सन्दर्भ:
हाल ही में वैश्विक प्रवाल भित्ति निगरानी नेटवर्क (Global Coral Reef Monitoring Network) द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार 1980 से 2024 के बीच कैरिबियन क्षेत्र में कठोर कोरल कवर लगभग 48% तक घट चुका है। कैरिबियन क्षेत्र दुनिया के कुल प्रवाल भित्ति क्षेत्र का लगभग 9.7% हिस्सा रखता है, इसलिए यह गिरावट वैश्विक पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत गंभीर है। कोरल रीफ पृथ्वी के सबसे अधिक जैव-विविध (biodiverse) पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। ये लगभग समुद्री प्रजातियों के एक-तिहाई को आश्रय देते हैं और साथ ही तटीय सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा तथा लाखों लोगों की आजीविका को सहारा प्रदान करते हैं।
हार्ड (स्टोनी) कोरल क्या हैं?
हार्ड कोरल समुद्री जीव होते हैं, जो हजारों सूक्ष्म पॉलिप्स (polyps) से मिलकर बने होते हैं। ये पॉलिप्स कैल्शियम कार्बोनेट का स्राव करते हैं, जिससे चूना-पत्थर जैसी संरचना बनती है और वही कोरल रीफ का ढांचा तैयार करती है।
हार्ड कोरल का पारिस्थितिक महत्व :
· जटिल रीफ संरचनाएँ बनाकर समुद्री जैव-विविधता को सहारा देना।
· तूफानों और तटीय कटाव (coastal erosion) से प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करना।
· मत्स्य पालन, पर्यटन और तटीय आजीविकाओं को बनाए रखना।
सॉफ्ट कोरल के विपरीत, हार्ड कोरल ही रीफ पारिस्थितिकी तंत्र के मुख्य निर्माता होते हैं। इनका पतन होने पर संरचनात्मक जटिलता समाप्त होती है, जैव-विविधता में कमी आती है और पूरा तंत्र अस्थिर हो जाता है।
कोरल पतन के प्रमुख कारण:
1. महासागरीय तापवृद्धि और सामूहिक ब्लीचिंग:
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- समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण 1998, 2005 तथा 2023–24 में बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग घटनाएँ हुईं।
- तापीय तनाव के कारण कोरल अपने सहजीवी शैवाल (zooxanthellae) को बाहर निकाल देते हैं, जिससे ऊर्जा की कमी होती है और व्यापक मृत्यु होती है।
- समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण 1998, 2005 तथा 2023–24 में बड़े पैमाने पर ब्लीचिंग घटनाएँ हुईं।
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2. कोरल रोग – SCTLD:
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- स्टोनी कोरल टिश्यू लॉस डिज़ीज़ (SCTLD) पहली बार 2014 में मियामी के पास दर्ज की गई। इसके बाद यह 30 से अधिक कैरिबियन देशों में फैल चुकी है।
- यह बीमारी 30 से अधिक कोरल प्रजातियों को प्रभावित करती है, नवजात कोरल (recruits) तक को नष्ट कर देती है और इसे अब तक की सबसे विनाशकारी कोरल बीमारी माना जाता है।
- स्टोनी कोरल टिश्यू लॉस डिज़ीज़ (SCTLD) पहली बार 2014 में मियामी के पास दर्ज की गई। इसके बाद यह 30 से अधिक कैरिबियन देशों में फैल चुकी है।
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3. प्रमुख रीफ निर्माताओं का पतन:
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- एक्रोपोरा कोरल: 1970 के दशक में इनका आवरण लगभग 16% था, जो 1980 के बाद घटकर 1.8% रह गया।
- ऑर्बिसेला कोरल: 1998 की ब्लीचिंग के बाद इनमें भारी गिरावट आई और वर्तमान में यह लगभग 5% पर स्थिर हैं।
- पोराइट्स जैसे तनाव-सहिष्णु कोरल की संख्या में वृद्धि हुई है, किंतु वे खोई हुई रीफ संरचना की भरपाई करने में सक्षम नहीं हैं।
- एक्रोपोरा कोरल: 1970 के दशक में इनका आवरण लगभग 16% था, जो 1980 के बाद घटकर 1.8% रह गया।
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4. शाकाहारी जीवों का क्षय और शैवाल प्रभुत्व
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- डायडेमा सी अर्चिन का 1980 के दशक में तथा पुनः 2022 में पतन हुआ। पैरटफिश की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
- इसके परिणामस्वरूप चराई में कमी आई और मैक्रो-एल्गी का आवरण लगभग 85% तक बढ़ गया, जिससे रीफ कोरल-प्रधान से शैवाल-प्रधान पारिस्थितिक तंत्र में परिवर्तित हो गए।
- डायडेमा सी अर्चिन का 1980 के दशक में तथा पुनः 2022 में पतन हुआ। पैरटफिश की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
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5. मानवीय दबाव और आक्रामक प्रजातियाँ:
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- रीफ से 20 किमी के भीतर तटीय जनसंख्या में 2000–2020 के बीच 27.6% की वृद्धि हुई, जिससे प्रदूषण और पोषक तत्वों का बहाव बढ़ा।
- लायनफिश तथा आक्रामक सॉफ्ट कोरल (Unomia, Xenia, Latissimia) कठोर कोरल को विस्थापित कर रहे हैं और रीफ पारिस्थितिक तंत्र को बाधित कर रहे हैं।
- रीफ से 20 किमी के भीतर तटीय जनसंख्या में 2000–2020 के बीच 27.6% की वृद्धि हुई, जिससे प्रदूषण और पोषक तत्वों का बहाव बढ़ा।
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निष्कर्ष:
1980 के दशक से कैरिबियन कोरल रीफ का आधा नष्ट हो जाना, जलवायु परिवर्तन के समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों पर पड़ रहे तीव्र प्रभावों की एक गंभीर वैश्विक चेतावनी है। बढ़ता समुद्री तापमान, रोगों का प्रसार, पारिस्थितिक असंतुलन और मानवीय दबाव मिलकर कोरल रीफ को अपरिवर्तनीय पतन की ओर धकेल रहे हैं। यदि तत्काल जलवायु शमन और पारिस्थितिकी-आधारित संरक्षण नहीं अपनाया गया, तो ‘समुद्र के वर्षावन’ कहे जाने वाले कोरल रीफ मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण नष्ट होने वाले पहले प्रमुख पारिस्थितिक तंत्र बन सकते हैं।

