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Blog / 25 Apr 2026

BRICS–MENA वार्ता: पश्चिम एशिया संघर्ष, भारत की भूमिका

BRICS–MENA वार्ता

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों और MENA (मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका) देशों के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा की गई। बैठक का मुख्य विषय पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष था, जिसमें अमेरिका, इज़राइल और ईरान शामिल हैं। सभी देशों ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा की।

चर्चा के प्रमुख बिंदु:

      • बैठक में पश्चिम एशिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें शामिल हैं:
        • क्षेत्र में जारी संघर्ष
        • फिलिस्तीन और गाजा की स्थिति
        • प्रभावित लोगों के लिए मानवीय सहायता की आवश्यकता
        • राहत कार्यों में UNRWA की भूमिका
        • आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता (zero-tolerance) का साझा दृष्टिकोण
      • हालांकि, चर्चा में यह भी सामने आया कि सभी देशों की राय एक समान नहीं थी। संघर्ष के कारणों और समाधान को लेकर विभिन्न देशों के अलग-अलग दृष्टिकोण थे।

BRICS–MENA Dialogue

BRICS–MENA के बारे में:

BRICS–MENA से तात्पर्य BRICS देशों और मध्य पूर्व एवं उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र के बीच सहयोग और संवाद से है, जो विस्तारित BRICS+ ढांचे के अंतर्गत आता है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएँ मिलकर वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करती हैं और सहयोग बढ़ाती हैं।

BRICS–MENA का महत्व:

      • यह समूह कई कारणों से महत्वपूर्ण है। MENA क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों से समृद्ध है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत अहम बनता है। यह क्षेत्र एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच स्थित होने के कारण भू-राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
      • BRICS और MENA देशों की संयुक्त जनसंख्या और GDP का बड़ा हिस्सा होने के कारण इनकी वैश्विक आर्थिक शक्ति भी काफी अधिक है। यह मंच ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करता है और संयुक्त राष्ट्र, IMF तथा विश्व बैंक जैसे वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों के हितों को उठाने में मदद करता है। साथ ही यह ऊर्जा, व्यापार, विकास और संघर्ष जैसे वैश्विक मुद्दों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

भारत की भूमिका:

भारत ने इस बैठक की अध्यक्षता की और विभिन्न देशों के बीच एक सेतु (bridge)” की भूमिका निभाई। भारत का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि उसके पश्चिम एशिया के कई देशों के साथ अच्छे संबंध हैं। भारत हमेशा संघर्ष के बजाय संवाद और कूटनीति (diplomacy) का समर्थन करता है और विभिन्न देशों को एक साझा मंच पर लाने में मदद करता है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है।

मुख्य चुनौती:

हालांकि इस मंच पर देशों को एक साथ लाया गया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विभिन्न देशों के हित और दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, ईरान, यूएई और अन्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। इसी कारण सभी देशों के लिए एक साझा और एकमत स्थिति बनाना कठिन है। वर्तमान में BRICS–MENA अधिकतर एक चर्चा मंच (dialogue platform) है, न कि निर्णय लेने वाला संगठन।

निष्कर्ष:

BRICS–MENA सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं और ऊर्जा-संपन्न देशों को एक साथ लाता है। इसका विकास यह दर्शाता है कि दुनिया एक बहुध्रुवीय (multipolar) व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहाँ ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक निर्णय-प्रक्रिया में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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