संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने पुडुचेरी में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के अंतर्गत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लिए केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) आधारित डिजिटल फूड करेंसी पायलट परियोजना शुरू किया है। यह पहल उन्नत वित्तीय तकनीकों के माध्यम से खाद्य सब्सिडी वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, लक्षित और डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पुडुचेरी सीबीडीसी पायलट का विवरण:
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- इस पायलट परियोजना के तहत सरकार खाद्य सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के सीबीडीसी वॉलेट में प्रोग्राम योग्य डिजिटल टोकन (e₹) के रूप में हस्तांतरित करेगी। इन टोकनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है।
- ये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था के अंतर्गत सीधे लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में जमा किए जाते हैं।
- इनका उपयोग केवल अधिकृत उचित मूल्य की दुकानों और मान्यता प्राप्त व्यापारिक केंद्रों पर निर्धारित खाद्यान्न तथा संबंधित वस्तुओं की खरीद के लिए किया जा सकता है।
- ये पूर्णतः उद्देश्य-आधारित हैं, अर्थात सब्सिडी की राशि का उपयोग किसी अन्य कार्य या वस्तु के लिए नहीं किया जा सकेगा।
- इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी किया जाता है।
- इस पायलट परियोजना के तहत सरकार खाद्य सब्सिडी की राशि सीधे लाभार्थियों के सीबीडीसी वॉलेट में प्रोग्राम योग्य डिजिटल टोकन (e₹) के रूप में हस्तांतरित करेगी। इन टोकनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
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महत्व और संभावित प्रभाव:
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- पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि: प्रोग्राम योग्य डिजिटल टोकन के माध्यम से सब्सिडी की राशि के हस्तांतरण, उपयोग और अंतिम उपभोग तक की वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी संभव होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनेगी।
- दुरुपयोग में कमी: चूँकि यह राशि उद्देश्य-निर्धारित (Purpose-bound) है, इसलिए इसे केवल निर्धारित खाद्यान्न की खरीद के लिए ही उपयोग किया जा सकेगा। इससे लाभों के विचलन, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
- वितरण प्रणाली में अधिक दक्षता: डिजिटल माध्यम से सीधे लाभार्थियों के वॉलेट में राशि पहुँचने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त या न्यूनतम होगी। इससे देरी कम होगी और वितरण प्रणाली अधिक तेज, सरल और प्रभावी बनेगी।
- डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा: यह पहल लाभार्थियों को औपचारिक डिजिटल भुगतान तंत्र से जोड़कर उन्हें डिजिटल वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनाती है, जिससे वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को भी मजबूती मिलती है।
- पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि: प्रोग्राम योग्य डिजिटल टोकन के माध्यम से सब्सिडी की राशि के हस्तांतरण, उपयोग और अंतिम उपभोग तक की वास्तविक समय (रियल-टाइम) निगरानी संभव होगी, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनेगी।
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प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के बारे में:
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) एक प्रमुख सरकारी खाद्य सुरक्षा योजना है, जिसे मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान आपात राहत पैकेज के रूप में प्रारंभ किया गया था। यह योजना खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत संचालित की जाती है। यह विश्व की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजनाओं में से एक है, जिससे 81 करोड़ से अधिक लोग (लगभग भारत की 57 प्रतिशत जनसंख्या) लाभान्वित होते हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के बारे में:
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- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भारत की प्रमुख खाद्य सुरक्षा व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य पात्र परिवारों को कम दरों पर आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत राशन कार्डधारक परिवार अधिकृत उचित मूल्य की दुकानों से सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर गेहूँ, चावल और मोटे अनाज जैसे खाद्यान्न प्राप्त करते हैं।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली का संचालन राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भूख की समस्या को कम करना, पोषण स्तर में सुधार करना और कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना है।
- पूर्व में खाद्यान्न और सब्सिडी का वितरण मुख्य रूप से पारंपरिक भौतिक नेटवर्क के माध्यम से किया जाता था। समय के साथ पारदर्शिता बढ़ाने और दुरुपयोग कम करने के लिए आधार-आधारित प्रमाणीकरण, वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) तथा ई-पॉस मशीनों जैसी तकनीकी व्यवस्थाएँ लागू की गईं।
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) भारत की प्रमुख खाद्य सुरक्षा व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य पात्र परिवारों को कम दरों पर आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराना है। इसके अंतर्गत राशन कार्डधारक परिवार अधिकृत उचित मूल्य की दुकानों से सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर गेहूँ, चावल और मोटे अनाज जैसे खाद्यान्न प्राप्त करते हैं।
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केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) क्या है?
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) किसी देश की आधिकारिक वैध मुद्रा का डिजिटल स्वरूप है, जिसे संबंधित देश का केंद्रीय बैंक जारी और नियंत्रित करता है। भारत में CBDC को डिजिटल रुपया (e₹) कहा जाता है। यह निजी क्रिप्टोकरेंसी से भिन्न है, क्योंकि यह वैध मुद्रा है और भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समर्थित है। इसका मूल्य कागजी मुद्रा के समान होता है। इसका उद्देश्य केंद्रीय बैंक की विश्वसनीयता और स्थिरता को डिजिटल लेन-देन की सुविधा, सुरक्षा और दक्षता के साथ जोड़ना है।
निष्कर्ष:
यह पायलट परियोजना सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली (PFMS) तथा केनरा बैंक के सहयोग से लागू किया जा रहा है। पुडुचेरी में इसके परिणामों के मूल्यांकन के पश्चात इसे चरणबद्ध तरीके से अन्य केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों में विस्तारित करने की योजना है। यह पहल तकनीक-आधारित कल्याणकारी सुधारों की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करती है।

