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Blog / 04 Feb 2026

भारत और अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक

संदर्भ:

हाल ही में भारत ने लगभग दस वर्षों के अंतराल के बाद नई दिल्ली में दूसरी भारतअरब विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित की। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने की। इसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री तथा लीग के महासचिव ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करना था।

अरब लीग (अरब राष्ट्रों का संघ) के बारे में:

      • अरब लीग (जिसे औपचारिक रूप से अरब राष्ट्रों का संघ कहा जाता है) मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 22 देशों का एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना 22 मार्च 1945 को काहिरा में की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना तथा उनकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना है।
      • लीग परिषद में प्रत्येक सदस्य देश को एक मत प्राप्त होता है और लिए गए निर्णय केवल उन्हीं देशों पर बाध्यकारी होते हैं जो उन्हें स्वीकार करते हैं। अरब लीग का मुख्यालय काहिरा, मिस्र में स्थित है।
      • इसके सदस्य देशों में मिस्र, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया और यमन जैसे संस्थापक देश शामिल हैं, जबकि अल्जीरिया, बहरीन, कुवैत, मोरक्को, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ट्यूनीशिया जैसे अन्य देश बाद में सदस्य बने। भारत को अरब लीग में पर्यवेक्षक का दर्जा प्राप्त है।

Pleased to co-chair the 2nd India - Arab Foreign Ministers' Meeting in New  Delhi. Underlined the importance India places on its ties with the Arab  world. Highlighted: ➡️ The significance of our

भारतअरब लीग सहयोग के बारे में:

      • भारत और अरब लीग के बीच औपचारिक सहयोग की शुरुआत मार्च 2002 में एक समझौता ज्ञापन के माध्यम से हुई, जिससे राजनीतिक संवाद को संस्थागत आधार मिला। दिसंबर 2008 में अरबभारत सहयोग मंच की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना था। इस मंच की पहली बैठक जनवरी 2016 में बहरीन में आयोजित की गई।
      • वर्ष 2010 में मिस्र में भारत के राजदूत को अरब लीग में भारत का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक संपर्क और मजबूत हुआ।
      • भारत और अरब देशों के बीच आर्थिक संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 240 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का है, जिसमें ऊर्जा आयात की प्रमुख भूमिका है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।
      • भारतअरब साझेदारी और निवेश शिखर सम्मेलन तथा भारतअरब वाणिज्य, उद्योग और कृषि मंडल (2026) जैसी पहलें व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं।

दूसरी बैठक के प्रमुख परिणाम:

      • नई दिल्ली घोषणा और रणनीतिक सहयोग: भारत और अरब देशों ने नई दिल्ली घोषणा को अपनाया, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके साथ ही 2026 से 2028 की अवधि के लिए एक कार्यकारी कार्यक्रम भी तय किया गया, जो भविष्य की साझेदारी का मार्गदर्शन करेगा।
      • आतंकवाद के खिलाफ सहयोग: दोनों पक्षों ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को दोहराया, सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की और आतंकवाद तथा अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों के विरुद्ध संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
      • क्षेत्रीय स्थिरता: बैठक के दौरान गाजा, सूडान, यमन, लेबनान और लीबिया में जारी संकटों पर चर्चा की गई तथा शांतिपूर्ण समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया गया। भारत ने मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण, स्थायी और व्यापक शांति के लिए अपने समर्थन को पुनः स्पष्ट किया।
      • आर्थिक और तकनीकी सहयोग: बैठक में व्यापार, ऊर्जा, संपर्क, डिजिटल तकनीक, नवाचार और लोगों के आपसी संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई, जैसा कि अरबभारत सहयोग मंच के कार्यकारी कार्यक्रम में निर्धारित है।
      • संस्थागत गति: इस बैठक ने नियमित और संरचित उच्च-स्तरीय संवाद को गति प्रदान की। इसके अंतर्गत भविष्य में वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकें, साझेदारी सम्मेलन तथा सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहलें आयोजित करने पर सहमति बनी।

निष्कर्ष:

दूसरी भारतअरब विदेश मंत्रियों की बैठक पश्चिम एशिया में भारत की बढ़ती कूटनीतिक उपस्थिति को दर्शाती है और अरब देशों के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करती है। यह बैठक ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, आतंकवाद-रोधी सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग को संस्थागत रूप प्रदान करती है तथा भारत की विदेश नीति को बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप आगे बढ़ाती है।