संदर्भ:
हाल ही में, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारत के महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी स्टेल्थ फाइटर, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के प्रोटोटाइप (नमूने) को डिजाइन और विकसित करने के लिए तीन दावेदारों को चुना (Shortlist) है। टाटा, एल एंड टी के नेतृत्व वाले दो संघों और भारत फोर्ज को लड़ाकू जेट बनाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
AMCA के बारे में:
AMCA एक सिंगल-सीट, ट्विन-इंजन और हर मौसम में काम करने वाला बहुउद्देशीय स्टेल्थ फाइटर है। इसे भारतीय वायु सेना (IAF) और भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया जा रहा है।
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- डिजाइन: इसे रक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया गया है।
- उद्देश्य: इसका लक्ष्य उन्नत स्टेल्थ क्षमताओं के साथ 'सुपरक्रूज' प्रदर्शन, आंतरिक हथियार और बहुआयामी परिचालन बहुमुखी प्रतिभा को जोड़ना है।
- डिजाइन: इसे रक्षा मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा डिजाइन किया गया है।
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प्रस्तावित भूमिकाएं और क्षमताएं:
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- श्रेष्ठता: हवा में अपनी ताकत बनाए रखना और जमीन पर सटीक हमले करना।
- SEAD अभियान: दुश्मन की हवाई सुरक्षा प्रणालियों को नष्ट करना ।
- इलेक्ट्रॉनिक युद्ध: इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल के जरिए दुश्मन के तंत्र को बाधित करना।
- रडार क्रॉस-सेक्शन: इसका डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार द्वारा आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता।
- प्रतिस्थापन: यह भारतीय वायुसेना के मुख्य आधार सुखोई Su-30MKI बेड़े की जगह लेगा।
- श्रेष्ठता: हवा में अपनी ताकत बनाए रखना और जमीन पर सटीक हमले करना।
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समयसीमा:
इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन 2035 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें 125 से अधिक विमानों को वायुसेना में शामिल करने की योजना है। AMCA के आने से भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट संचालित करते हैं (जैसे अमेरिका के F-22/F-35, चीन का J-20 और रूस का Su-57)।
विकास का इतिहास:
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- AMCA कार्यक्रम की शुरुआत 2010 में 'मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (MCA) कार्यक्रम के रूप में हुई थी।
- विकास: शुरुआत में इसे 20-टन श्रेणी का फाइटर माना गया था, लेकिन अब यह 25-टन श्रेणी के विमान के रूप में विकसित हो गया है, जो एवियोनिक्स, स्टेल्थ कोटिंग और इंजन तकनीक में हुई प्रगति को दर्शाता है।
- वर्तमान स्थिति: फरवरी 2025 तक, यह कार्यक्रम 'प्रोटोटाइप विकास' चरण में है। इसकी व्यावहारिकता (Feasibility), प्रारंभिक डिजाइन और विस्तृत डिजाइन के चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं।
- AMCA कार्यक्रम की शुरुआत 2010 में 'मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (MCA) कार्यक्रम के रूप में हुई थी।
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रणनीतिक और औद्योगिक महत्व:
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- स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और एक आत्मनिर्भर एयरोस्पेस औद्योगिक आधार तैयार करना।
- तकनीकी प्रगति: यह स्टेल्थ तकनीक, एवियोनिक्स, प्रणोदन प्रणाली और मिश्रित सामग्रियों के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
- वायु शक्ति का विस्तार: AMCA भारतीय वायुसेना के बेड़े को आधुनिक बनाएगा, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी।
- स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और एक आत्मनिर्भर एयरोस्पेस औद्योगिक आधार तैयार करना।
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आगे की राह:
चुनी गई निजी फर्मों को प्रोटोटाइप बनाने के लिए सरकारी फंडिंग मिल सकेगी। सफल परीक्षण के बाद ही अंतिम निर्माण अधिकार दिए जाएंगे। निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के साथ, AMCA प्रोजेक्ट भारत के उन्नत सैन्य विमानन केंद्र बनने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो 2030 के दशक के मध्य तक देश के रक्षा परिदृश्य को बदल सकता है।
