संदर्भ:
हाल ही में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पुणे स्थित बारामती हवाई अड्डे पर लैंडिंग के दौरान उनके चार्टर्ड विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से मृत्यु हो गई। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार विमान रनवे तक पहुँचने से पूर्व ही दुर्घटना का शिकार हो गया। इस घटना की जाँच विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जा रही है। यह दुखद हादसा भारत के तीव्र गति से विस्तार कर रहे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में लंबे समय से बनी हुई सुरक्षा संबंधी चिंताओं को फिर से सामने लाता है।
संसदीय समिति की चेतावनी:
इस दुर्घटना से कुछ माह पूर्व ही परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर गठित संसदीय स्थायी समिति ने भारत की नागरिक उड्डयन सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियों की ओर संकेत किया था। जद(यू) सांसद संजय झा की अध्यक्षता वाली इस समिति की अगस्त 2025 की रिपोर्ट में कहा गया कि विशेष रूप से निजी और चार्टर्ड उड़ानों में हो रहे तेज़ विस्तार की तुलना में नियामक निगरानी पर्याप्त नहीं है, जिससे संपूर्ण विमानन प्रणाली में जोखिम बढ़ रहा है।
समिति द्वारा उठाई गई प्रमुख चिंताएँ:
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- नियामक निगरानी और विकास में असंतुलन: नियमित एयरलाइंस सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं, जबकि चार्टर्ड उड़ानों में नियमों का एकरूप और प्रभावी अनुपालन नहीं हो पाता।
- निजी/चार्टर्ड क्षेत्र की कमजोरियाँ: खराब रखरखाव, सीमित संचालन नियंत्रण प्रणाली और अपर्याप्त ऑडिट जैसी समस्याएँ सामने आई हैं। समिति ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से निरीक्षण प्रणाली को मजबूत करने और चार्टर्ड ऑपरेटरों के लिए भी नियमित एयरलाइंस के समान सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली लागू करने की सिफारिश की।
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की क्षमता और मानवीय कारक: नियामक संस्था पर कार्यभार अत्यधिक है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों की थकान तथा छोटे हवाई अड्डों पर ढाँचागत कमियाँ भी सुरक्षा जोखिम को बढ़ाती हैं। समिति ने स्टाफ की संख्या बढ़ाने, बेहतर प्रशिक्षण और संचार, नेविगेशन एवं निगरानी प्रणालियों के आधुनिकीकरण पर ज़ोर दिया।
- नियामक निगरानी और विकास में असंतुलन: नियमित एयरलाइंस सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं, जबकि चार्टर्ड उड़ानों में नियमों का एकरूप और प्रभावी अनुपालन नहीं हो पाता।
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भारत में विमानन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति:
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- हवाई अड्डों का विस्तार: 2014 में जहाँ देश में 74 चालू हवाई अड्डे थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 163 हो गई है। वर्ष 2047 तक 350–400 हवाई अड्डों के निर्माण की योजना है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट भीड़ कम करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
- यात्री यातायात: भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाज़ार बन चुका है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, दिल्ली ने साल 2024 में कुल लगभग 7 करोड़ 78 लाख यात्रियों की आवाजाही को सफलतापूर्वक प्रबंधित किया। उड़ान योजना के अंतर्गत 90 से अधिक हवाई अड्डों और 625 क्षेत्रीय मार्गों को जोड़ा गया है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क और यात्री संख्या दोनों में वृद्धि हुई है।
- बेड़ा विस्तार और आर्थिक योगदान: एयरलाइंस प्रतिवर्ष लगभग 100 नए विमान अपने बेड़े में शामिल कर रही हैं। यह क्षेत्र परोक्ष रूप से 77 लाख से अधिक रोजगारों को समर्थन देता है। 2025 में 15 अरब डॉलर का यह उद्योग 2030 तक 26 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
- हवाई अड्डों का विस्तार: 2014 में जहाँ देश में 74 चालू हवाई अड्डे थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 163 हो गई है। वर्ष 2047 तक 350–400 हवाई अड्डों के निर्माण की योजना है। नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट भीड़ कम करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
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नियामक ढाँचा:
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- नागरिक उड्डयन मंत्रालय: नीति निर्माण, द्विपक्षीय समझौते, उड़ान योजना तथा हवाई अड्डों के निजीकरण की देखरेख।
- नागरिक उड्डयन महानिदेशालय: सुरक्षा मानकों, लाइसेंस, प्रमाणन और एयर ऑपरेटर प्रमाणपत्रों की तकनीकी निगरानी।
- विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो: विमान दुर्घटनाओं की जाँच और सुरक्षा संबंधी सिफारिशें।
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण: हवाई अड्डों का प्रबंधन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और क्षेत्रीय संपर्क।
- नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो: विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी मानकों का पालन कराना।
- नागरिक उड्डयन मंत्रालय: नीति निर्माण, द्विपक्षीय समझौते, उड़ान योजना तथा हवाई अड्डों के निजीकरण की देखरेख।
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कानून:
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- भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024: नागरिक उड्डयन कानूनों का आधुनिकीकरण करता है और सुरक्षा निगरानी को सुदृढ़ बनाता है।
- विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण अधिनियम, 2025: विमान लीज़, वित्तपोषण और ऋणदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024: नागरिक उड्डयन कानूनों का आधुनिकीकरण करता है और सुरक्षा निगरानी को सुदृढ़ बनाता है।
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निष्कर्ष:
बारामती विमान हादसा संसदीय समिति की चेतावनियों को सही साबित करता है। भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ार को सुरक्षित बनाए रखने के लिए नियामक संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना, प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करना, ऑपरेटरों की सुरक्षा प्रणालियों को सुदृढ़ करना और हवाई अड्डों के ढाँचागत विकास पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।
