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Blog / 20 May 2026

चंद्रयान-3 मिशन के ‘हॉप’ प्रयोग से चंद्रमा की उपसतही परतों का खुलासा

चंद्रयान-3 मिशन के हॉपप्रयोग से चंद्रमा की उपसतही परतों का खुलासा

संदर्भ:

चंद्रयान-3 के लैंडर द्वारा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट किए गए हॉप प्रयोग” (Hop Experiment) से प्राप्त आँकड़ों ने हाल ही में चंद्रमा की रेजोलिथ (धूल एवं चट्टानी सतह) संरचना के बारे में नई जानकारी प्रदान की है। मिशन से यह पता चला है कि चंद्रमा की ऊपरी सतह एकसमान नहीं है, बल्कि केवल कुछ सेंटीमीटर की गहराई में ही विभिन्न परतों से बनी हुई है। यह अध्ययन ChaSTE उपकरण के आँकड़ों के आधार पर द एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल (The Astrophysical Journal) में प्रकाशित किया गया।

चंद्रयान-3 मिशन के बारे में:

चंद्रयान-3 भारत का तीसरा चंद्र मिशन है, जिसे वर्ष 2023 में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया था। इसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट पहली सफल सॉफ्ट लैंडिंग हासिल की।

इस मिशन में शामिल थे:

      • विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर
      • एक चंद्र दिवस (लगभग 14 पृथ्वी दिवस) की संचालन अवधि
      • सतही संरचना, भूकंपीय गतिविधियों तथा तापीय अध्ययनों पर विशेष ध्यान
      • चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव संभावित जल-बर्फ भंडारों के कारण वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

हॉपप्रयोग क्या है?

हॉप प्रयोग (Hop Experiment) या 'हॉप टेस्ट', इसरो (ISRO) के चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर द्वारा चंद्रमा की सतह पर किया गया एक ऐतिहासिक और सफल परीक्षण है। इस प्रयोग के तहत, चंद्रयान-3 की मुख्य सॉफ्ट लैंडिंग के बाद, वैज्ञानिकों ने लैंडर के इंजनों को चंद्र सतह पर दोबारा चालू (Reignite) किया। इसके बाद विक्रम लैंडर ने हवा में करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर छलांग (Hop) लगाई और अपनी मूल जगह से 30 से 50 सेंटीमीटर दूर एक नए स्थान पर फिर से सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग की।

हॉपप्रयोग  के प्रमुख वैज्ञानिक निष्कर्ष:

      • दो अलग-अलग उपसतही परतें

        • ऊपरी सतह पर एक ढीली और छिद्रयुक्त (porous) परत मौजूद है।
        • 2–6 सेंटीमीटर की गहराई के नीचे अधिक सघन और ठोस परत पाई गई।
        • यह दर्शाता है कि बहुत कम गहराई में ही भौतिक और तापीय गुणों में तीव्र परिवर्तन होता है।
      • रॉकेट प्लूम द्वारा रेजोलिथ में परिवर्तन

        • लैंडर के निकास गैस (exhaust plume) ने चंद्र सतह की लगभग 3 सेंटीमीटर सामग्री को विस्थापित कर दिया। इससे पहले से दब चुकी परतें सतह पर आ गईं, जिससे उपकरणों को चंद्रमा पर प्लूममिट्टी (plume–soil) अंतःक्रिया का प्रत्यक्ष अध्ययन करने का अवसर मिला।
      • अत्यधिक तापीय प्रवणता (Thermal Gradient)

        • मापों से पता चला कि:
          • केवल 10 सेंटीमीटर की गहराई में तापमान लगभग 60°C तक घट जाता है।
          • चंद्र मिट्टी की तापीय चालकता (thermal conductivity) अत्यंत कम है।
          • यह जानकारी भविष्य में चंद्र आवास (lunar habitats) और तापीय सुरक्षा प्रणालियों के डिजाइन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ChaSTE के बारे में:

      • ChaSTE (चंद्रा सतह ताप-भौतिकीय प्रयोग) उपकरण Vikram Lander पर स्थापित था। इसमें एक छड़ (rod) के आकार की जांच प्रणाली थी, जिसमें विभिन्न गहराइयों पर तापमान सेंसर लगाए गए थे तथा इसके सिरे पर एक हीटर लगा हुआ था।
      • ChaSTE ने चंद्र सतह में प्रवेश करके तापमान परिवर्तन, ऊष्मा प्रवाह तथा मिट्टी के प्रतिरोध को रिकॉर्ड किया। हॉप प्रयोग के दौरान सतह में हुए परिवर्तन के बाद ChaSTE ने परिवर्तित रेजोलिथ परिस्थितियों का अध्ययन किया, जिससे वैज्ञानिकों को ऊपरी मुलायम परत और नीचे की सघन परत की तुलना करने में सहायता मिली।

निष्कर्षों का महत्व:

      • वैज्ञानिक महत्व: इन निष्कर्षों से चंद्रमा की मिट्टी (रेजोलिथ) के निर्माण, प्रभाव इतिहास (impact history) तथा उपसतही संरचना की समझ बेहतर हुई है। ये चंद्रमा की निकट-सतही परतों का सूक्ष्म स्तर पर तापीय और घनत्व प्रोफ़ाइल प्रदान करने वाले पहले अध्ययन हैं।
      • तकनीकी महत्व: हॉप प्रयोग ने निम्न क्षमताओं को प्रमाणित किया है:
        • सतह से नियंत्रित उड़ान भरने (controlled surface lift-off) की क्षमता
        • पृथ्वी से बाहर की सतहों पर थ्रस्टर के सटीक उपयोग की क्षमता
        • इंजन के निकास गैस (exhaust) के प्रभाव में रेजोलिथ के व्यवहार का अध्ययन
      • रणनीतिक महत्व: ये निष्कर्ष भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे, जिनमें शामिल हैं:
        • मानव चंद्र लैंडिंग मिशन
        • चंद्र आधार (Lunar Base) का निर्माण
        • नमूना-वापसी (Sample Return) मिशन
        • ये उपलब्धियाँ वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण और गहन अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की स्थिति को और मजबूत करती हैं।

निष्कर्ष:

चंद्रयान-3 का हॉप प्रयोग एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में उभरा है, जिसने केवल कुछ सेंटीमीटर की गहराई में चंद्रमा की परतदार उपसतही संरचना का खुलासा किया है। इससे चंद्र भूविज्ञान की समझ में वृद्धि हुई है तथा भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। यह उपलब्धि उन्नत अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रह संबंधी मिशनों में भारत की क्षमताओं को और सशक्त बनाती है।

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