संदर्भ:
हाल ही में, भारत के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर आए आईपीएस या संबंधित बलों में पदोन्नति पाए अधिकारी, इसे लेकर एक नया विवाद सामने आया है। यह मुद्दा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को चुनौती दिए जाने के बाद फिर से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पहुंच गया है। यह कानून वरिष्ठ स्तरों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जारी रखने का प्रावधान करता है।
CAPFs क्या हैं?
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- नए कानून के अंतर्गत आने वाले पाँच CAPFs हैं:
- CRPF – आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद-रोधी अभियान।
- BSF – पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगने वाली सीमाओं की सुरक्षा।
- CISF – महत्वपूर्ण अवसंरचना, हवाई अड्डों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा।
- ITBP – भारत-चीन सीमा की सुरक्षा।
- SSB – भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमा की सुरक्षा।
- CRPF – आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद-रोधी अभियान।
- इनके ग्रुप A कार्यकारी अधिकारियों की सामान्यतः सहायक कमांडेंट (Assistant Commandants) के रूप में भर्ती होती है और वे पदानुक्रम में आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ कमान पदों तक पहुँच सकते हैं।
- नए कानून के अंतर्गत आने वाले पाँच CAPFs हैं:
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मुख्य विवाद क्या है?
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- CAPF कैडर अधिकारियों की मुख्य शिकायत करियर में ठहराव (Career Stagnation) को लेकर है। वरिष्ठ पदों को परंपरागत रूप से आंशिक रूप से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों, विशेष रूप से आईपीएस अधिकारियों, द्वारा भरा जाता रहा है।
- 2026 के कानून से पहले, भर्ती नियमों के तहत डीआईजी के 20% पद और आईजी के 50% पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाने का प्रावधान था। CAPF अधिकारी तर्क देते हैं कि इससे उन अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर कम हो जाते हैं, जिन्होंने अपना पूरा करियर संबंधित बलों में बिताया है।
- लगभग 18,000 CAPF अधिकारी शुरू में बेहतर करियर प्रगति और CAPFs को संगठित समूह A सेवाओं (OGAS) के रूप में मान्यता देने की मांग को लेकर नामांकन में शामिल हुए थे।
- CAPF कैडर अधिकारियों की मुख्य शिकायत करियर में ठहराव (Career Stagnation) को लेकर है। वरिष्ठ पदों को परंपरागत रूप से आंशिक रूप से प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों, विशेष रूप से आईपीएस अधिकारियों, द्वारा भरा जाता रहा है।
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सर्वोच्च न्यायालय का 2025 का निर्णय:
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- संजय प्रकाश बनाम भारत संघ (2025) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कैडर से संबंधित उद्देश्यों के लिए CAPFs को OGAS के रूप में मान्यता दी और सरकार को छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा (Cadre Review) करने का निर्देश दिया।
- सबसे महत्वपूर्ण रूप से, न्यायालय ने निर्देश दिया कि वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (SAG) तक प्रतिनियुक्ति के लिए निर्धारित पदों को अधिकतम दो वर्ष की समय-सीमा के भीतर धीरे-धीरे कम किया जाए। इसका उद्देश्य परिचालन संबंधी आवश्यकताओं और करियर में गतिशीलता के बीच संतुलन स्थापित करना तथा CAPF अधिकारियों में करियर ठहराव को दूर करना था।
- संजय प्रकाश बनाम भारत संघ (2025) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कैडर से संबंधित उद्देश्यों के लिए CAPFs को OGAS के रूप में मान्यता दी और सरकार को छह महीने के भीतर कैडर समीक्षा (Cadre Review) करने का निर्देश दिया।
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2026 का CAPF अधिनियम क्या प्रावधान करता है?
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 पाँचों CAPFs में ग्रुप A अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करता है।
इस अधिनियम में प्रावधान है:
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- IG के 50% पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से;
- ADG के कम से कम 67% पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से;
- सभी DG और Special DG पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से।
- IG के 50% पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से;
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CAPF के पूर्व अधिकारी इसका विरोध क्यों करते हैं?
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- करियर में ठहराव: प्रतिनियुक्ति से बल के भीतर कार्यरत अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर कम हो जाते हैं।
- संस्थागत विशेषज्ञता: बलों के अनुभवी अधिकारियों के पास सीमा प्रबंधन, उग्रवाद-रोधी अभियान, आंतरिक सुरक्षा और परिचालन कमान का दशकों का विशेष अनुभव होता है।
- मनोबल: पदोन्नति में देरी और शीर्ष पदों तक पहुँचने के सीमित अवसर संगठनात्मक मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
- संगठनात्मक स्वामित्व: अधिकारियों का तर्क है कि जिन लोगों ने अपना पूरा करियर किसी बल में सेवा करते हुए बिताया है, उन्हें उस बल का नेतृत्व करने का सार्थक अवसर मिलना चाहिए।
- 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि प्रतिनियुक्ति को कम करने से प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया में CAPF कैडर अधिकारियों की भागीदारी बढ़ेगी।
- करियर में ठहराव: प्रतिनियुक्ति से बल के भीतर कार्यरत अधिकारियों के लिए पदोन्नति के अवसर कम हो जाते हैं।
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सरकार IPS प्रतिनियुक्ति का समर्थन क्यों करती है?
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- सरकार का तर्क है कि CAPFs अक्सर राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसलिए IPS अधिकारी केंद्रीय और राज्य पुलिस संस्थानों के बीच संस्थागत समन्वय प्रदान कर सकते हैं।
- केंद्र ने यह भी कहा है कि CAPFs की परिचालन आवश्यकताएँ विशिष्ट हैं और उन्हें सामान्य नागरिक ग्रुप A सेवाओं की तरह नहीं माना जा सकता। IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को केंद्र-राज्य समन्वय, आंतरिक सुरक्षा अभियानों और प्रशासनिक प्रबंधन के लिए उपयोगी माना जाता है।
- सरकार का तर्क है कि CAPFs अक्सर राज्य पुलिस बलों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसलिए IPS अधिकारी केंद्रीय और राज्य पुलिस संस्थानों के बीच संस्थागत समन्वय प्रदान कर सकते हैं।
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निष्कर्ष:
IPS-CAPF विवाद केवल वरिष्ठ पदों को लेकर मतभेद नहीं है। यह परिचालन दक्षता, संस्थागत विशेषज्ञता, करियर प्रगति और संगठनात्मक मनोबल के बीच संतुलन स्थापित करने की व्यापक चुनौती को दर्शाता है। भारत को ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें IPS अधिकारी और CAPF के अनुभवी अधिकारी एक-दूसरे की क्षमताओं के पूरक बनें, साथ ही लंबे समय से सेवा दे रहे CAPF अधिकारियों को कमान के सर्वोच्च स्तरों तक पहुँचने का निष्पक्ष और विश्वसनीय अवसर मिले।

