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Blog / 13 May 2026

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026

संदर्भ:

हाल ही में रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने 2026 विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक जारी किया। इस रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता में तीव्र गिरावट को रेखांकित किया गया है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट के अनुसार, 180 देशों और क्षेत्रों में से 100 में प्रेस स्वतंत्रता के अंक घटे हैं, जबकि वैश्विक औसत अंक पिछले 25 वर्षों के सबसे निम्न स्तर पर पहुँच गए हैं।

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के बारे में:

      • विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक वर्ष 2002 से प्रतिवर्ष आरएसएफ द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह 180 देशों और क्षेत्रों में प्रेस की स्वतंत्रता का मूल्यांकन निम्नलिखित पाँच मानकों के आधार पर करता है:
        • राजनीतिक परिस्थिति
        • विधिक ढाँचा
        • आर्थिक स्थिति
        • सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण
        • पत्रकारों की सुरक्षा
      • यह सूचकांक इस बात का आकलन करता है कि पत्रकार राजनीतिक दबाव, सेंसरशिप अथवा हिंसा के बिना कितनी स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ कार्य कर सकते हैं।

2026 RSF World Press Freedom Index

सूचकांक के प्रमुख निष्कर्ष:

      • पहली बार, 52% से अधिक देशों को कठिनया अत्यंत गंभीरपत्रकारिता स्थिति वाले देशों के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
      • कानूनी संकेतक (लीगल इंडिकेटर) में वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई, जिसका कारण निम्नलिखित का बढ़ता दुरुपयोग है:
        • राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित कानून,
        • आतंकवाद-रोधी कानून,
        • पत्रकारों के विरुद्ध रणनीतिक मुकदमे (SLAPPs)
      • मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका क्षेत्र पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र बना रहा।
      • बढ़ता राजनीतिक दबाव, हिंसा, सेंसरशिप और मीडिया का एकाधिकार (मोनोपोलाइज़ेशन) वैश्विक स्तर पर प्रमुख चिंताएँ रहीं।

देशों की रैंकिंग के बारे में:

      • शीर्ष स्थान प्राप्त देश:
        • नॉर्वे
        • नीदरलैंड्स
        • एस्टोनिया
        • डेनमार्क
        • स्वीडन
      • सबसे निचले स्थान प्राप्त देश:
        • इरिट्रिया (180वाँ स्थान)
        • उत्तर कोरिया
        • चीन
        • ईरान
        • सऊदी अरब

भारत की रैंकिंग:

भारत को 180 देशों में 157वाँ स्थान प्राप्त हुआ, जो वर्ष 2025 के 151वें स्थान की तुलना में छह स्थानों की गिरावट है। आरएसएफ ने भारत की खराब रैंकिंग के लिए निम्न कारण बताए:

      • पत्रकारों के विरुद्ध हिंसा,
      • मीडिया स्वामित्व का अत्यधिक केंद्रीकरण,
      • राजनीतिक दबाव,
      • राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों का दुरुपयोग।

निहितार्थ:

      • प्रेस स्वतंत्रता में गिरावट लोकतंत्र, पारदर्शिता और जवाबदेही को कमजोर करती है।
      • स्वतंत्र पत्रकारिता के दमन से नागरिकों की विश्वसनीय सूचना तक पहुँच सीमित हो जाती है।
      • अत्यधिक राज्य नियंत्रण और कानूनी धमकी नागरिक स्वतंत्रताओं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती है।
      • मीडिया स्वामित्व का आर्थिक एकाग्रण (केंद्रित होना) विचारों की बहुलता को घटा सकता है।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के बारे में:

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) पेरिस स्थित एक अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन है, जो स्वतंत्र और विश्वसनीय सूचना तक पहुँच के मूल मानव अधिकार की रक्षा करता है। इसकी स्थापना 1985 में हुई थी। यह संगठन विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के वार्षिक प्रकाशन और वैश्विक स्तर पर पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अपने प्रयासों हेतु जाना जाता है।

निष्कर्ष:

2026 का आरएसएफ सूचकांक स्वतंत्र पत्रकारिता के समक्ष बढ़ती वैश्विक चुनौतियों को दर्शाता है। प्रेस की स्वतंत्रता का संरक्षण लोकतांत्रिक शासन, सूचित सार्वजनिक विमर्श और मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने हेतु देशों को कानूनी सुरक्षा को सुदृढ़ करना, पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा स्वतंत्र मीडिया संस्थानों को प्रोत्साहित करना चाहिए।

 

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