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Blog / 12 Jan 2026

भारत की जीडीपी 2025–26 में 7.4% बढ़ने का अनुमान

संदर्भ:

हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी के वित्त वर्ष 2025–26 (अप्रैल 2025 से मार्च 2026) में 7.4% की दर से वृद्धि करने की संभावना व्यक्त की गई है। यह वृद्धि दर वित्त वर्ष 2024–25 में दर्ज 6.5% की वृद्धि की तुलना में उल्लेखनीय तेज़ी को दर्शाती है। स्थिर (2011–12) मूल्यों पर वास्तविक जीडीपी के वित्त वर्ष 2025–26 में लगभग ₹201.90 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2024–25 में यह ₹187.97 लाख करोड़ रही थी।

विकास के प्रमुख कारक:

    • क्षेत्रवार योगदान:
      • सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र विकास का मुख्य आधार बना हुआ है। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार तथा प्रसारण से जुड़ी सेवाओं के बेहतर प्रदर्शन से इस क्षेत्र को मजबूती मिली है। मज़बूत घरेलू माँग और उपभोग ने इस विस्तार को सहारा दिया है।
      • विनिर्माण और उद्योग: द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों के लगभग 7% की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह निरंतर औद्योगिक गतिविधियों और बुनियादी ढाँचे के विकास को दर्शाता है।
      • कृषि: कृषि क्षेत्र की वृद्धि अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है, जिसे 2025–26 में लगभग 3.1% अनुमानित की गयी है। इस पर जलवायु परिस्थितियों और मौसमी उत्पादन बदलती स्थितियों का प्रभाव रहा है।
    • अन्य विकास सहायक तत्व:
      • नाममात्र जीडीपी वृद्धि: नाममात्र जीडीपी के लगभग 8% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो यह दर्शाता है कि मुद्रास्फीति का दबाव सीमित है और मूल्य प्रभाव अपेक्षाकृत कमज़ोर हैं।
      • घरेलू माँग: निजी उपभोग और निवेश में निरंतरता, साथ ही सेवा क्षेत्र में मजबूत माँग, समग्र आर्थिक वृद्धि को सहारा दे रही है।
      • बाहरी चुनौतियों के प्रति लचीलापन: वैश्विक स्तर पर व्यापार तनाव, शुल्क संबंधी दबाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद, भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक आधारशिला ने बाहरी प्रभाव को काफी हद तक कम किया है।

Country’s GDP Estimated to Grow by 7.4% in 2025–26

आर्थिक महत्व:

    • वैश्विक संदर्भ: 7.4% की अनुमानित वृद्धि दर के साथ, भारत के विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपना स्थान बनाए रखने की प्रबल संभावना है। यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानजैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंकवैश्विक अर्थव्यवस्था तथा भारत के लिए अपेक्षाकृत मध्यम वृद्धि अनुमान प्रस्तुत कर रहे हैं।
    • नीतिगत प्रभाव: ये अग्रिम अनुमान आगामी केंद्रीय बजट (वित्त वर्ष 2026–27) की रूपरेखा तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं। इनके माध्यम से राजस्व एवं व्यय अनुमानों, राजकोषीय घाटे की गणना तथा विभिन्न क्षेत्रों के लिए संसाधन आवंटन निर्धारित करने में सहायता मिलेगी। आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण तथा निवेश की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु संतुलित और विवेकपूर्ण नीतिगत निर्णय आवश्यक होंगे।

India's GDP to grow at 7.4% in FY26

चुनौतियाँ और जोखिम:

    • सकारात्मक आर्थिक परिदृश्य के बावजूद, अर्थशास्त्री कुछ संभावित जोखिमों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हैं:
      • बाहरी जोखिम: वैश्विक व्यापार में व्यवधान, शुल्क संबंधी बाधाएँ तथा भू-राजनीतिक अस्थिरता भारत के निर्यात प्रदर्शन और पूंजी प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
      • नाममात्र वृद्धि की सीमाएँ: लगभग 8% की अपेक्षाकृत सीमित नाममात्र जीडीपी वृद्धि से सरकारी राजस्व में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाएगी, जिससे सरकारी व्यय करने की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है।
      • संरचनात्मक बाधाएँ: कृषि क्षेत्र की कम उत्पादकता, श्रम बाज़ार की संरचनात्मक कठोरताएँ तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। इन समस्याओं के समाधान हेतु निरंतर संरचनात्मक सुधारों और प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता बनी हुई है।

निष्कर्ष:

वित्त वर्ष 2025–26 के लिए 7.4% की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का सरकारी अग्रिम अनुमान भारत की सुदृढ़ व्यापक आर्थिक स्थिति, सशक्त सेवा क्षेत्र, निरंतर औद्योगिक विस्तार तथा लचीली घरेलू माँग को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। यद्यपि संरचनात्मक कमजोरियाँ और बाहरी जोखिम अभी भी मौजूद हैं, फिर भी यह अनुमानित विकास पथ नीतिगत योजना, आवश्यक आर्थिक सुधारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की निरंतर सुदृढ़ होती भूमिका के लिए एक अनुकूल और भरोसेमंद आधार प्रदान करता है।