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Daily-mcqs 25 Jul 2026
Q1:
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty - IWT), 1960 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संधि के तहत सिंधु नदी तंत्र की सभी नदियों का जल भारत और पाकिस्तान के बीच समान रूप से विभाजित किया गया है। 2. संधि के तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलुज) के जल के असीमित उपयोग का अधिकार दिया गया। 3. पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम और चिनाब) आवंटित की गईं, जबकि भारत को घरेलू उपयोग, कृषि तथा रन-ऑफ-द-रिवर (Run-of-the-River) जलविद्युत परियोजनाओं के लिए सीमित अधिकार प्राप्त हैं। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है।
संधि के तहत जल का समान (50-50) विभाजन नहीं किया गया। इसके बजाय, तीन पूर्वी नदियाँ पूर्णतः भारत को तथा तीन पश्चिमी नदियाँ मुख्यतः पाकिस्तान को आवंटित की गईं। इस व्यवस्था के अनुसार, सिंधु नदी तंत्र के कुल जल का लगभग 80% पाकिस्तान को तथा लगभग 20% भारत को प्राप्त हुआ।
कथन 2 सही है।
संधि के अनुच्छेद II (Article II) के अनुसार, पूर्वी नदियाँ—रावी, ब्यास और सतलुज—का जल भारत को असीमित उपयोग के लिए आवंटित किया गया।
कथन 3 सही है।
संधि के अनुच्छेद III (Article III) के अनुसार, पश्चिमी नदियाँ—सिंधु, झेलम और चिनाब—मुख्यतः पाकिस्तान को आवंटित की गईं। हालांकि, संधि भारत को इन नदियों के जल का घरेलू उपयोग, सीमित कृषि उपयोग तथा रन-ऑफ-द-रिवर (ROR) जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण एवं संचालन के लिए कुछ सीमित अधिकार प्रदान करती है।
Q2:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों ढाँचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. SNFAs, चूककर्ता (डिफॉल्टर) उधारकर्ताओं से बैंकों द्वारा अधिग्रहित चल (Movable) तथा अचल (Immovable) दोनों प्रकार की संपत्तियों की एक श्रेणी है। 2. बैंकों को किसी ऋण खाते के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (Non-Performing Asset - NPA) घोषित होने से पहले भी SNFAs अधिग्रहित करने की अनुमति है। 3. इस ढाँचे के तहत, बैंकों को पुनः कब्जे में ली गई संपत्तियों को मूल उधारकर्ता या उससे संबंधित पक्षों को बेचने की सख्त मनाही है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है।
निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियाँ (SNFAs) केवल अचल संपत्तियाँ (जैसे आवासीय भवन, वाणिज्यिक संपत्तियाँ और गोदाम) होती हैं, जिन्हें ऋण के पूर्ण या आंशिक निपटान के रूप में बैंकों को हस्तांतरित किया जाता है। चल संपत्तियाँ इस श्रेणी में शामिल नहीं होतीं।
कथन 2 गलत है।
बैंकों को SNFAs केवल तब अधिग्रहित करने की अनुमति होती है जब उधारकर्ता का ऋण खाता NPA घोषित हो चुका हो। यह सामान्य कानूनी या संविदात्मक वसूली के उपायों के विफल होने पर अंतिम वसूली तंत्र (Final Recovery Mechanism) के रूप में कार्य करता है।
कथन 3 सही है।
दुरुपयोग रोकने, सुशासन (Governance) को मजबूत करने तथा पूर्व प्रवर्तकों (Promoters) को कम कीमत पर पुनः संपत्ति प्राप्त करने से रोकने के लिए, RBI ने बैंकों को पुनः कब्जे में ली गई SNFA संपत्तियों को मूल उधारकर्ता या उससे संबंधित पक्षों को बेचने पर सख्त प्रतिबंध लगाया है।
Q3:
नई निर्दिष्ट गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों (SFNA)तथा बैंकिंग वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित किए जाने से पहले, उसे बकाया दिनों (Overdue Days) की संख्या के आधार पर विशेष उल्लेख खाते (Special Mention Account - SMA) के अंतर्गत निगरानी में रखा जाता है। 2. SNFAs बैंक के सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (Gross NPAs) का एक प्रमुख भाग होते हैं और इन्हें तनावग्रस्त ऋण परिसंपत्तियों (Distressed Loan Assets) के साथ रिपोर्ट किया जाता है। 3. एक बार अधिग्रहित होने के बाद, SNFAs का निपटान सामान्यतः SARFAESI अधिनियम, 2002 के सिद्धांतों का पालन करते हुए मुख्य रूप से सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) के माध्यम से किया जाना आवश्यक है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है।
