर वायु गुणवत्ता के आँकड़ों का मूल्यांकन किया गया, जो मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले सबसे खतरनाक वायु प्रदूषकों में से एक है। निष्कर्ष बताते हैं कि भारत के शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक व्यापक और लगातार बनी रहने वाली पर्यावरणीय चुनौती है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
वायु गुणवत्ता मानकों का व्यापक उल्लंघन
CREA के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन भारतीय शहरों में पर्याप्त निगरानी डेटा उपलब्ध था, उनमें से अधिकांश शहरों में PM2.5 के लिए निर्धारित राष्ट्रीय परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) से अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया।
कुल 238 निगरानी किए गए शहरों में से 204 शहरों में प्रदूषण स्तर अनुमेय सीमा से अधिक पाया गया, जो बड़े पैमाने पर मानकों के उल्लंघन को दर्शाता है।
सबसे अधिक प्रदूषित शहर:
इंडो-गैंगेटिक मैदान (Indo-Gangetic Plains) के कई शहर देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में शामिल रहे।
- गाजियाबाद में PM2.5 की सांद्रता लगभग 172 µg/m³ दर्ज की गई, जो सबसे अधिक थी।
- इसके बाद नोएडा (166 µg/m³) और दिल्ली (163 µg/m³) का स्थान रहा।
ये आँकड़े भारत के PM2.5 के दैनिक मानक 60 µg/m³ से कहीं अधिक हैं, जो उत्तरी भारत में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाते हैं।
प्रमुख महानगरों में वायु प्रदूषण:
भारत के प्रमुख महानगरों में:
- दिल्ली में सबसे अधिक प्रदूषण स्तर दर्ज किया गया।
- कोलकाता में भी वायु प्रदूषण राष्ट्रीय मानकों से अधिक रहा।
- वहीं मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में तुलनात्मक रूप से कम PM2.5 स्तर दर्ज किए गए।
- बेंगलुरु में PM2.5 का स्तर लगभग 39 µg/m³ पाया गया।
सबसे स्वच्छ शहर
रिपोर्ट में अपेक्षाकृत स्वच्छ शहरों की भी पहचान की गई।
उदाहरण के लिए, कर्नाटक के चामराजनगर में PM2.5 की सांद्रता लगभग 19 µg/m³ दर्ज की गई, जो इसे इस अध्ययन में सबसे स्वच्छ शहरों में से एक बनाती है।
PM2.5 के बारे में:
PM2.5 (Particulate Matter) ऐसे अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर से छोटा होता है और जो हवा में निलंबित रहते हैं।
ये कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और यहाँ तक कि रक्त प्रवाह में भी पहुँच सकते हैं।
PM2.5 के संपर्क से कई स्वास्थ्य समस्याएँ जुड़ी होती हैं, जैसे:
- श्वसन संबंधी रोग
- हृदय संबंधी समस्याएँ
- समय से पहले मृत्यु
इसी कारण इसे सबसे खतरनाक वायु प्रदूषकों में से एक माना जाता है।
नीतिगत निहितार्थ:
रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत में वायु प्रदूषण नियंत्रण नीतियों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार:
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के प्रभावी क्रियान्वयन को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
- उद्योगों और वाहनों के लिए कड़े उत्सर्जन मानक लागू किए जाने चाहिए।
- राज्यों की सीमाओं से परे प्रदूषण से निपटने के लिए क्षेत्रीय “एयरशेड आधारित” दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
निष्कर्ष:
CREA की रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि भारत में वायु प्रदूषण अभी भी एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है।
जबकि निगरानी किए गए 85% से अधिक शहर वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में असफल रहे हैं, ऐसे में वायु गुणवत्ता सुधारने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए तत्काल नीतिगत कार्रवाई, बेहतर निगरानी प्रणाली और राज्यों के बीच समन्वित प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।
