संदर्भ:
हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा असम्बद्ध क्षेत्र उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण (ASUSE) 2025 जारी किया गया। यह सर्वेक्षण भारत के अनौपचारिक गैर-कृषि क्षेत्र में प्रतिष्ठानों, रोजगार और सकल मूल्य वर्धन (GVA) में सुदृढ़ वृद्धि को दर्शाता है, जो महामारी के बाद की मजबूत पुनर्प्राप्ति और लचीलापन (resilience) को इंगित करता है।
असम्बद्ध क्षेत्र क्या है?
असम्बद्ध (Unincorporated) क्षेत्र में छोटे, अनौपचारिक, गैर-कृषि उद्यम शामिल होते हैं, जो कंपनियों के रूप में पंजीकृत नहीं होते। इनमें विनिर्माण, व्यापार और सेवा क्षेत्र (निर्माण क्षेत्र को छोड़कर) से जुड़े इकाइयाँ शामिल हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
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- स्वामित्व, साझेदारी, सहकारी आदि रूपों में संचालन
- कम पूंजी और श्रम-प्रधान गतिविधियाँ
- भारत के अनौपचारिक कार्यबल के बड़े हिस्से को रोजगार प्रदान करना
- घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं में कड़ी के रूप में कार्य कर औपचारिक क्षेत्र को समर्थन देना
- स्वामित्व, साझेदारी, सहकारी आदि रूपों में संचालन
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इस प्रकार, यह क्षेत्र भारत में रोजगार और जमीनी स्तर की आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
ASUSE 2025 के प्रमुख निष्कर्ष:
ASUSE 2025 के परिणाम भारत के असम्बद्ध क्षेत्र में व्यापक विस्तार और बढ़ती स्थिरता को दर्शाते हैं।
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- प्रतिष्ठानों की संख्या 7.34 करोड़ से बढ़कर 7.92 करोड़ हो गई, जो 7.97% की वृद्धि को दर्शाती है। यह अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों के मजबूत पुनरुद्धार और विस्तार का संकेत है।
- रोजगार सृजन भी सुदृढ़ रहा, जहाँ इस क्षेत्र में 12.81 करोड़ श्रमिक कार्यरत हैं और 74.52 लाख से अधिक नए रोजगार सृजित हुए, जो 6.18% की वृद्धि को दर्शाता है।
- “अन्य सेवाएँ” खंड प्रमुख चालक के रूप में उभरा, जिसमें प्रतिष्ठानों की संख्या में 10.29% की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई, जो सेवा-आधारित संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है।
- आर्थिक उत्पादन, जिसे सकल मूल्य वर्धन (GVA) द्वारा मापा जाता है, 10.87% बढ़कर लगभग ₹19.93 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह वृद्धि मुख्यतः व्यापार क्षेत्र (16.77%) द्वारा प्रेरित रही, इसके बाद विनिर्माण (8.52%) और सेवाएँ (7.36%) का योगदान रहा।
- उत्पादकता संकेतकों में भी सुधार हुआ, जहाँ प्रति श्रमिक GVA ₹1.49 लाख से बढ़कर ₹1.56 लाख हो गया, जो श्रम और पूंजी के बेहतर उपयोग को दर्शाता है।
- एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति तीव्र डिजिटल अपनाने की रही, जहाँ इंटरनेट का उपयोग करने वाले प्रतिष्ठानों का अनुपात 26.7% से बढ़कर 39.4% हो गया, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ बढ़ते एकीकरण और क्रमिक औपचारिककरण को दर्शाता है।
- महिला उद्यमिता में भी हल्की लेकिन सकारात्मक वृद्धि हुई, जहाँ महिला स्वामित्व वाले उद्यमों का अनुपात बढ़कर 27% हो गया, जो लैंगिक समावेशन में प्रगति को इंगित करता है।
- वेतन स्थितियों में भी सुधार हुआ, जहाँ नियोजित श्रमिकों के प्रति वेतन में 3.88% की वृद्धि दर्ज की गई, जो आय स्तर में मध्यम वृद्धि को दर्शाता है।
- प्रतिष्ठानों की संख्या 7.34 करोड़ से बढ़कर 7.92 करोड़ हो गई, जो 7.97% की वृद्धि को दर्शाती है। यह अनौपचारिक आर्थिक गतिविधियों के मजबूत पुनरुद्धार और विस्तार का संकेत है।
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समग्र विश्लेषण:
इन निष्कर्षों से स्पष्ट होता है कि भारत का अनौपचारिक क्षेत्र न केवल आकार और रोजगार में विस्तार कर रहा है, बल्कि उत्पादकता, डिजिटल पहुँच और समावेशन के माध्यम से गुणात्मक परिवर्तन भी अनुभव कर रहा है। यह अनौपचारिकता से अर्ध-औपचारिकता की ओर धीरे-धीरे संक्रमण का संकेत देता है।
निष्कर्ष:
ASUSE 2025 के निष्कर्ष यह दर्शाते हैं कि भारत का असम्बद्ध क्षेत्र रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का एक गतिशील इंजन बना हुआ है। यद्यपि डिजिटल अपनाने और उत्पादकता में वृद्धि सकारात्मक संकेत हैं, फिर भी कम औपचारिककरण, सीमित ऋण उपलब्धता और संवेदनशीलता जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
इस क्षेत्र को सतत एवं समावेशी विकास के मजबूत स्तंभ में परिवर्तित करने के लिए डिजिटल समावेशन, वित्तीय पहुँच और सामाजिक सुरक्षा पर केंद्रित लक्षित नीतिगत दृष्टिकोण आवश्यक है।