किसी ऋण के NPA बनने से पहले उसमें वित्तीय तनाव (Financial Stress) के प्रारंभिक संकेत दिखाई देते हैं। ऐसे ऋणों की निगरानी विशेष उल्लेख खाते (Special Mention Accounts - SMA) के अंतर्गत की जाती है:
यदि ऋण 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहता है, तो उसे गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित कर दिया जाता है।
कथन 2 गलत है।
SNFAs, सकल (Gross) या शुद्ध (Net) NPA का हिस्सा नहीं होते। जब बैंक अपने दावे की संतुष्टि (Satisfaction of Claims) के लिए इन अचल संपत्तियों का अधिग्रहण करता है, तो इन्हें बैंक की बैलेंस शीट में "दावों की संतुष्टि हेतु अधिग्रहित गैर-बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (Non-Banking Assets Acquired in Satisfaction of Claims)" शीर्षक के अंतर्गत अलग से दर्शाया जाता है।
कथन 3 सही है।
SNFAs के पारदर्शी और एकरूप निपटान (Transparent and Uniform Disposal) को सुनिश्चित करने के लिए, RBI ने निर्देश दिया है कि इनका निपटान मुख्य रूप से सार्वजनिक नीलामी (Public Auction) के माध्यम से किया जाए तथा इस प्रक्रिया में SARFAESI अधिनियम, 2002 में निर्धारित सिद्धांतों एवं प्रक्रियाओं का पालन किया जाए।
Q4:
कुकरैल नाइट सफारी एवं डे ज़ू परियोजना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह भारत की पहली नाइट सफारी तथा विश्व की पाँचवीं ऐसी सुविधा होगी। 2. यह परियोजना कुकरैल आरक्षित वन (Kukrail Reserve Forest) के भीतर स्थित है, जिसे 1950 के दशक में एक वृक्षारोपण वन (Plantation Forest) के रूप में विकसित किया गया था। 3. कुकरैल आरक्षित वन से होकर बहने वाली कुकरैल धारा (Kukrail Stream) गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है।
सर्वोच्च न्यायालय ने ₹1,510 करोड़ की इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है, जिससे लखनऊ में भारत की पहली शहरी नाइट सफारी (Urban Night Safari) के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह विश्व की पाँचवीं ऐसी सुविधा होगी। इससे पहले इस प्रकार की नाइट सफारी सिंगापुर, थाईलैंड, चीन और इंडोनेशिया में स्थापित की जा चुकी हैं।
कथन 2 सही है।
यह परियोजना 2,027 हेक्टेयर (लगभग 5,000 एकड़) क्षेत्रफल वाले कुकरैल आरक्षित वन के भीतर 855 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी। इस आरक्षित वन को 1950 के दशक में एक वृक्षारोपण वन (Plantation Forest) के रूप में विकसित किया गया था और आज यह लखनऊ के सबसे बड़े हरित क्षेत्रों (Green Spaces) में से एक है।
कथन 3 गलत है।
कुकरैल धारा (Kukrail Stream) गोमती नदी की एक सहायक नदी है, गंगा नदी की नहीं। जबकि गोमती नदी स्वयं गंगा नदी की बाएँ तट (Left-bank) की सहायक नदी है।
Q5:
डिस्लिपिडिमिया (Dyslipidemia) तथा हालिया ICMR-INDIAB सर्वेक्षण के निष्कर्षों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय वयस्कों में उच्च घनत्व लिपोप्रोटीन (High-Density Lipoprotein - HDL) कोलेस्ट्रॉल का निम्न स्तर (Low HDL) सबसे अधिक पाया जाने वाला लिपिड विकार है। 2. सर्वेक्षण के अनुसार, असामान्य लिपिड स्तर केवल मोटापा (Obesity) और मधुमेह (Diabetes) जैसे उपापचयी (Metabolic) विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों तक ही सीमित हैं। 3. डिस्लिपिडिमिया की विशेषता उच्च LDL, निम्न HDL, उच्च ट्राइग्लिसराइड (Triglycerides) तथा कुल कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol) के बढ़े हुए स्तर से होती है। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है।
