संदर्भ:
2026 का नोबेल पुरस्कार रसायन विज्ञान हेनरी बी. कगन (Henri B. Kagan) और केन्सो सोआई (Kenso Soai) को चिरैलिटी और असममित संश्लेषण पर उनके अग्रणी कार्य के लिए प्रदान किया गया है। उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि एक रासायनिक अभिक्रिया किस प्रकार किसी अणु के एक दर्पण-प्रतिबिंबित रूप का प्राथमिकता से उत्पादन कर सकती है। उनके कार्य का औषधीय क्षेत्र तथा जीवन के आधारभूत रसायन को समझने में महत्वपूर्ण प्रभाव है।
चिरैलिटी क्या है?
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- चिरल अणु (Chiral molecules) दो ऐसे रूपों में मौजूद होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, लेकिन एक-दूसरे पर पूर्णतः आरोपित नहीं किए जा सकते। यह बाएँ और दाएँ हाथ के समान है।
- इन रूपों को एनैन्टियोमर (Enantiomers) कहा जाता है।
- इनमें समान परमाणु और रासायनिक बंध होते हैं, लेकिन उनकी त्रि-आयामी व्यवस्था अलग होती है।
- जैविक प्रणालियाँ समचिरलता (Homochirality) प्रदर्शित करती हैं — अर्थात वे किसी एक एनैन्टियोमर को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता देती हैं।
- प्रोटीन मुख्य रूप से L-अमीनो अम्लों का उपयोग करते हैं।
- DNA/RNA में पाई जाने वाली शर्कराएँ मुख्य रूप से D-रूप में होती हैं।
- प्रोटीन मुख्य रूप से L-अमीनो अम्लों का उपयोग करते हैं।
- चिरल अणु (Chiral molecules) दो ऐसे रूपों में मौजूद होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, लेकिन एक-दूसरे पर पूर्णतः आरोपित नहीं किए जा सकते। यह बाएँ और दाएँ हाथ के समान है।
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प्रमुख वैज्ञानिक उपलब्धियाँ:
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- हेनरी कगन – असममित संश्लेषण
- पहले, सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में आमतौर पर दोनों एनैन्टियोमर लगभग समान मात्रा में उत्पन्न होते थे। कगन ने प्रदर्शित किया कि ऐसा होना आवश्यक नहीं है।
- 1980 के दशक में उन्होंने दिखाया कि एक हल्का चिरल उत्प्रेरक भी दोनों एनैन्टियोमर के बीच बहुत अधिक असंतुलन उत्पन्न कर सकता है।
- इसने असममित उत्प्रेरण (Asymmetric Catalysis) के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को स्थापित किया, जिससे रसायनज्ञ किसी वांछित आणविक रूप का चयनात्मक रूप से उत्पादन कर सके।
- पहले, सामान्य रासायनिक अभिक्रियाओं में आमतौर पर दोनों एनैन्टियोमर लगभग समान मात्रा में उत्पन्न होते थे। कगन ने प्रदर्शित किया कि ऐसा होना आवश्यक नहीं है।
- केन्सो सोआई – स्व-उत्प्रेरण
- इसके बाद सोआई ने स्व-उत्प्रेरक अभिक्रियाओं (Autocatalytic Reactions) का अध्ययन किया, जिसमें किसी अभिक्रिया का उत्पाद स्वयं एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
- उन्होंने एक ऐसी स्व-उत्प्रेरक अभिक्रिया विकसित की, जो मुख्य रूप से एक एनैन्टियोमर का उत्पादन करने में सक्षम थी।
- चयनित एनैन्टियोमर स्वयं के अधिक निर्माण को बढ़ावा दे सकता था, यह एक स्व-सुदृढ़ीकरण/स्व-प्रतिकृति प्रक्रिया थी।
- इस अभिक्रिया ने लगभग 99.5% एक ही एनैन्टियोमर प्राप्त किया, जो जैविक प्रणालियों में देखी जाने वाली मजबूत आणविक प्राथमिकता के करीब है।
- इसके बाद सोआई ने स्व-उत्प्रेरक अभिक्रियाओं (Autocatalytic Reactions) का अध्ययन किया, जिसमें किसी अभिक्रिया का उत्पाद स्वयं एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है।
- हेनरी कगन – असममित संश्लेषण
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यह क्यों महत्वपूर्ण है?
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- औषधीय अनुप्रयोग:
- औषधि विकास में चिरैलिटी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जैविक रिसेप्टर और एंजाइम एनैन्टियोमर के बीच अंतर कर सकते हैं।
- एक एनैन्टियोमर वांछित चिकित्सीय प्रभाव प्रदान कर सकता है, जबकि दूसरा कम प्रभावी या संभावित रूप से हानिकारक हो सकता है।
- पहले, औषधि निर्माता अक्सर दोनों रूपों के मिश्रण का उत्पादन करते थे और बाद में वांछित एनैन्टियोमर को अलग करते थे।
- असममित संश्लेषण सीधे आवश्यक एनैन्टियोमर का उत्पादन कर सकता है, जिससे लागत, अपशिष्ट और प्रसंस्करण की जटिलता कम हो सकती है।
- इसका महत्व औषधियों के अलावा स्वाद, सुगंध और कीटनाशकों तक भी विस्तृत है, जो जैविक प्रणालियों के साथ अंतःक्रिया करते हैं।
- औषधि विकास में चिरैलिटी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जैविक रिसेप्टर और एंजाइम एनैन्टियोमर के बीच अंतर कर सकते हैं।
- जीवन की उत्पत्ति से संबंध
- यह कार्य दर्शाता है कि जैविक प्रणालियों के बाहर रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समचिरलता उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, यह अपने आप में यह नहीं समझाता कि जीवन ने किसी विशेष आणविक अभिविन्यास को क्यों चुना। यह इस लंबे समय से चले आ रहे प्रश्न की जाँच के लिए एक प्रायोगिक मार्ग प्रदान करता है।
- यह कार्य दर्शाता है कि जैविक प्रणालियों के बाहर रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समचिरलता उत्पन्न हो सकती है। हालांकि, यह अपने आप में यह नहीं समझाता कि जीवन ने किसी विशेष आणविक अभिविन्यास को क्यों चुना। यह इस लंबे समय से चले आ रहे प्रश्न की जाँच के लिए एक प्रायोगिक मार्ग प्रदान करता है।
- औषधीय अनुप्रयोग:
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निष्कर्ष:
2026 का रसायन विज्ञान नोबेल इस बात को रेखांकित करता है कि अणुओं के त्रि-आयामी अभिविन्यास को नियंत्रित करना रासायनिक विनिर्माण, विशेष रूप से औषधि उत्पादन, में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकता है। साथ ही, यह जीव विज्ञान के एक मौलिक रहस्य, जीवन कुछ अणुओं के एक दर्पण-प्रतिबिंबित रूप को अत्यधिक प्राथमिकता क्यों देता है, को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत भी प्रदान करता है।

