संदर्भ:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में लंबित अंतर्राज्यीय मुद्दों, विशेष रूप से जल विवाद, सहकारी संघवाद, आंतरिक सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
बैठक की प्रमुख बातें:
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- गृह मंत्री ने केंद्र, अंतर्राज्यीय परिषद और संबंधित राज्यों के बीच संवाद एवं समन्वय के माध्यम से अंतर्राज्यीय जल विवादों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया।
- उन्होंने दीर्घकालिक जल सुरक्षा को मजबूत करने, अंतर्देशीय जलमार्गों को बढ़ावा देने और परिवहन लागत कम करने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने, विशेष रूप से गोदावरी–कावेरी नदी तंत्र को जोड़ने की वकालत की।
- उन्होंने गोदावरी–कृष्णा–पेन्नार–कावेरी नदी जोड़ो परियोजना के माध्यम से बाढ़ के अतिरिक्त जल को स्थानांतरित करने तथा गंगा–कावेरी नदी जोड़ो परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा।
- गृह मंत्री ने केंद्र, अंतर्राज्यीय परिषद और संबंधित राज्यों के बीच संवाद एवं समन्वय के माध्यम से अंतर्राज्यीय जल विवादों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया।
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संस्थागत तंत्र:
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- क्षेत्रीय परिषदें: ये राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन सभी परिषदों के सामान्य अध्यक्ष होते हैं। ये राज्यों के बीच विचार-विमर्श, सहयोग और समन्वय के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
- अंतर्राज्यीय परिषद: इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 263 के अंतर्गत किया गया है। यह साझा हितों से जुड़े विषयों पर केंद्र और राज्यों के बीच विचार-विमर्श तथा समन्वय को बढ़ावा देती है।
- अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद: ऐसे विवाद अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के अंतर्गत आते हैं। यह अधिनियम बातचीत के माध्यम से समाधान का प्रावधान करता है और यदि समझौता नहीं हो पाता तथा वैधानिक शर्तें पूरी होती हैं, तो जल विवाद न्यायाधिकरणों के माध्यम से विवाद के निपटारे की व्यवस्था करता है।
- क्षेत्रीय परिषदें: ये राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत स्थापित वैधानिक निकाय हैं। केंद्रीय गृह मंत्री इन सभी परिषदों के सामान्य अध्यक्ष होते हैं। ये राज्यों के बीच विचार-विमर्श, सहयोग और समन्वय के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
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अन्य चर्चा के विषय:
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- गृह मंत्री ने महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार से जुड़े मामलों, जिनमें लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के अंतर्गत आने वाले अपराध भी शामिल हैं, की शीघ्र जांच और त्वरित निपटारे के लिए त्वरित सुनवाई विशेष न्यायालयों के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान किया।
- उन्होंने कुपोषण, बच्चों में अवरुद्ध शारीरिक विकास और विद्यालय छोड़ने की समस्या को भारत की भावी मानव पूंजी को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नशामुक्त भारत के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना के अंतर्गत केंद्र और राज्यों द्वारा समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।
- बैठक में राजकोषीय संघवाद, परिसीमन, महिलाओं का प्रतिनिधित्व, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। दक्षिणी राज्यों ने राजकोषीय संसाधनों के न्यायसंगत एवं समान वितरण तथा विकास में उचित व्यवहार की आवश्यकता पर जोर दिया और साथ ही भारत की आर्थिक वृद्धि में अपने योगदान को भी रेखांकित किया।
- गृह मंत्री ने महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार से जुड़े मामलों, जिनमें लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के अंतर्गत आने वाले अपराध भी शामिल हैं, की शीघ्र जांच और त्वरित निपटारे के लिए त्वरित सुनवाई विशेष न्यायालयों के माध्यम से प्रभावी कार्रवाई करने का आह्वान किया।
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महत्व:
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- यह बैठक अंतर्राज्यीय विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करती है। जल विवादों का समयबद्ध समाधान जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और क्षेत्रीय विकास को मजबूत कर सकता है। हालांकि, नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं के लिए पारिस्थितिक प्रभाव, विस्थापन, निचले क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं, नदी बेसिनों के बीच समानता तथा संबंधित राज्यों की चिंताओं का सावधानीपूर्वक आकलन आवश्यक है। इसलिए एक टिकाऊ दृष्टिकोण में विकास के उद्देश्यों, पर्यावरणीय स्थिरता और संघीय सहमति के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।
- यह बैठक अंतर्राज्यीय विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद के महत्व को रेखांकित करती है। जल विवादों का समयबद्ध समाधान जल सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और क्षेत्रीय विकास को मजबूत कर सकता है। हालांकि, नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजनाओं के लिए पारिस्थितिक प्रभाव, विस्थापन, निचले क्षेत्रों की जल आवश्यकताओं, नदी बेसिनों के बीच समानता तथा संबंधित राज्यों की चिंताओं का सावधानीपूर्वक आकलन आवश्यक है। इसलिए एक टिकाऊ दृष्टिकोण में विकास के उद्देश्यों, पर्यावरणीय स्थिरता और संघीय सहमति के बीच संतुलन स्थापित करना आवश्यक है।
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