अध्ययन में पाया गया कि HDL ("अच्छा कोलेस्ट्रॉल") का निम्न स्तर भारतीय वयस्कों में सबसे अधिक पाया जाने वाला लिपिड विकार (Lipid Abnormality) है।
कथन 2 गलत है।
यह सर्वेक्षण इस धारणा को चुनौती देता है कि केवल मोटापा या मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों में ही असामान्य लिपिड स्तर पाए जाते हैं। अध्ययन के अनुसार, लगभग 35.5 करोड़ भारतीय, जिनका शरीर का वजन और रक्तचाप सामान्य है, उनमें भी असामान्य लिपिड स्तर पाए गए।
कथन 3 सही है।
डिस्लिपिडिमिया (Dyslipidemia) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें LDL ("खराब कोलेस्ट्रॉल") का उच्च स्तर, HDL ("अच्छा कोलेस्ट्रॉल") का निम्न स्तर, ट्राइग्लिसराइड का उच्च स्तर तथा कुल कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर पाया जाता है।
Q6:
INS मालवन और माहे-श्रेणी (Mahe-class) एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. INS मालवन स्वदेशी रूप से डिज़ाइन एवं निर्मित माहे-श्रेणी ASW-SWC का दूसरा पोत है, जिसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है। 2. माहे-श्रेणी का मुख्य उद्देश्य उथले तटीय जल क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare - ASW) है, साथ ही यह माइन युद्ध (Mine Warfare) तथा खोज एवं बचाव (Search and Rescue - SAR) अभियानों में भी सक्षम है। 3. INS मालवन का निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा किया गया है। 4. पोत के क्रेस्ट (Crest) पर वाघ नख (Wagh Nakh) का प्रतीक अंकित है, जो साहस, गुप्तता (Stealth), फुर्ती (Agility) तथा निर्णायक कार्रवाई (Decisive Action) का प्रतीक है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 4
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही:
INS मालवन, माहे-श्रेणी ASW-SWC का दूसरा पोत है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत (Aatmanirbhar Bharat) पहल को सुदृढ़ करता है।
कथन 2 – सही:
माहे-श्रेणी के पोतों को विशेष रूप से उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी युद्ध (ASW) के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसके अतिरिक्त ये अंडरवाटर सर्विलांस (Underwater Surveillance), माइन युद्ध (Mine Warfare), तटीय गश्त (Coastal Patrol) तथा खोज एवं बचाव (Search and Rescue - SAR) अभियानों में भी सक्षम हैं।
कथन 3 – गलत:
INS मालवन का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited - CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है, GRSE, कोलकाता द्वारा नहीं।
GRSE वर्तमान में अर्नाला-श्रेणी (Arnala-class) ASW-SWC पोतों का निर्माण कर रहा है।
कथन 4 – सही:
INS मालवन के क्रेस्ट पर अंकित वाघ नख (बाघ का पंजा), छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का प्रतीक है। यह साहस, गुप्तता, फुर्ती और निर्णायक कार्रवाई का प्रतिनिधित्व करता है तथा पोत के आदर्श वाक्य "Silent Claws" (मौन पंजे) के अनुरूप है।
Q7:
माहे-श्रेणी (Mahe-class) एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) के रणनीतिक महत्व की सही व्याख्या निम्नलिखित में से कौन-सी है? 1. ये पोत 2017 से 2025 के बीच सेवामुक्त (Decommissioned) की गई अभय-श्रेणी (Abhay-class) कॉर्वेट्स का स्थान लेने के लिए विकसित किए गए हैं। 2. इन्हें बंदरगाहों, नौसैनिक अड्डों, अपतटीय (Offshore) ऊर्जा परिसंपत्तियों तथा समुद्री संचार मार्गों (Sea Lines of Communication - SLOCs) की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है। 3. ये पोत भारत के तटीय रडार नेटवर्क तथा समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness - MDA) प्रणाली से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। 4. इनमें डीजल इंजन एवं वॉटर-जेट प्रणोदन (Diesel-Waterjet Propulsion) प्रणाली का उपयोग किया गया है, जो कम ध्वनि (Low Noise) के साथ संचालन सुनिश्चित करती है और पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए उपयुक्त है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,2 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही:
