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Daily-mcqs 29 May 2026
Q1:
क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल (Quad Critical Minerals Initiative) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह पहल आपूर्ति शृंखलाओं को किसी एक देश के प्रभुत्व से सुरक्षित करने हेतु सरकार और निजी क्षेत्र से अरबों डॉलर के समर्थन को जुटाने का लक्ष्य रखती है। 2. यह ढांचा केवल खनिजों के प्राथमिक खनन और निष्कर्षण तक ही सीमित है। 3. यह पहल उन परियोजनाओं को समर्थन देती है जिनका “Quad nexus” हो, अर्थात् वे सदस्य देशों में स्थित हों या क्वाड देशों में मुख्यालय वाली कंपनियों द्वारा संचालित हों। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स पहल का उद्देश्य सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और रक्षा विनिर्माण के लिए आवश्यक खनिजों की विश्वसनीय एवं लचीली आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करना है। इसके तहत बड़े पैमाने पर वित्तीय सहयोग का प्रावधान किया गया है।
कथन 2 गलत है: यह पहल केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिजों के पूरे जीवनचक्र—खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और पुनर्प्राप्ति—को शामिल करती है।
कथन 3 सही है: यह पहल “Quad nexus” वाली परियोजनाओं को प्राथमिकता देती है, अर्थात् वे परियोजनाएँ जो क्वाड सदस्य देशों में स्थित हों या क्वाड देशों में मुख्यालय रखने वाली कंपनियों द्वारा संचालित हों।
Q2:
क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (Quad) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह नाटो (NATO) की तरह एक औपचारिक, संधि-आधारित सैन्य गठबंधन है, जिसमें पारस्परिक रक्षा दायित्व शामिल हैं। 2. क्वाड की उत्पत्ति का संबंध 2004 की हिंद महासागर सुनामी के बाद प्रदान की गई मानवीय सहायता से जुड़ा है। 3. क्वाड सहयोग का दायरा केवल समुद्री सुरक्षा और रक्षा अभ्यासों तक सीमित है। 4. इसका आधिकारिक उद्देश्य “मुक्त, खुला और समावेशी” हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करना है। उपरोक्त कथनों में से कितने सही हैं?
A: केवल एक
B: केवल दो
C: केवल तीन
D: सभी चार
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
क्वाड कोई सैन्य गठबंधन या पारस्परिक रक्षा संधि नहीं है। यह एक अनौपचारिक रणनीतिक एवं कूटनीतिक संवाद मंच है। नाटो के विपरीत, इसमें कोई औपचारिक प्रशासनिक संरचना, सचिवालय या बाध्यकारी संधि दायित्व नहीं हैं।
कथन 2 सही है:
क्वाड की उत्पत्ति 2004 की हिंद महासागर सुनामी राहत कार्यों से जुड़ी मानी जाती है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) कार्यों में समन्वय किया, जिसने भविष्य के समुद्री सहयोग की नींव रखी।
कथन 3 गलत है:
यद्यपि समुद्री सुरक्षा और संयुक्त सैन्य अभ्यास (जैसे मालाबार अभ्यास) क्वाड के महत्वपूर्ण पहलू हैं, लेकिन इसका दायरा अब काफी विस्तृत हो चुका है। वर्तमान में इसके कार्यक्षेत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ, अंतरिक्ष सहयोग, साइबर सुरक्षा तथा अवसंरचना/कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
कथन 4 सही है:
क्वाड का प्रमुख घोषित उद्देश्य “मुक्त, खुला, समावेशी और लचीला” हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है। इसके सदस्य नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, नौवहन की स्वतंत्रता तथा क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन करते हैं।
Q3:
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) द्वारा भारतीय तिलचट्टों (Cockroaches) पर किए गए हालिया अध्ययन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में दर्ज तिलचट्टों की 60% से अधिक प्रजातियाँ स्थानिक (Endemic) हैं। 2. इस अध्ययन में माइटोकॉन्ड्रियल COI जीन का उपयोग करते हुए भारत की पहली DNA Barcode Reference Library तैयार की गई। 3. अध्ययन में पहचानी गई सभी आनुवंशिक वंशावलियों (genetic lineages) को पहले ही वैज्ञानिक नाम दिए जा चुके थे। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: भारत में तिलचट्टों की 191 दर्ज प्रजातियाँ हैं, जिनमें से 60% से अधिक स्थानिक हैं।
कथन 2 सही है: ZSI ने माइटोकॉन्ड्रियल साइटोक्रोम c ऑक्सीडेज-I (COI) जीन का उपयोग करके भारत की पहली DNA Barcode Reference Library विकसित की।
कथन 3 गलत है: अध्ययन में 44 ऐसी आनुवंशिक वंशावलियाँ पाई गईं जिन्हें अभी तक वैज्ञानिक नाम नहीं दिए गए हैं, जो छिपी हुई जैव विविधता (Cryptic Diversity) और भविष्य में नई प्रजातियों की खोज की संभावना को दर्शाती हैं।
Q4:
