होम > Blog

Blog / 26 Mar 2026

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 संसद में प्रस्तुत किया गया है। यह विधेयक वर्ष 2025 में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के कैडर अधिकारों से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय की पृष्ठभूमि में लाया गया है।

पृष्ठभूमि:

मई 2025 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि वह दो वर्षों के अंदर CAPFs में डीआईजी (DIG) और आईजी (IG) स्तर पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के प्रतिनियुक्ति को क्रमिक रूप से कम करे। न्यायालय ने यह भी अवलोकन किया कि अत्यधिक IPS वर्चस्व, CAPF कैडर अधिकारियों के कैरियर में ठहराव का कारण बना जिससे मनोबल और प्रेरणा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। बाद में केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई, जिससे यह निर्णय और अधिक सुदृढ़ हो गया।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) के बारे में:

CAPFs सात सुरक्षा बलों का समूह है, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करते हैं। इनका मुख्य दायित्व आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना, सीमाओं की रक्षा करना तथा महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा करना है।

प्रमुख CAPFs और उनकी भूमिका:

      • केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF, 1939): सबसे बड़ा CAPF; आंतरिक सुरक्षा, विद्रोह-रोधी अभियानों और चुनावी ड्यूटी में संलग्न
      • सीमा सुरक्षा बल (BSF, 1965): पाकिस्तान और बांग्लादेश की सीमाओं की सुरक्षा
      • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP, 1962): भारत-चीन सीमा के उच्च हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा
      • केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF, 1969): हवाई अड्डों और सार्वजनिक उपक्रमों जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचनाओं की सुरक्षा
      • सशस्त्र सीमा बल (SSB, 1963): नेपाल और भूटान की सीमाओं की रक्षा
      • अन्य महत्वपूर्ण बल:
        • असम राइफल्स (1835): सबसे पुराना बल; भारत-म्यांमार सीमा की सुरक्षा
        • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG): विशिष्ट आतंकवाद-रोधी बल (ब्लैक कैट्स”)

CAPFs आतंकवाद-रोधी अभियान, वामपंथी उग्रवाद नियंत्रण, सीमा सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन जैसे विविध कार्यों का निर्वहन करते हैं और भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

यह विधेयक CAPFs के लिए एक समग्र (umbrella) विधिक ढांचा प्रस्तुत करता है तथा IPS की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले प्रावधानों को सम्मिलित करता है:

      • ओवरराइड क्लॉज (Override Clause): केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नियम किसी भी कानून या न्यायालय के निर्णय पर वरीयता प्राप्त करेंगे
      • संस्थागत IPS प्रतिनियुक्ति:
        • 50% IG पद IPS अधिकारियों से भरे जाएंगे
        • कम से कम 67% अतिरिक्त महानिदेशक (Additional DG) पद
        • 100% महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (Special DG) पद IPS के लिए आरक्षित
      • केंद्रीकृत नियंत्रण: गृह मंत्रालय को भर्ती, पदोन्नति और सेवा शर्तों को विनियमित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

यह प्रावधान उच्च कमान पदों पर IPS वर्चस्व को प्रभावी रूप से बनाए रखता है।

सरकार का तर्क:

सरकार का तर्क है कि IPS अधिकारी निम्नलिखित कारणों से आवश्यक हैं:

      • केंद्र और राज्य के बीच समन्वय, क्योंकि वे दोनों स्तरों पर कार्य करते हैं
      • रणनीतिक नेतृत्व और नीतिगत समेकन
      • जटिल सुरक्षा परिस्थितियों में एकीकृत कमान

भारत के समक्ष विद्रोह, वामपंथी उग्रवाद और सीमा सुरक्षा जैसी चुनौतियों को देखते हुए, एकीकृत नेतृत्व को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

CAPF अधिकारियों द्वारा उठाई गई चिंताएँ:

सेवारत एवं सेवानिवृत्त CAPF अधिकारियों ने इस विधेयक का विरोध किया है, जिनके प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं:

      • कैरियर ठहराव: अधिकारियों को लंबे समय तक प्रवेश-स्तर के पदों पर ही बने रहना पड़ता है।
      • सीमित पदोन्नति: प्रतिनियुक्ति प्रणाली के कारण कैडर अधिकारियों के लिए अवसर कम हो जाते हैं।
      • संचालन और नेतृत्व में अंतर: मैदान में नेतृत्व CAPF अधिकारी करते हैं, जबकि शीर्ष प्रशासनिक पद IPS अधिकारियों के पास होते हैं।
      • वेतन और स्थिति संबंधी समस्याएँ: गैर-कार्यात्मक उन्नयन (NFU) लाभों का पर्याप्त कार्यान्वयन नहीं होता है।

निष्कर्ष:

CAPF विधेयक, 2026 एक केंद्रीकृत एवं समन्वित नेतृत्व मॉडल को संस्थागत रूप देने का प्रयास करता है, परंतु यह कैडर न्याय और संगठनात्मक संतुलन से संबंधित गंभीर प्रश्न भी उठाता है। भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में प्रभावशीलता और मनोबल दोनों को बनाए रखने के लिए एक संतुलित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक है।