होम > Daily-mcqs

Daily-mcqs 26 Feb 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 26 Feb 2026

image
यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

भारत में किसी राज्य का नाम बदलने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   संविधान के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी राज्य का नाम परिवर्तित करने की शक्ति संसद में निहित है।

2.   संबंधित राज्य विधानमंडल की इस विधेयक पर दी गई राय संसद पर बाध्यकारी होती है।

3.   किसी राज्य का नाम बदलने के लिए अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संवैधानिक संशोधन आवश्यक होता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही
Constitution of India
का अनुच्छेद 3 संसद को नए राज्यों के गठन, राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन तथा मौजूदा राज्यों के नाम बदलने की शक्ति प्रदान करता है।


कथन 2 – गलत
राज्य विधानमंडल द्वारा व्यक्त की गई राय संसद पर बाध्यकारी नहीं होती। संसद उसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है।


कथन 3 – गलत
किसी राज्य का नाम बदलने के लिए अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती।
यह परिवर्तन साधारण बहुमत से पारित विधि द्वारा किया जाता है, जिसके पश्चात अनुच्छेद 4 के अनुसार प्रथम एवं चतुर्थ अनुसूची में आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।


                            

Q2:

किसी राज्य का नाम बदलने की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरणों पर विचार कीजिए:

1.   राष्ट्रपति की अनुशंसा

2.   संसद में विधेयक का प्रस्तुतीकरण

3.   संबंधित राज्य विधानमंडल को विधेयक संदर्भित करना

4.   राज्य विधानमंडल द्वारा प्रस्ताव पारित करना

निम्नलिखित में से सही क्रम कौन-सा है?

A: 4 – 1 – 3 – 2

B: 4 – 3 – 1 – 2

C: 1 – 4 – 3 – 2

D: 3 – 4 – 1 – 2

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

Constitution of India के अनुच्छेद 3 के अंतर्गत सही क्रम इस प्रकार है:



  1. राज्य विधानमंडल प्रस्ताव पारित करता है (यह एक राजनीतिक परंपरा है, यद्यपि संविधान में अनिवार्य नहीं है)

  2. राष्ट्रपति विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने की अनुशंसा करते हैं।

  3. विधेयक को संबंधित राज्य विधानमंडल के समक्ष उसकी राय प्राप्त करने हेतु भेजा जाता है।

  4. तत्पश्चात विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जाता है और साधारण बहुमत से पारित किया जाता है।


                            

Q3:

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह केंद्र सरकार को संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, राज्य की सुरक्षा, लोक व्यवस्था या शालीनता के हित में ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने की शक्ति प्रदान करता है।

2.   धारा 69A के अंतर्गत आदेश केवल सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व स्वीकृति के बाद ही जारी किए जा सकते हैं।

3.   इस प्रावधान को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संवैधानिक रूप से वैध ठहराया गया है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही
Information Technology Act, 2000
की धारा 69A केंद्र सरकार को यह अधिकार देती है कि वह निर्दिष्ट परिस्थितियों में मध्यस्थों/इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को सामग्री अवरुद्ध करने का निर्देश दे सके।


कथन 2 – गलत
सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व स्वीकृति आवश्यक नहीं है। अवरोधन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार कार्यपालिका द्वारा की जाती है।


कथन 3 – सही
Shreya Singhal v. Union of India
मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 69A की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जबकि धारा 66A को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।


                            

Q4:

भारत में सेफ हार्बर” (Safe Harbour) संरक्षण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के अंतर्गत प्रदान किया गया है।

2.   यदि मध्यस्थ (Intermediaries) धारा 69A के अंतर्गत सरकार के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो वे सेफ हार्बर संरक्षण खो देते हैं।

3.   सेफ हार्बर सभी दीवानी और आपराधिक दायित्वों से पूर्ण (अप्रतिबंधित) प्रतिरक्षा प्रदान करता है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही
Information Technology Act, 2000
की धारा 79 मध्यस्थों को तृतीय-पक्ष (third-party) सामग्री के संबंध में सेफ हार्बर संरक्षण प्रदान करती है।


कथन 2 – सही
यदि मध्यस्थ सरकार के अवरोधन आदेशों (धारा 69A) या आवश्यक सावधानी (due diligence) मानकों का पालन नहीं करते हैं, तो वे सेफ हार्बर संरक्षण खो सकते हैं।


कथन 3 – गलत
सेफ हार्बर संरक्षण पूर्ण नहीं, बल्कि शर्तों पर आधारित (conditional) है। यह केवल तभी लागू होता है जब मध्यस्थ निर्धारित सावधानी मानकों का पालन करते हैं।


                            

Q5:

सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 निम्नलिखित में से किसका प्रावधान करते हैं?

1.   ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए त्रिस्तरीय स्व-नियामक तंत्र

2.   आयु-आधारित अनिवार्य सामग्री वर्गीकरण।

3.   केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) द्वारा ओटीटी सामग्री की पूर्ण पूर्व-सेंसरशिप।

नीचे दिए गए कूट का उपयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: केवल 1 और 2

B: केवल 2

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही
Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021
के अंतर्गत एक त्रिस्तरीय स्व-नियामक तंत्र स्थापित किया गया है:



  • स्तर I: प्रकाशक द्वारा स्व-नियमन

  • स्तर II: स्व-नियामक निकाय

  • स्तर III: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B) द्वारा पर्यवेक्षण


कथन 2 – सही
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को सामग्री का वर्गीकरण U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+ तथा A श्रेणियों में करना अनिवार्य है, साथ ही अभिभावकीय नियंत्रण और आयु सत्यापन की व्यवस्था भी करनी होती है।


कथन 3 – गलत
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की पूर्व-सेंसरशिप के अधीन नहीं हैं। वे आईटी नियम, 2021 के अंतर्गत स्व-नियमन प्रणाली का पालन करते हैं।