संदर्भ:
हाल ही में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने 242 पृष्ठों का एक ऐतिहासिक निर्णय दिया, जिसमें मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित एक हिंदू मंदिर घोषित किया गया। यह फैसला भारत के लंबे समय से चले आ रहे धार्मिक और विरासत विवादों में एक महत्वपूर्ण विकास माना जा रहा है।
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ:
उच्च न्यायालय ने निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया:
-
-
- हिंदू पूजा के निरंतर ऐतिहासिक प्रमाण
- संस्कृत शिक्षा के केंद्र होने के मजबूत संकेत
- मंदिर मूल की पुष्टि करने वाले पुरातात्विक साक्ष्य
- हिंदू पूजा के निरंतर ऐतिहासिक प्रमाण
-
न्यायालय ने हिंदू पक्ष के पक्ष में निर्णय देते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को स्मारक के संरक्षण का कार्य जारी रखने का निर्देश दिया।

भोजशाला परिसर के बारे में:
भोजशाला परिसर 11वीं शताब्दी का एक संरक्षित स्मारक है, जो मूल रूप से संस्कृत शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र और देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर के रूप में कार्य करता था। समय के साथ, मंदिर संरचना के कुछ हिस्सों को कमाल मौला मस्जिद के रूप में परिवर्तित ढांचे में शामिल कर लिया गया, जिससे यह एक अत्यंत विवादित धार्मिक स्थल बन गया।
स्थान:
-
-
- जिला: धार (ऐतिहासिक नाम—धारा), मालवा क्षेत्र
- राज्य: मध्य प्रदेश
- ऐतिहासिक महत्व: परमार वंश की पूर्व राजधानी
- जिला: धार (ऐतिहासिक नाम—धारा), मालवा क्षेत्र
-
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
स्थापना (1000–1055 ई.): इस परिसर की स्थापना परमार वंश के सबसे प्रमुख शासक राजा भोज ने उच्च शिक्षा और संस्कृत अध्ययन के केंद्र के रूप में की थी।
विस्तार चरण: उदयादित्य और नरवर्मन जैसे उत्तरवर्ती शासकों ने इस संस्थान का विस्तार और संरक्षण किया। 13वीं शताब्दी की शुरुआत में अर्जुनवर्मन देव के संरक्षण का भी उल्लेख मिलता है।
इस्लामी काल में परिवर्तन: 14वीं शताब्दी में मालवा सल्तनत काल के दौरान इस स्थल को मस्जिद में परिवर्तित किया गया और इसे सूफी संत शेख कमाल मौला से जोड़ा गया, जिससे इसकी दोहरी धार्मिक पहचान विकसित हुई।
आधुनिक कानूनी स्थिति: इस स्थल को वर्ष 1904 में प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक घोषित किया गया। 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एक समझौते के तहत:
-
-
- मंगलवार और बसंत पंचमी पर हिंदू पूजा की अनुमति
- शुक्रवार को मुस्लिम नमाज़ की अनुमति दी गई
- मंगलवार और बसंत पंचमी पर हिंदू पूजा की अनुमति
-
स्थापत्य और अभिलेखीय विशेषताएँ:
मंदिर वास्तुकला: इस संरचना में एक बड़ा प्रांगण, स्तंभ-युक्त बरामदे (colonnades) और एक प्रार्थना कक्ष शामिल है, जिसमें नक्काशीदार स्तंभ और छतें स्पष्ट रूप से हिंदू मंदिर वास्तुकला शैली को दर्शाती हैं।
सर्पबंध अभिलेख: स्थल पर दो विशिष्ट अभिलेख पाए गए हैं:
-
-
- एक अभिलेख जिसमें संस्कृत वर्णमाला और व्याकरणिक संरचनाएँ शामिल हैं।
- दूसरा अभिलेख संस्कृत क्रियाओं के विभिन्न काल (tenses) और भाव (moods) को विस्तार से दर्शाता है।
- एक अभिलेख जिसमें संस्कृत वर्णमाला और व्याकरणिक संरचनाएँ शामिल हैं।
-
साहित्यिक और धार्मिक अभिलेख:
-
-
- प्राकृत भाषा के शिलालेख, जिनमें कूर्म अवतार (विष्णु के कछुए वाले अवतार) की स्तुति की गई है।
- ऐसी शिलाएँ, जिन पर शास्त्रीय संस्कृत की नाट्य रचनाएँ अंकित हैं और जिनका संबंध राज-विद्वानों से है।
- प्राकृत भाषा के शिलालेख, जिनमें कूर्म अवतार (विष्णु के कछुए वाले अवतार) की स्तुति की गई है।
-
निष्कर्ष:
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का भोजशाला संबंधी निर्णय विरासत विवादों के समाधान में एक महत्वपूर्ण निर्णय है। यह धार्मिक अधिकारों की स्थिति को स्पष्ट करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि ऐतिहासिक रूप से बहु-स्तरीय सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण आवश्यक है।
