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Blog / 07 Aug 2026

अग्नि-IV मध्यम दूरी की बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (IRBM)

सन्दर्भ:

हाल ही में भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण परिसर (Integrated Test Range- ITR) से सामरिक बल कमान (Strategic Forces Command- SFC) के तत्वावधान में अग्नि-IV मध्यम दूरी की बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (Intermediate-Range Ballistic Missile- IRBM) का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण के दौरान प्रक्षेपास्त्र के सभी परिचालन एवं तकनीकी मानकों का सफलतापूर्वक सत्यापन हुआ, जिससे इसकी परिचालन तत्परता की पुनः पुष्टि हुई तथा भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता और अधिक सुदृढ़ हुई।

अग्नि-IV के बारे में:

      • अग्नि-IV एक स्वदेशी रूप से विकसित, परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (IRBM) है, जिसका विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है।
      • यह समेकित निर्देशित प्रक्षेपास्त्र विकास कार्यक्रम (Integrated Guided Missile Development Programme- IGMDP) के अंतर्गत विकसित अग्नि प्रक्षेपास्त्र श्रृंखला का एक महत्त्वपूर्ण सदस्य है। यह भारत की विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता (Credible Minimum Deterrence) तथा प्रथम प्रयोग न करने की नीति (No First Use- NFU) पर आधारित परमाणु सिद्धांत का प्रमुख आधार है।

Agni-IV Intermediate-Range Ballistic Missile (IRBM)

प्रमुख विशेषताएँ:

      • अग्नि-IV दो चरणों वाली (Two-stage), ठोस ईंधन (Solid Fuel) से संचालित तथा परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र है।
      • इसकी मारक क्षमता 3,500 से 4,000 किलोमीटर तक है।
      • इसकी लंबाई लगभग 20 मीटर तथा भार लगभग 17 टन है।
      • यह 1,000 किलोग्राम तक का पारंपरिक अथवा परमाणु आयुध वहन करने में सक्षम है।
      • इसे सड़क-गतिशील (Road-Mobile) तथा कैनिस्टर-संगत (Canister-Compatible) प्रक्षेपण मंच पर तैनात किया जाता है, जिससे इसकी त्वरित तैनाती, उच्च गतिशीलता एवं अधिक जीवित रहने की क्षमता सुनिश्चित होती है।
      • इसमें रिंग लेज़र जाइरोस्कोप आधारित जड़त्वीय नौवहन प्रणाली को सूक्ष्म नौवहन प्रणाली के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे लक्ष्य भेदन की अत्यधिक सटीकता सुनिश्चित होती है।
      • इसके अतिरिक्त, इसमें उन्नत पुनःप्रवेश ऊष्मा सुरक्षा कवच (Re-entry Heat Shield) लगाया गया है, जो वायुमंडल में पुनः प्रवेश के दौरान 3,000° सेल्सियस से अधिक तापमान को सहन करने में सक्षम है तथा आयुध एवं प्रक्षेपास्त्र के इलेक्ट्रॉनिक तंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

महत्त्व:

      • अग्नि-IV भारत की लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने की क्षमता को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ करती है तथा क्षेत्रीय खतरों के विरुद्ध विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है।
      • इसका ठोस ईंधन आधारित प्रणोदन तंत्र तथा गतिशील प्रक्षेपण मंच त्वरित तैनाती को संभव बनाते हैं। इसके विकास में प्रयुक्त स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करती हैं तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत रक्षा विनिर्माण को सुदृढ़ बनाती हैं।
      • यह भारत के सामरिक त्रिस्तरीय प्रतिरोधक ढाँचे (Strategic Nuclear Triad) को सशक्त बनाते हुए विश्वसनीय द्वितीय प्रहार क्षमता (Second-Strike Capability) को बढ़ाती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और अधिक मजबूत होती है।

अग्नि प्रक्षेपास्त्र श्रृंखला:

अग्नि प्रक्षेपास्त्र श्रृंखला भारत की परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्रों का समूह है, जिनकी मारक क्षमता अलग-अलग है-

      • अग्नि-I: 700–1,200 किमी (लघु दूरी)
      • अग्नि-II: 2,000–3,000 किमी (मध्यम दूरी)
      • अग्नि-III: 3,000–3,500 किमी (मध्यम से अधिक दूरी)
      • अग्नि-IV: 3,500–4,000 किमी (उन्नत मध्यम दूरी)
      • अग्नि-V: 5,000–5,500 किमी अथवा उससे अधिक (दीर्घ दूरी, कैनिस्टर-आधारित)
      • अग्नि-प्राइम (Agni-P): 1,000–2,000 किमी (अगली पीढ़ी की, हल्की एवं अत्यधिक गतिशील प्रक्षेपास्त्र)

निष्कर्ष:

अग्नि-IV का सफल परीक्षण भारत की सामरिक प्रतिरोधक संरचना को और अधिक सुदृढ़ करता है तथा उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करता है। भारत के परमाणु सिद्धांत के एक महत्त्वपूर्ण अंग के रूप में यह प्रक्षेपास्त्र राष्ट्रीय सुरक्षा को सशक्त बनाते हुए विश्वसनीय एवं प्रभावी प्रतिरोधक क्षमता के माध्यम से क्षेत्रीय सामरिक स्थिरता को भी सुदृढ़ करता है।

 

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