सन्दर्भ:
जयपुर में 15 जनवरी को आयोजित 78वें सेना दिवस परेड के दौरान, भारतीय सेना की नवनिर्मित 'भैरव बटालियन' ने अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई। यह भारत की बदलती रक्षा मुद्रा को दर्शाता है, जो त्वरित प्रतिक्रिया, हाइब्रिड युद्ध और तकनीक-सक्षम युद्ध संचालन पर केंद्रित है।
भैरव बटालियन के बारे में:
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- भैरव बटालियन उच्च गति वाली आक्रामक टुकड़ियाँ हैं, जिन्हें रणनीतिक पैरा स्पेशल फोर्सेस और सामान्य इन्फैंट्री इकाइयों के बीच के परिचालन अंतर को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
- जहाँ घातक प्लाटून बटालियन सामरिक हमले करती हैं और पैरा एसएफ गहरे रणनीतिक मिशनों को अंजाम देती हैं, वहीं भैरव इकाइयाँ तत्काल सीमावर्ती आकस्मिकताओं या कम समय के नोटिस पर शुरू किए जाने वाले हमलों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता प्रदान करती हैं।
- भैरव बटालियन उच्च गति वाली आक्रामक टुकड़ियाँ हैं, जिन्हें रणनीतिक पैरा स्पेशल फोर्सेस और सामान्य इन्फैंट्री इकाइयों के बीच के परिचालन अंतर को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
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आधुनिकीकरण पहल:
यह बटालियन भारतीय सेना के 2025 आधुनिकीकरण और बल पुनर्गठन कार्यक्रम का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य थल सेना को हाइब्रिड और तकनीक-संचालित युद्ध के लिए तैयार करना है।
संरचना और संगठन:
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- एकीकृत बल मिश्रण:
- प्रत्येक भैरव बटालियन लगभग 200-250 कर्मियों की एक टुकड़ी है। इसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस और सिग्नल्स सहित कई अंगों के जवान शामिल होते हैं, जो इसे स्वायत्त और प्रभावी आक्रामक संचालन के सक्षम बनाते हैं।
- प्रत्येक भैरव बटालियन लगभग 200-250 कर्मियों की एक टुकड़ी है। इसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी (तोपखाना), एयर डिफेंस और सिग्नल्स सहित कई अंगों के जवान शामिल होते हैं, जो इसे स्वायत्त और प्रभावी आक्रामक संचालन के सक्षम बनाते हैं।
- भर्ती दृष्टिकोण:
- सेना इसमें "सन्स ऑफ द सॉयल" (मिट्टी के लाल) भर्ती अवधारणा का पालन करती है, जिसमें उन क्षेत्रों के स्थानीय कर्मियों को प्राथमिकता दी जाती है जहाँ इन्हें तैनात किया जाना है। इससे इलाके और जलवायु की जानकारी का लाभ मिलता है, जिससे विशिष्ट परिचालन वातावरण में यूनिट की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
- सेना इसमें "सन्स ऑफ द सॉयल" (मिट्टी के लाल) भर्ती अवधारणा का पालन करती है, जिसमें उन क्षेत्रों के स्थानीय कर्मियों को प्राथमिकता दी जाती है जहाँ इन्हें तैनात किया जाना है। इससे इलाके और जलवायु की जानकारी का लाभ मिलता है, जिससे विशिष्ट परिचालन वातावरण में यूनिट की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
- एकीकृत बल मिश्रण:
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तैनाती और विस्तार:
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- वर्तमान स्थिति: 2026 की शुरुआत तक, लगभग 15 भैरव बटालियन गठित की जा चुकी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस बल को 23-25 बटालियन तक बढ़ाने की योजना है।
- तैनाती: इन इकाइयों को कोर और डिवीजन स्तर की संरचनाओं के तहत तैनात किया जा रहा है, विशेष रूप से राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसी संवेदनशील सीमाओं पर, जहाँ तेज गतिशीलता और आक्रामक रुख अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- वर्तमान स्थिति: 2026 की शुरुआत तक, लगभग 15 भैरव बटालियन गठित की जा चुकी हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इस बल को 23-25 बटालियन तक बढ़ाने की योजना है।
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मानवरहित और हाइब्रिड युद्ध पर ध्यान:
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- तकनीकी एकीकरण: भैरव बटालियन मानवरहित और हाइब्रिड युद्ध की दिशा में सेना के प्रयासों का केंद्र हैं। इन्हें दुश्मन के ठिकानों की निगरानी करने और सटीक निशाना साधने के लिए ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
- ड्रोन ऑपरेटर्स पूल: इन क्षमताओं को सहारा देने के लिए, सेना एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटर्स का एक बड़ा पूल विकसित कर रही है, जो भविष्य के संघर्षों में नेटवर्क-आधारित और तकनीक-प्रधान संचालन पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।
- तकनीकी एकीकरण: भैरव बटालियन मानवरहित और हाइब्रिड युद्ध की दिशा में सेना के प्रयासों का केंद्र हैं। इन्हें दुश्मन के ठिकानों की निगरानी करने और सटीक निशाना साधने के लिए ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
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निष्कर्ष:
भैरव बटालियन का उदय भारतीय सेना की आधुनिकीकरण यात्रा में एक महत्वपूर्ण विकास है। ये इकाइयाँ पारंपरिक पैदल सेना और विशेष बलों के बीच की कमी को दूर करते हुए त्वरित आक्रामक कार्रवाई करने में सक्षम हैं। भैरव बटालियन की उपस्थिति, भविष्य के जटिल सुरक्षा वातावरण के लिए भारत की हाइब्रिड युद्ध क्षमताओं की ओर झुकाव को भी रेखांकित करता है।

