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Blog / 05 Nov 2026

जलवायु परिवर्तन के कारण आर्कटिक सील पर बढ़ता खतरा

संदर्भ:

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature–IUCN) ने अबू धाबी में आयोजित IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस (World Conservation Congress) में संकटग्रस्त प्रजातियों की अद्यतन रेड लिस्ट जारी की। इसमें वैश्विक तापवृद्धि के कारण समुद्री बर्फ के घटते विस्तार से आर्कटिक क्षेत्र की तीन सील प्रजातियों पर बढ़ते विलुप्ति के खतरे को उजागर किया गया है।

अद्यतन सूची के बारे में:

हूडेड सील (Hooded Seal – Cystophora cristata) की संरक्षण स्थिति को ‘सुभेद्य’ (Vulnerable) से बढ़ाकर ‘संकटग्रस्त’ (Endangered) कर दिया गया है। वहीं, बियर्डेड सील (Bearded Seal – Erignathus barbatus) और हार्प सील (Harp Seal – Pagophilus groenlandicus) दोनों की स्थिति को IUCN रेड लिस्ट में ‘कम चिंतनीय’ (Least Concern) से बदलकर ‘निकट संकटग्रस्त’ (Near Threatened) कर दिया गया है।

hree Arctic seal species face rising extinction risk as global warming  shrinks sea ice | Pets-animals News - The Indian Express

पारिस्थितिकी तंत्र में आर्कटिक सील का महत्त्व:

आर्कटिक सील समुद्री खाद्य-जाल के संतुलन को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये मछलियों और समुद्री अकशेरुकी जीवों को भोजन के रूप में ग्रहण करती हैं तथा ध्रुवीय भालू जैसे परभक्षियों के लिए भोजन का स्रोत होती हैं। इसके अतिरिक्त, ये पोषक तत्त्वों के चक्रण में योगदान देती हैं और स्थानीय मूलनिवासी समुदायों की आजीविका एवं खाद्य सुरक्षा को भी समर्थन प्रदान करती हैं। इनकी पारिस्थितिक महत्ता इन्हें आर्कटिक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्त्वपूर्ण घटक बनाती है।

आर्कटिक सील के समक्ष प्रमुख खतरे:

      • समुद्री बर्फ का ह्रास (Sea-Ice Loss): आर्कटिक सील प्रजनन, शिशुओं को जन्म देने, उन्हें दूध पिलाने, बाल झड़ने (Moulting) और विश्राम के लिए समुद्री बर्फ पर निर्भर रहती हैं। समुद्री बर्फ के क्षेत्रफल में कमी और उसके पतले होने से इनके उपयुक्त आवास घटते हैं तथा भोजन प्राप्त करने वाले क्षेत्रों तक इनकी पहुँच प्रभावित होती है।
      • जलवायु परिवर्तन (Climate Change): आर्कटिक क्षेत्र में तेजी से बढ़ता तापमान समुद्री बर्फ के विस्तार, महासागरीय तापमान और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव ला रहा है, जिससे बर्फ पर निर्भर प्रजातियों के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।
      • मानवीय गतिविधियाँ (Human Activities): जहाजरानी, पानी के भीतर ध्वनि प्रदूषण, तेल एवं खनिजों की खोज, शिकार तथा मछली पकड़ने के जालों में आकस्मिक रूप से फँसना सील की आबादी पर दबाव को और बढ़ाते हैं।

आर्कटिक प्रवर्धन (Arctic Amplification) क्या है?

      • आर्कटिक प्रवर्धन से तात्पर्य उस घटना से है, जिसमें आर्कटिक क्षेत्र का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में काफी तेजी से बढ़ता है। हाल के दशकों में यह वृद्धि सामान्यतः वैश्विक औसत से लगभग तीन से चार गुना अधिक रही है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
        • बर्फ-परावर्तन प्रतिपुष्टि (Ice-Albedo Feedback): बर्फ और हिम के पिघलने से गहरे रंग की महासागरीय एवं स्थलीय सतहें उजागर होती हैं, जिससे वे अधिक सौर ऊर्जा अवशोषित करती हैं।
        • परमाफ्रॉस्ट का पिघलना (Permafrost Thawing): इससे ग्रीनहाउस गैसें मुक्त होती हैं तथा लौह और अन्य धातुओं का गतिशीलन हो सकता है, जिससे मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं।
        • बदलते मौसम प्रतिरूप (Changing Weather Patterns): वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव और नमी के बढ़ते परिवहन से आर्कटिक क्षेत्र में वर्षा तथा बर्फ के आवरण पर प्रभाव पड़ता है।
      • पुरानी और मोटी समुद्री बर्फ के क्षेत्र में कमी आर्कटिक पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता के लिए एक अतिरिक्त खतरा उत्पन्न करती है।

अटलांटीकरण (Atlantification) के बारे में:

अटलांटीकरण से तात्पर्य आर्कटिक महासागर में अपेक्षाकृत गर्म और अधिक लवणीय अटलांटिक महासागर के जल के बढ़ते प्रभाव से है। इसके परिणामस्वरूप महासागर का तापमान बढ़ता है, जल की विभिन्न परतों के बीच मिश्रण में वृद्धि होती है, समुद्री बर्फ का ह्रास होता है तथा समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य संसाधनों में बदलाव आता है।

आर्कटिक सील के संरक्षण के उपाय:

IUCN ने इनके संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण आवासों की सुरक्षा, मछली पकड़ने के दौरान जालों में आकस्मिक रूप से फँसने की घटनाओं को कम करने, टिकाऊ शिकार पद्धतियों को सुनिश्चित करने तथा पानी के भीतर ध्वनि प्रदूषण और अन्य मानवीय हस्तक्षेपों को न्यूनतम करने की सिफारिश की है। दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना आवश्यक है।

IUCN के बारे में:

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature–IUCN) की स्थापना वर्ष 1948 में हुई थी। यह एक वैश्विक पर्यावरण संगठन है, जिसमें सरकारें, नागरिक समाज संगठन और मूलनिवासी समूह शामिल हैं। इसका प्रमुख योगदान संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN रेड लिस्ट है, जिसके माध्यम से विश्वभर की विभिन्न प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम का आकलन किया जाता है।

निष्कर्ष:

आर्कटिक सील की बढ़ती संवेदनशीलता जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास के बीच प्रत्यक्ष संबंध को उजागर करती है। इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए आवास संरक्षण के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जलवायु संबंधी ठोस कार्रवाई आवश्यक है, विशेष रूप से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना महत्त्वपूर्ण है।

 

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