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Blog / 20 Mar 2026

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026

संदर्भ:

हाल ही में छत्तीसगढ़ विधान सभा नेछत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026पारित किया है, जो 1968 के पुराने कानून का स्थान लेता है। इस नए विधेयक में अवैध धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। इसमें सामूहिक धर्मांतरण के लिए आजीवन कारावास तक की सजा तथा धर्मांतरण से पूर्व घोषणा और सत्यापन को अनिवार्य किया गया है।

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के विषय में:

उद्देश्य:
यह विधेयक बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या मिथ्या प्रस्तुतीकरण के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने तथा स्वैच्छिक धर्मांतरण की प्रक्रिया को विनियमित करने के उद्देश्य से लाया गया है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ:

1. धर्मांतरण का विनियमन

        • धर्म परिवर्तन करने के इच्छुक व्यक्ति को जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना (घोषणा) देनी होगी।
        • प्रशासन द्वारा व्यक्ति का नाम, वर्तमान धर्म एवं प्रस्तावित धर्म सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाएगा।
        • आपत्तियाँ दर्ज की जा सकती हैं, जिसके बाद आधिकारिक जांच की जाएगी।

2. विवाह संबंधी प्रावधान

        • केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्मांतरण अमान्य माना जाएगा।
        • अंतरधार्मिक विवाह से पूर्व घोषणा अनिवार्य होगी।
        • ऐसे मामलों की जांच के लिए प्रशासन को अधिकार दिए गए हैं।

3. वित्तीय एवं संस्थागत नियंत्रण

        • अवैध धर्मांतरण में उपयोग होने वाले धन पर प्रतिबंध।
        • उल्लंघन की स्थिति में सरकार अनुदान या सहायता वापस ले सकती है।

Chhattisgarh Freedom of Religion Bill, 2026

दंड एवं कानूनी प्रावधान:

      • सभी अपराध संज्ञेय (cognisable) और गैर-जमानती (non-bailable) होंगे।
      • सामूहिक धर्मांतरण (2 या अधिक व्यक्ति):
        • न्यूनतम 10 वर्ष का कारावास
        • अधिकतम आजीवन कारावास
        • कम से कम ₹25 लाख का जुर्माना

संवेदनशील वर्ग (नाबालिग, महिला, एससी/एसटी) का धर्मांतरण:

      • 10 से 20 वर्ष का कारावास
      • कम से कम ₹10 लाख का जुर्माना
      • पीड़ित को ₹10 लाख तक मुआवजा
      • मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालयों में निर्धारित समयसीमा के भीतर की जाएगी।

कानून के पीछे का तर्क:

      • 1968 का कानून वर्तमान परिस्थितियों में अपर्याप्त माना गया।
      • जबरन एवं धोखाधड़ीपूर्ण धर्मांतरण की बढ़ती चिंताएँ।
      • अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और जबरन धर्मांतरण के विरुद्ध सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना।
      • सामाजिक समरसता बनाए रखना और धर्म के दुरुपयोग को रोकना।

चिंताएँ एवं प्रभाव:

      • प्रस्तावित कानूनों को लेकर व्यक्तिगत अधिकारों और स्वतंत्रताओं पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है। अनिवार्य सार्वजनिक प्रकटीकरण की व्यवस्था निजता के अधिकार का उल्लंघन कर सकती है, जिससे व्यक्ति अपनी अंतरात्मा की स्वतंत्रता का उपयोग करने से हिचक सकता है।
      • इसके अतिरिक्त, इन कानूनों में व्यापक परिभाषाएँ होने के कारण दुरुपयोग की संभावना भी बनी रहती है, जिससे कुछ समूहों को लक्षित किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसे कानून मौजूद हैं, जो धर्मांतरण को नियंत्रित करने की व्यापक नीति प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

निष्कर्ष:

छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 भारत में धर्मांतरण विरोधी कानूनों को और अधिक कठोर बनाता है। जहाँ एक ओर यह जबरन धर्मांतरण को रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास करता है, वहीं दूसरी ओर यह निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न भी उठाता है। इन सभी पहलुओं के बीच संतुलन बनाना इसके प्रभावी और न्यायसंगत क्रियान्वयन के लिए अत्यंत आवश्यक होगा।