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Blog / 17 Jan 2026

स्टार्टअप इंडिया का एक दशक

संदर्भ:

हाल ही में 16 जनवरी, 2026, को स्टार्टअप इंडिया पहल का एक दशक पूरा हुआ है, जिसे 2016 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के तहत शुरू किया गया था। पिछले दस वर्षों में, इस पहल ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक में बदल दिया है, जिसमें दिसंबर 2025 तक 2 लाख से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप शामिल हैं। इनमें से लगभग 50% स्टार्टअप टियर-II और टियर-III शहरों से उत्पन्न हुए हैं, जो उद्यमिता के लोकतंत्रीकरण और समावेशी क्षेत्रीय विकास के प्रोत्साहन को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में स्टार्टअप्स की भूमिका:

      • स्टार्टअप्स निम्नलिखित माध्यमों से भारत के आर्थिक परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभरे हैं:
        • तकनीकी नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ, इस पहल ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर पैदा किए हैं तथा वित्तीय समावेशन और डिजिटल अपनाने को भी प्रोत्साहित किया है।
        • एग्री-टेक, टेलीमेडिसिन, माइक्रोफाइनेंस, एड-टेक और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में नवाचारी समाधानों के माध्यम से ग्रामीण-शहरी विभाजन को पाटने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है।
        • इसके अतिरिक्त, महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स ने समावेशी विकास को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है, जहाँ 45% से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार मौजूद है, जो उद्यमिता को आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक समानता दोनों के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में रेखांकित करता है।

A Decade of Startup India

प्रमुख सरकारी पहल:

      • वित्त पोषण और वित्त
        • स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स (FFS): ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस, 140 से अधिक वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) के माध्यम से निवेश, जिससे 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स को समर्थन मिला।
        • स्टार्टअप्स के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGSS): पात्र स्टार्टअप उधारकर्ताओं के लिए संपार्श्विक-मुक्त (Collateral-free) ऋण की सुविधा प्रदान करती है।
        • स्टार्टअप इंडिया सीड फंड योजना (SISFS): शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के समर्थन हेतु 215 से अधिक इनक्यूबेटरों को ₹945 करोड़ का आवंटन।
      • इकोसिस्टम विकास:
        • स्टार्टअप इंडिया हब: स्टार्टअप्स को निवेशकों, सलाहकारों, इनक्यूबेटरों और कॉर्पोरेट भागीदारों से जोड़ने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म।
        • राष्ट्रीय परामर्श पोर्टल (MAARG): संरचित परामर्श के माध्यम से स्टार्टअप्स को रणनीतिक और क्षेत्रीय मार्गदर्शन प्रदान करता है।
        • राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क (SRF): राज्यों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने हेतु प्रतिस्पर्धी संघवाद को प्रोत्साहित करता है।
      • नवाचार और डीप-टेक कार्यक्रम
        • अटल इनोवेशन मिशन (AIM 1.0 और 2.0): अटल टिंकरिंग लैब्स, कम्युनिटी इनोवेटर फेलोशिप, यूथ को:लैब तथा कम सेवा वाले क्षेत्रों के लिए लक्षित कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा देता है।
        • GENESIS और MeitY स्टार्टअप हब: विशेष रूप से टियर-II और टियर-III शहरों में डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं।
        • TIDE 2.0 और NIDHI कार्यक्रम: टियर-II/III शहरों, महिला उद्यमियों और विशेष योग्यजनों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ICT एवं प्रौद्योगिकी-संचालित उद्यमिता का समर्थन करते हैं।
      • ग्रामीण और जमीनी स्तर की उद्यमिता
        • स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP): 3.74 लाख से अधिक ग्रामीण उद्यमों का समर्थन कर स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाया है।
        • नवाचार, ग्रामीण उद्योग और उद्यमिता प्रोत्साहन योजना (ASPIRE): ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, कौशल विकास और सूक्ष्म उद्यम निर्माण को बढ़ावा देता है।
        • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): स्वरोजगार और जमीनी स्तर के उद्यम निर्माण हेतु मार्जिन मनी सहायता प्रदान करता है, जिसमें SC/ST समुदायों, महिलाओं और आकांक्षी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन शामिल हैं।

एक दशक का प्रभाव:

      • 2014 में केवल 4 यूनिकॉर्न से बढ़कर 120 से अधिक उच्च-मूल्य वाले स्टार्टअप्स तक का विकास, जिनका सामूहिक मूल्य $350 बिलियन से अधिक है।
      • छोटे शहरों से मजबूत प्रतिनिधित्व, जो विकेंद्रीकृत और समावेशी नवाचार के उभरते स्वरूप को दर्शाता है।
      • एग्री-टेक, क्लीन मोबिलिटी, एड-टेक और वित्तीय समावेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में स्टार्टअप्स का संरचनात्मक एकीकरण।
      • लाखों युवाओं के लिए रोजगार का सृजन, साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, औद्योगिक सहयोग और वैश्विक बाजारों तक पहुँच की सुविधा।

आगे की राह:

जैसे-जैसे भारत तीव्र विस्तार से स्थायी स्केलिंग (sustainable scaling) की ओर अग्रसर हो रहा है, स्टार्टअप्स नवाचार-आधारित आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जनसांख्यिकीय लाभांश और सुधार-उन्मुख शासन पर आधारित स्टार्टअप्स, 2030 तक $7.3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तथा व्यापकविकसित भारत 2047’ के रोडमैप के अंतर्गत भारत के दीर्घकालिक विजन को साकार करने में केंद्रीय भूमिका निभाते रहेंगे।