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Blog / 03 Feb 2026

कोकिंग कोयला महत्त्वपूर्ण खनिज के रूप में अधिसूचित

संदर्भ:

29 जनवरी 2026 को भारत सरकार ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (एमएमडीआर अधिनियम) के अंतर्गत कोकिंग कोयले को महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज घोषित किया। यह निर्णय आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश की खनिज सुरक्षा को मजबूत करना और इस्पात उत्पादन जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता को कम करना है।

अधिसूचना के प्रमुख बिंदु:

        • यह अधिसूचना विकसित भारत लक्ष्यों के कार्यान्वयन हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति तथा नीति आयोग द्वारा दिए गए नीति सुझावों के आधार पर जारी की गई।
        • कोकिंग कोयला घरेलू इस्पात उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक कच्चा माल है, जो औद्योगिक निरंतरता और रणनीतिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करता है।
        • भारत में कोकिंग कोयले के कुल 37.37 अरब टन संसाधन उपलब्ध हैं, जिनका प्रमुख भाग झारखंड में स्थित है, जबकि मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी इसके भंडार पाए जाते हैं।
        • पर्याप्त घरेलू संसाधनों के बावजूद, देश की लगभग 95% कोकिंग कोयले की मांग आयात से पूरी की जाती है, जो 2020–21 में 51.20 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 57.58 मिलियन टन हो गई है, जिससे विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है।

Coking Coal as Critical & Strategic Mineral

कानूनी एवं नीतिगत प्रभाव:

        • एमएमडीआर अधिनियम की धारा 11C के तहत केंद्र सरकार को प्रथम अनुसूची में संशोधन का अधिकार प्राप्त है, जिसके अंतर्गत कोकिंग कोयलाको भाग डी (महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज) में शामिल किया गया।
        • इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
          • खनन परियोजनाओं के लिए तेज़ स्वीकृति प्रक्रिया और व्यवसाय करने में सुगमता।
          • महत्वपूर्ण खनिजों के खनन के लिए सार्वजनिक परामर्श से छूट। 
          • प्रतिपूरक वनीकरण के लिए क्षतिग्रस्त वन भूमि का उपयोग। 
          • अन्वेषण, लाभकारीकरण तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने में निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहन।
        • रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम तथा अन्य वैधानिक भुगतान राज्य सरकारों को प्राप्त होते रहेंगे, जिससे संघीय वित्तीय संतुलन बना रहेगा।

रणनीतिक आधार:

        • आयात पर निर्भरता में कमी से इस्पात और सहायक उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित और स्थिर होगी।
        • यह राष्ट्रीय इस्पात नीति को मजबूती प्रदान करता है तथा आत्मनिर्भर औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देता है।
        • खनन, परिवहन और इस्पात मूल्य श्रृंखला में व्यापक स्तर पर रोजगार सृजन की संभावनाएँ हैं।
        • यह भारत की व्यापक महत्वपूर्ण खनिज रणनीति के अनुरूप है, जिसमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल और ग्रेफाइट जैसे खनिज शामिल हैं, जो रक्षा, विद्युत वाहन और उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए आवश्यक हैं।

महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ढांचे के बारे में:

        • भारत ने आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को ध्यान में रखते हुए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान की है।
        • ये खनिज विद्युत वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों को आवश्यक समर्थन प्रदान करते हैं।

एमएमडीआर अधिनियम, 1957 की प्रमुख विशेषताएँ:

        • यह अधिनियम खनन पट्टों, खनिज अन्वेषण और संसाधन प्रबंधन को विनियमित करता है तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलन बनाए रखता है।
        • प्रमुख खनिज केंद्र सरकार के नियंत्रण में तथा लघु खनिज राज्य सरकारों के नियंत्रण में आते हैं।
        • अधिनियम अन्वेषण परमिट, पूर्वेक्षण लाइसेंस और खनन पट्टों का प्रावधान करता है।
        • हाल के प्रमुख सुधार निम्नलिखित हैं:
          • पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु 2015 में नीलामी व्यवस्था की शुरुआत।
          • 2023 में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए विशेष प्रावधान, जिसके अंतर्गत नीलामी केवल केंद्र सरकार द्वारा की जाती है।
          • 2023 में गहन खनिज अन्वेषण के लिए अन्वेषण लाइसेंस की व्यवस्था।
          • अन्वेषण और स्थानीय समुदायों के विकास हेतु एनएमईटी और डीएमएफ जैसे संस्थागत ढांचे।

अधिसूचना का महत्व:

        • राष्ट्रीय खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
        • निजी निवेश और उन्नत खनन तकनीकों को अपनाने को प्रोत्साहित करता है।
        • आयात निर्भरता कम कर विदेशी मुद्रा की बचत सुनिश्चित करता है।
        • रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देता है।

औद्योगिक आत्मनिर्भरता के माध्यम से विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को सशक्त बनाता है।