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Blog / 05 Nov 2026

गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में काले हिरण की वापसी

संदर्भ:

हाल ही में, छत्तीसगढ़ सरकार ने बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य से 50 काले हिरणों को गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने की योजना की घोषणा की है। इसके माध्यम से पाँच दशकों से अधिक समय बाद इस क्षेत्र में इस प्रजाति को फिर से बसाया जाएगा। शिकार, अवैध शिकार, आवासीय क्षेत्रों पर अतिक्रमण और विकासात्मक गतिविधियों के कारण वर्ष 1970 के दशक तक गोमर्डा से काले हिरण विलुप्त हो गए थे।

काले हिरण (About Blackbuck) के बारे में:

      • काला हिरण (Antilope cervicapra) मृग की एक प्रजाति है, जो बोविडी (Bovidae) कुल से संबंधित है और भारतीय उपमहाद्वीप की मूल निवासी है। इसकी लगभग 90% आबादी भारत में पाई जाती है। यह मुख्य रूप से खुले घास के मैदानों, झाड़ीदार क्षेत्रों, झाड़ियों वाले भूभाग और शुष्क कंटीले वनों में निवास करता है।
      • काले हिरण में लैंगिक द्विरूपता (Sexual Dimorphism) पाई जाती है। नर का शरीर गहरे भूरे से काले रंग का होता है तथा उसके लंबे, सर्पिलाकार सींग होते हैं, जबकि मादा का रंग सामान्यतः पीला-भूरा होता है और उसमें आमतौर पर सींग नहीं पाए जाते हैं। ये मुख्य रूप से दिन के समय सक्रिय रहने वाले (Diurnal) जीव हैं तथा घास और अन्य वनस्पतियों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं।
      • संरक्षण स्थिति: काले हिरण को वर्ष 2017 की IUCN रेड लिस्ट में ‘कम चिंतनीय’ (Least Concern) श्रेणी में रखा गया है। इसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल किया गया है, जिसके तहत इसे सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, इसे CITES के परिशिष्ट-III (Appendix III) में भी सूचीबद्ध किया गया है।
      • पारिस्थितिक महत्त्व (Ecological Significance): काले हिरण चराई के माध्यम से वनस्पतियों को नियंत्रित करके और परभक्षियों के लिए भोजन का स्रोत बनकर घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये स्वस्थ खुले घास के मैदानों के संकेतक हैं, जो भारत के सबसे अधिक संकटग्रस्त पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल हैं। इनका संरक्षण व्यापक घासभूमि जैव विविधता को बनाए रखने में भी सहायक है।

काले हिरण (About Blackbuck) के बारे में

गोमर्डा और बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्यों के बारे में:

      • गोमर्डा वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ के निकट स्थित है। इसकी स्थापना वर्ष 1975 में हुई थी। इसमें शुष्क पर्णपाती वन, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं। यहाँ साल, बीजा, तेंदू और बाँस जैसी वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। लात और मनई नदियाँ इसके मुख्य क्षेत्र से होकर बहती हैं।
      • बरनवापारा वन्यजीव अभयारण्य छत्तीसगढ़ में स्थित है और यह साल तथा सागौन के मिश्रित वनों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के प्रमुख वन्यजीवों में गौर, चीतल, सांभर, नीलगाय और जंगली सूअर शामिल हैं। बलमदेही, जोंक और महानदी नदी प्रणालियाँ इस क्षेत्र को जल उपलब्ध कराती हैं।

वन्यजीव स्थानांतरण (Wildlife Translocation) के बारे में:

      • वन्यजीव स्थानांतरण से तात्पर्य संरक्षण या प्रबंधन के उद्देश्य से जानवरों को जानबूझकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया से है। यह स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुकी आबादी को पुनर्स्थापित करने, छोटी आबादी को मजबूत बनाने और आनुवंशिक विविधता में सुधार करने में सहायक होता है।
      • इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2017–18 के दौरान 77 काले हिरणों को बरनवापारा में स्थानांतरित किया था। इस कार्यक्रम से वहाँ एक नई आबादी स्थापित करने में मदद मिली, जो बाद में बढ़कर 150 से अधिक हो गई।
      • सफल स्थानांतरण के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त भोजन और पानी, रोगों की जाँच, पर्यावरण के अनुकूल धीरे-धीरे ढालने की प्रक्रिया तथा स्थानांतरण के बाद निगरानी आवश्यक है। इसके साथ ही, आवास में सुधार, आक्रामक खरपतवारों पर नियंत्रण, अवैध शिकार से सुरक्षा और पशु चिकित्सा संबंधी सहायता भी महत्त्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष:

गोमर्डा में काले हिरणों की प्रस्तावित वापसी स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुकी वन्यजीव आबादी को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। हालाँकि, इसकी दीर्घकालिक सफलता आवास पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक निगरानी, प्रभावी संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर करेगी। यह इस बात को भी रेखांकित करता है कि पारंपरिक संरक्षण मूल्यों के साथ वन्यजीव स्थानांतरण की प्रक्रिया भारत में जैव विविधता संरक्षण को मजबूत कर सकती है।

 

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