संदर्भ:
हाल ही में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) कृषि मंत्रियों की बैठक का समापन इंदौर घोषणा (Indore Declaration) को सर्वसम्मति से अपनाने के साथ हुआ। यह एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जिसका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-अनुकूल कृषि, कृषि व्यापार तथा कृषि के डिजिटल रूपांतरण को मजबूत करना है।
इंदौर घोषणा के प्रमुख परिणाम:
1. चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र
ब्रिक्स देशों ने कृषि क्षेत्र में निम्नलिखित चार प्रमुख प्राथमिकताएँ निर्धारित कीं:
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- खाद्य सुरक्षा एवं पौष्टिक आहार
- कृषि व्यापार और सहयोग
- जलवायु-सहिष्णु (Climate-Resilient) एवं पुनर्योजी (Regenerative) कृषि
- खाद्य प्रणालियों में नवाचार, प्रौद्योगिकी और साझेदारी
- खाद्य सुरक्षा एवं पौष्टिक आहार
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इसके अतिरिक्त लघु एवं सीमांत किसानों के कल्याण, उन्हें ऋण सुविधा, उचित मूल्य तथा बाज़ार से जुड़ाव उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।
चार नई संस्थागत पहलें:
(1) कृषि-पारिस्थितिकी एवं पुनर्योजी कृषि पर उत्कृष्टता केंद्रों का ब्रिक्स नेटवर्क
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- प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।
- संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और ज्ञान-साझाकरण को प्रोत्साहित करेगा।
- भारत का भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (Indian Institute of Farming Systems Research), मोदीपुरम इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देगा।
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(2) डिजिटल कृषि पर ब्रिक्स नेटवर्क
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- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial Technologies), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा-आधारित खेती पर केंद्रित होगा।
- इसका समन्वय आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) द्वारा किया जाएगा।
- इसका उद्देश्य तकनीकी नवाचारों को सीधे किसानों तक पहुँचाना है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial Technologies), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डेटा-आधारित खेती पर केंद्रित होगा।
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3.बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच
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- किसानों के बीज संबंधी अधिकारों और स्वदेशी बीज विविधता की रक्षा करेगा।
- पारंपरिक ज्ञान एवं जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देगा।
- खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होगा।
- किसानों के बीज संबंधी अधिकारों और स्वदेशी बीज विविधता की रक्षा करेगा।
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(4) एग्रो इनपुट्स, जेनेटिक रिसोर्सेज एंड इंफॉर्मेशन नेटवर्क
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- बीज, आनुवंशिक संसाधनों तथा कृषि आदानों (Agricultural Inputs) में सहयोग को मजबूत करेगा।
- सूचना-साझाकरण, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करेगा।
- बीज, आनुवंशिक संसाधनों तथा कृषि आदानों (Agricultural Inputs) में सहयोग को मजबूत करेगा।
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अन्य महत्वपूर्ण परिणाम:
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- ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच (Agricultural Research Platform) को “Knowledge-to-Action Hub” के रूप में सुदृढ़ बनाने पर सहमति।
- निष्पक्ष और पारदर्शी बहुपक्षीय कृषि व्यापार प्रणाली के समर्थन पर बल।
- संभावित BRICS Grain Exchange (अनाज विनिमय मंच) पर चर्चा।
- खाद्य हानि (Food Loss) और खाद्य अपव्यय (Food Waste) को कम करने हेतु सहयोग।
- जलवायु अनुकूलन, पुनर्योजी कृषि तथा किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट के अवसरों पर विशेष ध्यान।
- कृषि क्षेत्र में युवा, महिलाओं, स्टार्टअप्स और कृषि-उद्यमियों (Agri-Entrepreneurs) की अधिक भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर।
- ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच (Agricultural Research Platform) को “Knowledge-to-Action Hub” के रूप में सुदृढ़ बनाने पर सहमति।
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महत्व:
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- ब्रिक्स (BRICS) देश विश्व की लगभग 50% जनसंख्या, 42% वैश्विक कृषि भूमि तथा 42% वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए ब्रिक्स द्वारा लिए गए निर्णय वैश्विक कृषि शासन (Global Agricultural Governance) को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
- भारत के लिए यह घोषणा प्राकृतिक खेती (Natural Farming), डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission), खाद्य सुरक्षा, जलवायु-सहिष्णुता (Climate Resilience) तथा किसान-केंद्रित विकास जैसी प्राथमिकताओं के अनुरूप है। साथ ही, यह वैश्विक कृषि सहयोग को दिशा देने में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी मजबूत करती है।
- ब्रिक्स (BRICS) देश विश्व की लगभग 50% जनसंख्या, 42% वैश्विक कृषि भूमि तथा 42% वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए ब्रिक्स द्वारा लिए गए निर्णय वैश्विक कृषि शासन (Global Agricultural Governance) को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं।
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निष्कर्ष:
इंदौर घोषणा एक अधिक सतत (Sustainable), प्रौद्योगिकी-संचालित (Technology-Driven) और किसान-केंद्रित (Farmer-Centric) कृषि भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नवाचार, जलवायु-सहिष्णुता, बीज संप्रभुता (Seed Sovereignty) तथा डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देकर ब्रिक्स देशों ने यह प्रदर्शित किया है कि वैश्विक खाद्य एवं कृषि चुनौतियों के समाधान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ):
प्र1. BRICS कृषि मंत्रियों द्वारा अपनाई गई इंदौर घोषणा क्या है?
उत्तर: इंदौर घोषणा BRICS देशों द्वारा किया गया एक संयुक्त संकल्प है, जिसका उद्देश्य आपसी सहयोग और नवाचार के माध्यम से खाद्य सुरक्षा, किसान कल्याण, जलवायु-सहिष्णु कृषि, कृषि व्यापार तथा कृषि के डिजिटल रूपांतरण को सुदृढ़ बनाना है।
प्र2.इंदौर घोषणा के अंतर्गत पहचाने गए चार प्राथमिकता वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं?
उत्तर: इंदौर घोषणा के तहत निम्नलिखित चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की गई है:
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- खाद्य सुरक्षा एवं पौष्टिक आहार
- कृषि व्यापार और सहयोग
- जलवायु-सहिष्णु एवं पुनर्योजी कृषि
- खाद्य प्रणालियों में नवाचार, प्रौद्योगिकी और साझेदारी
- खाद्य सुरक्षा एवं पौष्टिक आहार
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प्र3. डिजिटल कृषि पर BRICS नेटवर्क (BRICS Network on Digital Agriculture) क्या है?
उत्तर: यह एक नई संस्थागत व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (Geospatial Technology), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) तथा डेटा-आधारित खेती को बढ़ावा देना है। इसका समन्वय आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) द्वारा किया जाएगा और इसका लक्ष्य तकनीकी नवाचारों को सीधे किसानों तक पहुँचाना है।

