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Daily-mcqs 26 Sep 2026
Q1:
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को पद से हटाए जाने के संबंध में वही संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, जो भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को प्राप्त है। 2. अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है। 3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग करने वाला प्रस्ताव केवल लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों के समर्थन से ही शुरू किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त को कार्यकाल की सुरक्षा प्रदान की गई है। इस प्रावधान के अनुसार, CEC को पद से केवल “उसी रीति और उन्हीं आधारों पर” हटाया जा सकता है, जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। अनुच्छेद 124(4) के अनुसार, ऐसे हटाने के आधार केवल सिद्ध कदाचार (proved misbehaviour) या अक्षमता (incapacity) हैं।
कथन 2 सही है:
संविधान मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के कार्यकाल की सुरक्षा में स्पष्ट अंतर करता है। किसी अन्य निर्वाचन आयुक्त या क्षेत्रीय निर्वाचन आयुक्त को पद से केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है। यह सुरक्षा उन्हें कार्यपालिका द्वारा मनमाने ढंग से हटाए जाने के भय के बिना स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सहायता करती है। हालांकि, उनका संरक्षण CEC की तुलना में कम कठोर है।
कथन 3 गलत है:
CEC को हटाने की मांग करने वाला प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है; यह केवल लोकसभा तक सीमित नहीं है। प्रक्रिया के अनुसार, प्रस्ताव की सूचना पर लोकसभा के मामले में कम से कम 100 सदस्यों या राज्यसभा के मामले में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं।
Q2:
मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 तथा संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की सिफारिश करने वाली चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने संबंधी प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, जिसे उस सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत के रूप में परिभाषित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: 1 व 2 दोनों
D: कोई नहीं
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के अंतर्गत, राष्ट्रपति तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर CEC और ECs की नियुक्ति करते हैं। इस समिति में प्रधानमंत्री (अध्यक्ष के रूप में), लोकसभा में विपक्ष के नेता (सदस्य के रूप में) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक मंत्री (सदस्य के रूप में) शामिल होते हैं। 2023 के वैधानिक ढाँचे के अंतर्गत भारत के मुख्य न्यायाधीश इस चयन समिति के सदस्य नहीं हैं।
कथन 2 सही है: चूंकि CEC को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है, इसलिए इस प्रस्ताव के लिए संसद में कठोर बहुमत की आवश्यकता होती है। सफल होने के लिए, हटाने संबंधी प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से पारित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए:
1. सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत (पूर्ण बहुमत), तथा
2. सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई का बहुमत आवश्यक है।
इस विधायी प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, हटाने का अंतिम आदेश भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जाता है।
Q3:
संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर में "शत्रु राज्य" (Enemy State) संबंधी प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अंतर्गत, "शत्रु राज्य" को स्पष्ट रूप से ऐसे किसी भी देश के रूप में परिभाषित किया गया है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धुरी शक्तियों (Axis Powers) से संबंधित था। 2. चार्टर का अनुच्छेद 53 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की पूर्व अनुमति के बिना किसी शत्रु राज्य के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई करने की अनुमति देता है। 3. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने इन प्रावधानों को कभी भी औपचारिक रूप से अप्रासंगिक (obsolete) नहीं माना है और न ही इन्हें हटाने का कोई इरादा व्यक्त किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 53 के अंतर्गत, "शत्रु राज्य" से औपचारिक रूप से ऐसे किसी भी राज्य का तात्पर्य है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्तमान चार्टर के किसी भी हस्ताक्षरकर्ता (signatory) का शत्रु रहा हो। इसमें "धुरी शक्तियाँ (Axis Powers)" शब्द का नाम लेकर स्पष्ट रूप से उल्लेख या परिभाषा को केवल उन्हीं तक सीमित नहीं किया गया है, हालांकि व्यावहारिक रूप से यह प्रावधान उन्हीं पर लागू होता था।
कथन 2 सही है: अनुच्छेद 53 में प्रवर्तन कार्रवाइयों के संबंध में एक विशेष अपवाद का प्रावधान है, जिसके तहत सैन्यवाद (militarism) के पुनरुत्थान को रोकने के लिए किसी शत्रु राज्य के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सामान्य पूर्व अनुमति के बिना कार्रवाई की जा सकती है।
कथन 3 गलत है: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1995 में औपचारिक रूप से स्वीकार किया था कि शत्रु-राज्य संबंधी प्रावधान अप्रासंगिक (obsolete) हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, 2005 के विश्व शिखर सम्मेलन के परिणाम दस्तावेज (World Summit Outcome) में अनुच्छेद 53, 77 और 107 से शत्रु राज्यों के संदर्भों को हटाने का स्पष्ट निर्णय लिया गया था।
Q4:
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन की प्रक्रिया और शत्रु राज्य संबंधी प्रावधानों को हटाने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत से मतदान तथा उसके बाद संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्य देशों द्वारा अनुसमर्थन (ratification) आवश्यक है। 2. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कोई भी स्थायी सदस्य अनुसमर्थन से इनकार करके अकेले ही किसी संशोधन को प्रभावी होने से रोक सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1
B: केवल 2
C: 1 व 2 दोनों
D: कोई नहीं
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 के अनुसार, संशोधनों को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दो-तिहाई बहुमत से अपनाया जाना आवश्यक है और इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्य देशों द्वारा उनका अनुसमर्थन (ratification) किया जाना आवश्यक है।
कथन 2 सही है: अनुसमर्थन की प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद के सभी स्थायी सदस्यों (P5) की स्वीकृति स्पष्ट रूप से आवश्यक होती है। यदि एक भी स्थायी सदस्य संशोधन का अनुसमर्थन नहीं करता है, तो वह संशोधन प्रभावी नहीं हो सकता, जिससे चार्टर में सुधारों पर उन्हें प्रभावी रूप से निर्णायक वीटो प्राप्त हो जाता है।
Q5:
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है। 2. यह कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है। 3. इसे खाद्य पदार्थों के लिए विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है: FSSAI एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है, जिसकी स्थापना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत की गई है। इस अधिनियम ने खाद्य मिलावट निवारण अधिनियम, 1954 जैसे विभिन्न पुराने कानूनों को एकीकृत किया।
कथन 2 गलत है: FSSAI भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत कार्य करता है, न कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के।
कथन 3 सही है: FSSAI के प्रमुख वैधानिक कार्यों में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात के लिए विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करना शामिल है, ताकि खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।