संदर्भ:
भारत के 16वें वित्त आयोग ने हीटवेव (लू) और आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित आपदाओं की सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। इसके पीछे इन आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति, तीव्रता और मानव जीवन पर पड़ने वाला गंभीर प्रभाव प्रमुख कारण हैं। यह सिफारिश केंद्रीय बजट 2026–27 में व्यापक आपदा प्रबंधन वित्तीय सुधारों का हिस्सा है, जहाँ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यों के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये के वित्त आयोग अनुदानों की घोषणा की, जिनमें आपदा प्रबंधन, ग्रामीण निकायों और शहरी स्थानीय निकायों के लिए प्रावधान शामिल हैं।
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- संविधान के अनुच्छेद 281 के अंतर्गत, 17 नवंबर 2025 को प्रस्तुत वित्त आयोग की रिपोर्ट को एक व्याख्यात्मक ज्ञापन के साथ संसद में रखा गया। सरकार ने करों के ऊर्ध्वाधर विभाजन (टैक्स डिवोल्यूशन) में केंद्र की हिस्सेदारी को 41% बनाए रखने की सिफारिश को भी स्वीकार कर लिया है।
- संविधान के अनुच्छेद 281 के अंतर्गत, 17 नवंबर 2025 को प्रस्तुत वित्त आयोग की रिपोर्ट को एक व्याख्यात्मक ज्ञापन के साथ संसद में रखा गया। सरकार ने करों के ऊर्ध्वाधर विभाजन (टैक्स डिवोल्यूशन) में केंद्र की हिस्सेदारी को 41% बनाए रखने की सिफारिश को भी स्वीकार कर लिया है।
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शामिल किए जाने का औचित्य:
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- अत्यधिक गर्मी का प्रभाव वृद्धजनों, खुले में कार्य करने वाले श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर असमान रूप से अधिक पड़ता है। वहीं, आकाशीय बिजली प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच हीटवेव के कारण 3,798 मौतें दर्ज की गईं। केवल वर्ष 2022 में ही आकाशीय बिजली से 2,887 लोगों की मृत्यु हुई, जो उस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतों का 36% थी।
- कम-से-कम 11 राज्य पहले ही हीटवेव को राज्य-विशिष्ट आपदा के रूप में मान्यता दे चुके हैं, जिससे इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने की मांग और मजबूत हुई है। राष्ट्रीय आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि अत्यधिक गर्म दिनों और रातों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे हीट स्ट्रोक और गर्मी से संबंधित मृत्यु जैसे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं।
- अत्यधिक गर्मी का प्रभाव वृद्धजनों, खुले में कार्य करने वाले श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर असमान रूप से अधिक पड़ता है। वहीं, आकाशीय बिजली प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनकर उभरी है। वर्ष 2018 से 2022 के बीच हीटवेव के कारण 3,798 मौतें दर्ज की गईं। केवल वर्ष 2022 में ही आकाशीय बिजली से 2,887 लोगों की मृत्यु हुई, जो उस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली कुल मौतों का 36% थी।
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वर्तमान आपदा ढांचा:
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- वर्तमान में राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) के अंतर्गत चक्रवात, सूखा, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, शीत लहर तथा अन्य अधिसूचित आपदाएँ शामिल हैं। राज्यों को यह अनुमति है कि वे राष्ट्रीय सूची में शामिल न की गई स्थानीय रूप से गंभीर आपदाओं के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि का अधिकतम 10% तक उपयोग कर सकते हैं।
- वित्त आयोग ने इस लचीलेपन को बनाए रखने की सिफारिश करते हुए हीटवेव और आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय आपदा सूची में शामिल करने का सुझाव दिया है, जिससे राज्यों को इन आपदाओं के लिए पूर्ण आपदा राहत एवं शमन निधियों तक पहुँच मिल सके।
- वर्तमान में राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि (SDRF) के अंतर्गत चक्रवात, सूखा, भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, शीत लहर तथा अन्य अधिसूचित आपदाएँ शामिल हैं। राज्यों को यह अनुमति है कि वे राष्ट्रीय सूची में शामिल न की गई स्थानीय रूप से गंभीर आपदाओं के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि का अधिकतम 10% तक उपयोग कर सकते हैं।
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वित्तपोषण और आवंटन:
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- वित्त आयोग ने 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए SDRF और राज्य आपदा शमन निधि (SDMF) के माध्यम से कुल 2,04,401 करोड़ रुपये के आपदा प्रबंधन आवंटन की सिफारिश की है:
- केंद्र का हिस्सा: ₹1,55,915.85 करोड़
- राज्यों का हिस्सा: ₹48,485.15 करोड़
- लागत साझेदारी अनुपात: गैर-पूर्वोत्तर एवं गैर-पहाड़ी राज्यों के लिए 75:25; पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी राज्यों के लिए 90:10
- आवंटन विभाजन: 80% SDRF के लिए और 20% SDMF के लिए
- केंद्र का हिस्सा: ₹1,55,915.85 करोड़
- केंद्रीय बजट 2026–27 में घोषित 1.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदानों में आपदा प्रबंधन के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं, जिससे राज्य त्वरित आपदा प्रतिक्रिया और दीर्घकालिक जोखिम शमन दोनों के लिए बेहतर रूप से सुसज्जित हो सकें।
- वित्त आयोग ने 2026–27 से 2030–31 की अवधि के लिए SDRF और राज्य आपदा शमन निधि (SDMF) के माध्यम से कुल 2,04,401 करोड़ रुपये के आपदा प्रबंधन आवंटन की सिफारिश की है:
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महत्व:
हीटवेव और आकाशीय बिजली को राष्ट्रीय आपदा के रूप में मान्यता देने से समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित होगी, राहत एवं मुआवजा मानकों का मानकीकरण होगा तथा राज्यों की आपदा तैयारी क्षमता मजबूत होगी। यह कदम जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों के प्रति भारत की बढ़ती स्वीकार्यता को भी दर्शाता है और देश के आपदा प्रबंधन ढांचे को अधिक लचीला, समावेशी और भविष्य-उन्मुख बनाता है।
16वें वित्त आयोग के बारे में:
भारत का वित्त आयोग संविधान के अनुच्छेद 280 के अंतर्गत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तथा राज्यों के आपसी वित्तीय संसाधनों के वितरण की सिफारिश करना है। 16वें वित्त आयोग का गठन वर्ष 2020 में एन. के. सिंह की अध्यक्षता में 2021–26 की अवधि के लिए किया गया था। इसका दायित्व करों के बंटवारे, राजकोषीय अनुशासन और आपदा वित्तपोषण तंत्र की समीक्षा करना था। इसकी सिफारिशें केंद्रीय अंतरण, वित्त आयोग अनुदान, आपदा राहत आवंटन तथा राजकोषीय प्रबंधन प्रोत्साहनों का मार्गदर्शन करती हैं।

