संदर्भ:
हाल ही में, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक जवाबी हलफनामे में तर्क दिया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को केवल उसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिनके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है। आयोग ने CEC ज्ञानेश कुमार को कार्य करने से रोकने की मांग करने वाली याचिका का विरोध किया। ECI ने अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के संचालन का भी बचाव किया।
पृष्ठभूमि:
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- भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए होने वाले चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।
- यह विवाद निर्वाचन आयोग के कामकाज, विशेष रूप से मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण से संबंधित कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों के बीच सामने आया। याचिका में इस बात पर सवाल उठाया गया कि क्या मुख्य निर्वाचन आयुक्त व्यक्तिगत रूप से बहुसदस्यीय आयोग की शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं या उसका प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
- ECI ने तर्क दिया कि याचिका में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित किए बिना केवल एक समाचार पत्र की रिपोर्ट पर भरोसा किया गया है। आयोग ने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कार्य करने से रोकना आयोग को नियंत्रित करने वाले संवैधानिक और वैधानिक ढाँचे के विपरीत होगा।
- भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जो संसद, राज्य विधानमंडलों तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के लिए होने वाले चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।
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संवैधानिक प्रावधान:
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- अनुच्छेद 324 – भारत निर्वाचन आयोग
- अनुच्छेद 324(1) चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग को सौंपता है।
- अनुच्छेद 324(2) संसद द्वारा बनाए गए कानून के अधीन, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 324(5) मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया और आधारों के अतिरिक्त किसी अन्य तरीके से हटाए जाने से संरक्षण प्रदान करता है।
- अन्य निर्वाचन आयुक्तों और क्षेत्रीय निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता।
- अनुच्छेद 324(1) चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग को सौंपता है।
- अनुच्छेद 124(4) – सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाना
- सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से समर्थित प्रस्ताव और राष्ट्रपति का आदेश आवश्यक होता है।
- चूँकि अनुच्छेद 324(5) मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के मामले में समान सुरक्षा प्रदान करता है, इसलिए संस्थागत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए यह प्रक्रिया जानबूझकर कठोर बनाई गई है।
- सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में निर्धारित विशेष बहुमत से समर्थित प्रस्ताव और राष्ट्रपति का आदेश आवश्यक होता है।
- अनुच्छेद 324 – भारत निर्वाचन आयोग
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कानूनी ढाँचा:
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- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023, निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों, सेवा की शर्तों, कार्यकाल और कामकाज के संचालन को नियंत्रित करता है।
- धारा 11: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाए जाने से संबंधित संरक्षण सहित, त्यागपत्र और पद से हटाने के लिए वैधानिक ढाँचा निर्धारित करती है।
- धारा 18: आयोग के कामकाज के संचालन का प्रावधान करती है। इसके अंतर्गत जहाँ तक संभव हो, निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और मतभेद होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय किया जाता है।
- धारा 11: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाए जाने से संबंधित संरक्षण सहित, त्यागपत्र और पद से हटाने के लिए वैधानिक ढाँचा निर्धारित करती है।
- ECI ने कहा कि SIR से संबंधित निर्णयों सहित उसके सभी निर्णय निर्धारित निर्णय-प्रक्रिया के अनुसार लिए गए हैं।
- मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023, निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों, सेवा की शर्तों, कार्यकाल और कामकाज के संचालन को नियंत्रित करता है।
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भारतीय लोकतंत्र के लिए महत्त्व:
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- संस्थागत स्वतंत्रता: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कार्यपालिका द्वारा मनमाने ढंग से हटाए जाने से सुरक्षा प्रदान करती है।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव: चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास को बनाए रखने में मदद करती है।
- संवैधानिक जवाबदेही: सिद्ध कदाचार या अक्षमता के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए पद से हटाने के लिए एक कठोर प्रक्रिया निर्धारित करती है।
- कानून का शासन: संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से विवादों का समाधान करने के महत्त्व को रेखांकित करता है।
- संस्थागत स्वतंत्रता: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कार्यपालिका द्वारा मनमाने ढंग से हटाए जाने से सुरक्षा प्रदान करती है।
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निष्कर्ष:
निर्वाचन आयोग द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामा संस्थागत स्वतंत्रता, जवाबदेही और संस्थागत अखंडता के बीच संवैधानिक संतुलन को सामने लाता है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को मनमाने ढंग से हटाए जाने से सुरक्षा प्रदान करना आवश्यक है, लेकिन जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्रक्रियाएँ, निष्पक्ष आचरण और संवैधानिक सिद्धांतों का पालन भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
