सन्दर्भ:
हाल ही में, (NASA) ने 'आर्टेमिस मिशन' के दूसरे चरण, आर्टेमिस 2 (Artemis II), को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह 1972 के बाद चंद्रमा के लिए पहला मानवयुक्त मिशन है, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री, रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन, ओरियन कैप्सूल यान में 10-दिवसीय यात्रा पर निकले हैं।
मिशन का मुख्य उद्देश्य:
-
-
- आर्टेमिस 2 का प्राथमिक लक्ष्य 'ओरियन' (Orion) अंतरिक्ष यान और 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) रॉकेट की क्षमताओं का परीक्षण करना है।
- यह एक "लूनर फ्लाईबी" (Lunar Flyby) मिशन है, जिसका अर्थ है कि अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर वापस आएंगे।
- इस मिशन के जरिए नासा यह सुनिश्चित करना चाहता है कि गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में जीवन रक्षक प्रणालियाँ सही ढंग से काम कर रही हैं, ताकि भविष्य के आर्टेमिस 3 मिशन में मनुष्यों को सुरक्षित रूप से चांद की सतह पर उतारा जा सके।
- आर्टेमिस 2 का प्राथमिक लक्ष्य 'ओरियन' (Orion) अंतरिक्ष यान और 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) रॉकेट की क्षमताओं का परीक्षण करना है।
-
प्रमुख उपलब्धियाँ और घटनाएँ:
-
-
- लूनर फ्लाईबाय पूर्ण हुआ: मिशन की टीम ने चंद्रमा के दूरस्थ भाग के पास से सफलतापूर्वक उड़ान भरी।
- दूरी का नया रिकॉर्ड: मिशन ने 252,756 मील की दूरी तय कर पिछले अपोलो 13 रिकॉर्ड को तोड़ा जो यह मानव द्वारा अब तक की सबसे दूर की यात्रा है।
- संवाद बाधा: जैसे ही ओरियन यान चंद्रमा के पीछे गया, लगभग 40 मिनट की संचार अवरोध (blackout) का सामना किया गया, जो की अपेक्षित और परीक्षण रूप से महत्वपूर्ण था।
- बृहद डेटा संग्रह: मिशन ने चंद्रमा के ऊपर से पृथ्वी का अर्थराइज़ (Earthrise) देखा और इस दौरान सौर ग्रहण तथा लूनर सतह के कई महत्वपूर्ण अवलोकन किए।
- लूनर फ्लाईबाय पूर्ण हुआ: मिशन की टीम ने चंद्रमा के दूरस्थ भाग के पास से सफलतापूर्वक उड़ान भरी।
-
चुनौतियाँ:
आर्टेमिस 2 के माध्यम से वैज्ञानिक यह समझ रहे हैं कि विकिरण (Radiation) और संचार की बाधाओं से गहरे अंतरिक्ष में कैसे निपटा जाए। यदि यह मिशन सफल रहता है, तो नासा 2027-28 तक 'आर्टेमिस 3' लॉन्च करेगा, जिसमें पहली बार एक महिला और एक व्यक्ति चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कदम रखेंगे।
आर्टेमिस कार्यक्रम के बारे में:
-
-
- आर्टेमिस कार्यक्रम नासा के नेतृत्व में चंद्रमा अन्वेषण का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे 2017 में अंतरिक्ष नीति निर्देश 1 के तहत शुरू किया गया। इसका उद्देश्य 2028 तक अपोलो 17 के बाद पहली बार चंद्रमा पर मानव भेजना और 2030 के दशक में वहाँ स्थायी आधार स्थापित करना है, जो गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों की तैयारी के लिए प्रारंभिक कदम होगा।
- कार्यक्रम में स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) का कोर स्टेज, RS-25 इंजन, सॉलिड रॉकेट बूस्टर, ओरियन अंतरिक्ष यान और निजी कंपनियों द्वारा विकसित ह्यूमन लैंडिंग सिस्टम (HLS) शामिल हैं। इसमे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आर्टेमिस समझौते के तहत होता है।
- आर्टेमिस कार्यक्रम नासा के नेतृत्व में चंद्रमा अन्वेषण का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसे 2017 में अंतरिक्ष नीति निर्देश 1 के तहत शुरू किया गया। इसका उद्देश्य 2028 तक अपोलो 17 के बाद पहली बार चंद्रमा पर मानव भेजना और 2030 के दशक में वहाँ स्थायी आधार स्थापित करना है, जो गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों की तैयारी के लिए प्रारंभिक कदम होगा।
-
निष्कर्ष:
यह मिशन न केवल चंद्रमा की परिक्रमा के माध्यम से तकनीकी क्षमताओं का परीक्षण करता है, बल्कि गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों की चुनौतियों, जैसे विकिरण, संचार बाधा और जीवन-रक्षक प्रणालियों को समझने में भी सहायक है। इसकी सफलता से आर्टेमिस III के तहत चंद्रमा पर मानव की सुरक्षित वापसी संभव होगी, जिससे दीर्घकालिक अंतरिक्ष अन्वेषण और भविष्य के मंगल मिशनों की आधारशिला मजबूत होगी।