तिलचट्टों (Cockroaches) के पारिस्थितिक महत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विश्वभर में तिलचट्टों की अधिकांश प्रजातियाँ कृषि कीट हैं जो मानव आवासों में रहती हैं। 2. तिलचट्टे मृत जैविक पदार्थों का अपघटन करके पोषक तत्त्व चक्रण (Nutrient Cycling) में योगदान देते हैं। 3. जंगली तिलचट्टों की प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के जैव-संकेतक (Bioindicators) के रूप में कार्य करती हैं। 4. तिलचट्टे बिल बनाने की गतिविधियों के माध्यम से मृदा वातन (Soil Aeration) में सहायता करते हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 2,3 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: विश्व में पाई जाने वाली लगभग 5,000 तिलचट्टा प्रजातियों में से 1% से भी कम मानव आवासों में कीट के रूप में रहती हैं; अधिकांश प्रजातियाँ जंगलों और पत्तियों की परतों में पाई जाती हैं।
कथन 2 सही है: तिलचट्टे जैविक पदार्थों का अपघटन कर पोषक तत्त्व चक्रण में सहायता करते हैं।
कथन 3 सही है: जंगली तिलचट्टे पर्यावरणीय एवं आवासीय परिवर्तनों के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए वे जैव-संकेतक के रूप में कार्य करते हैं।
कथन 4 सही है: उनकी बिल बनाने की गतिविधियाँ मिट्टी में वायु और जल प्रवाह को बेहतर बनाती हैं, जिससे मृदा वातन में सुधार होता है।
Q5:
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India - ZSI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी स्थापना वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत की गई थी। 2. यह राष्ट्रीय प्राणी संग्रह (National Zoological Collection) के नामित भंडार (Designated Repository) के रूप में कार्य करता है। 3. यह "फौना ऑफ इंडिया" जारी करता है तथा देश की प्राणी विविधता के दस्तावेजीकरण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
ZSI कोई वैधानिक निकाय नहीं है जिसे संसद के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया हो। इसकी स्थापना वर्ष 1916 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के अधीन एक अधीनस्थ संगठन के रूप में की गई थी।
कथन 2 सही है:
राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अनुसार, ZSI को राष्ट्रीय प्राणी संग्रह का नामित भंडार घोषित किया गया है। इसके पास एक मिलियन से अधिक पहचानित नमूनों का संग्रह सुरक्षित है।
कथन 3 सही है:
ZSI का प्रमुख उद्देश्य देश की समृद्ध प्राणी विविधता का सर्वेक्षण, अन्वेषण और शोध को बढ़ावा देना है। यह “Fauna of India” जैसे प्रकाशनों के माध्यम से प्राणी विविधता का दस्तावेजीकरण करता है तथा हाल ही में “Fauna of India Checklist Portal” भी प्रारंभ किया है।
Q6:
हाल ही में चर्चा में रही ‘CLEAR’ (Cleavable Light-Erased Antibody Reporter) तकनीक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) द्वारा विकसित एक स्पैटियल प्रोटीन इमेजिंग प्लेटफॉर्म है। 2. पारंपरिक विधियों के विपरीत, यह केवल एक फ्लोरोसेंट मार्कर का उपयोग करके कोशिका के भीतर अनेक प्रोटीनों का मानचित्रण करता है। 3. फ्लोरोसेंट संकेत को 365 nm LED प्रकाश की हल्की किरण से मिटाया जा सकता है, जिससे प्रोटीन टैगिंग और इमेजिंग के कई चक्र संभव हो जाते हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
CLEAR तकनीक को बेंगलुरु स्थित जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया । हालांकि, IISc ने जटिल जैविक प्रणालियों, जैसे प्रतिरक्षा कोशिकाओं, पर इसके परीक्षण में सहयोग किया।
कथन 2 सही है:
CLEAR प्लेटफॉर्म की मुख्य विशेषता यह है कि यह केवल एक फ्लोरोसेंट मार्कर का उपयोग करके एक ही जैविक नमूने में अनेक प्रोटीनों को उनकी स्थानिक व्यवस्था (spatial organization) बनाए रखते हुए दृश्य रूप में प्रदर्शित और मानचित्रित कर सकता है।
कथन 3 सही है:
प्रोटीन इमेजिंग के बाद फ्लोरोसेंट संकेत को 365 nm LED प्रकाश की हल्की किरण से दो मिनट से कम समय में पूरी तरह मिटाया जा सकता है। इसके बाद “टैगिंग, इमेजिंग और मिटाने” की प्रक्रिया को बार-बार दोहराया जा सकता है।
Q7:
नव विकसित CLEAR तकनीक के संभावित अनुप्रयोगों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. कोशिका-स्तर पर सूक्ष्म परिवर्तनों का अवलोकन करके कैंसर का प्रारंभिक पता लगाना। 2. अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे तंत्रिका संबंधी विकारों में शामिल प्रोटीनों का सटीक अध्ययन। 3. रोगी-विशिष्ट प्रोटिओमिक प्रोफाइल प्रदान करके प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) को सक्षम बनाना। नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
CLEAR तकनीक स्पैटियल प्रोटिओमिक्स और जैव-चिकित्सा अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है, जिसके कई परिवर्तनकारी चिकित्सा अनुप्रयोग हैं: