संदर्भ:
भारत ने 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। यह दिन भारतीय संविधान को अपनाने की याद में मनाया जाता है, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। यह दिवस भारत के एक संप्रभु गणतंत्र के रूप में परिवर्तन का प्रतीक है और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक लोकाचार और न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
उत्सव का विषय (Theme):
इस वर्ष के उत्सव दो प्रमुख विषयों “‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम’, ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ पर आधारित थे।ये विषय भारत की राष्ट्रीय विरासत और समकालीन आकांक्षाओं को रेखांकित करते हैं।
कर्तव्य पथ पर परेड:
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य परेड उत्सव का मुख्य आकर्षण थी, जिसमें सांस्कृतिक वैभव और सैन्य शक्ति का समागम देखने को मिला:
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- सांस्कृतिक झांकी: 2,500 से अधिक कलाकारों ने नृत्य, लोक परंपराओं और झांकियों के माध्यम से भारत की बहुलवादी विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को प्रदर्शित किया।
- सैन्य प्रदर्शन: भारतीय सेना के 'फेज्ड बैटल एरे' का प्रदर्शन किया गया, जो परिचालन तत्परता पर केंद्रित था। ब्रह्मोस, आकाश और सूर्यास्त्र जैसे स्वदेशी हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं का प्रमाण था।
- आकाशीय प्रदर्शन (Flypast): भारतीय वायु सेना ने राफेल, सुखोई-30 MKI, मिग-29 और परिवहन विमानों सहित 29 विमानों के साथ फ्लाईपास्ट किया, जो हवाई शक्ति और सटीकता को दर्शाता है।
- झांकियां: कुल 30 झांकियों ने सांस्कृतिक विविधता, तकनीकी प्रगति, पर्यावरण जागरूकता, अंतरिक्ष अन्वेषण और सामाजिक पहलों का चित्रण किया।
- सांस्कृतिक झांकी: 2,500 से अधिक कलाकारों ने नृत्य, लोक परंपराओं और झांकियों के माध्यम से भारत की बहुलवादी विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों को प्रदर्शित किया।
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रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) दल:
पहली बार, भारतीय सेना के रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) ने विशेष रूप से क्यूरेटेड एक 'पशु दल' प्रस्तुत किया, जो कठिन क्षेत्रों में उनके परिचालन महत्व को दर्शाता है:
रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) की भूमिका:
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- यह कोर युद्ध, टोह लेने (reconnaissance) और रसद (logistics) के लिए घोड़ों, खच्चरों और कुत्तों के प्रजनन, प्रशिक्षण और तैनाती के लिए जिम्मेदार है।
- यह पशु चिकित्सा देखभाल प्रदान करता है, आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहायता करता है और संयुक्त राष्ट्र मिशनों एवं सैन्य कूटनीति में भाग लेता है।
- 1960 में स्थापित (इसकी जड़ें 1779 तक जाती हैं), इसका आदर्श वाक्य “पशु सेवा अस्माकं धर्मः” (पशुओं की सेवा हमारा धर्म है) है।
- यह कोर युद्ध, टोह लेने (reconnaissance) और रसद (logistics) के लिए घोड़ों, खच्चरों और कुत्तों के प्रजनन, प्रशिक्षण और तैनाती के लिए जिम्मेदार है।
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2026 परेड दल की विशेषताएं:
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- बैक्ट्रियन ऊंट: लद्दाख में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद के लिए शामिल किए गए, जो खड़ी ढलानों पर 250 किलोग्राम तक वजन उठा सकते हैं।
- ज़ांस्करी पोनी: लद्दाख की स्वदेशी नस्ल, जो शून्य से नीचे के तापमान को सहने और पहाड़ी इलाकों में सामान ले जाने में सक्षम है।
- आर्मी डॉग्स: मुधोल, रामपुर, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजपालयम जैसी स्वदेशी नस्लें विस्फोटक का पता लगाने, आपदा राहत और युद्ध में भूमिका निभाती हैं।
- रैप्टर्स (शिकारी पक्षी): चार प्रशिक्षित पक्षियों ने निगरानी और परिचालन सहायता में अपने उपयोग का प्रदर्शन किया।
- बैक्ट्रियन ऊंट: लद्दाख में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद के लिए शामिल किए गए, जो खड़ी ढलानों पर 250 किलोग्राम तक वजन उठा सकते हैं।
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परिचालन महत्व:
RVC ने कारगिल युद्ध, संयुक्त राष्ट्र शांति सेना और आपदा राहत (जैसे 2024 की वायनाड बाढ़, हिमाचल और उत्तराखंड की बाढ़) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निष्कर्ष:
77वें गणतंत्र दिवस ने भारत की संवैधानिक विरासत, सांस्कृतिक एकता और रणनीतिक दृष्टि का जश्न मनाया। RVC पशु दल के शामिल होने, उन्नत सैन्य प्रदर्शन और वैश्विक राजनयिक जुड़ाव ने भारत की पहचान को एक जीवंत, लचीले गणतंत्र के रूप में प्रतिबिंबित किया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और समावेशी प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।