माहे-श्रेणी के ASW-SWC पोतों को अभय-श्रेणी कॉर्वेट्स के स्थान पर शामिल किया जा रहा है, जिससे भारत की उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी-रोधी युद्ध (Shallow Water ASW) क्षमता का आधुनिकीकरण हो सके।
कथन 2 – सही:
ये पोत बंदरगाहों, नौसैनिक अड्डों, अपतटीय ऊर्जा प्रतिष्ठानों तथा समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region - IOR) में इनका रणनीतिक महत्व अत्यधिक है।
कथन 3 – गलत:
ये पोत भारत के तटीय रडार नेटवर्क, अंडरवाटर सेंसर, तथा समुद्री गश्ती विमानों (Maritime Patrol Aircraft) के साथ एकीकृत (Integrated) होकर कार्य करते हैं। इससे भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness - MDA) और अधिक मजबूत होती है; ये इन प्रणालियों से स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं करते।
कथन 4 – सही:
इन पोतों में डीजल इंजन के साथ वॉटर-जेट प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे इनकी ध्वनिक पहचान (Acoustic Signature) कम होती है तथा गतिशीलता (Manoeuvrability) बढ़ती है। यह विशेषता पनडुब्बी-रोधी अभियानों (ASW Operations) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q8:
WHO के AWaRe (Access, Watch, Reserve) एंटीबायोटिक वर्गीकरण तथा भारत पर हाल ही में प्रकाशित The Lancet Public Health अध्ययन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. Access श्रेणी की एंटीबायोटिक्स सामान्य जीवाणु (बैक्टीरियल) संक्रमणों के लिए प्रथम-पंक्ति (First-line) उपचार के रूप में अनुशंसित हैं तथा इनमें प्रतिजैविक प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance - AMR) को बढ़ावा देने का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है। 2. Watch श्रेणी की एंटीबायोटिक्स व्यापक प्रभाव (Broad-spectrum) वाली होती हैं और इन्हें केवल विशिष्ट संक्रमणों के उपचार के लिए ही उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि इनमें प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) उत्पन्न करने की संभावना अधिक होती है। 3. Reserve श्रेणी की एंटीबायोटिक्स बहु-दवा प्रतिरोधी (Multidrug-Resistant, MDR) संक्रमणों के उपचार के लिए अंतिम विकल्प (Last-resort) के रूप में प्रयुक्त की जाती हैं। 4. The Lancet के अध्ययन के अनुसार, WHO के AWaRe ढाँचे द्वारा अनुशंसित स्तर की तुलना में भारत में Access श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का उपयोग अधिक अनुपात में किया जाता है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 – सही:
Access श्रेणी में वे एंटीबायोटिक्स शामिल हैं जो सामान्य बैक्टीरियल संक्रमणों के उपचार के लिए प्रथम-पंक्ति (First-line) दवाएँ हैं। इनमें प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) विकसित होने का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है। WHO इनके उपयोग को बढ़ावा देने की अनुशंसा करता है ताकि एंटीबायोटिक्स का तर्कसंगत (Rational) उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
कथन 2 – सही:
Watch श्रेणी में मुख्यतः व्यापक प्रभाव (Broad-spectrum) वाली एंटीबायोटिक्स शामिल हैं। इनका उपयोग केवल विशिष्ट संक्रमणों में किया जाना चाहिए क्योंकि इनके अत्यधिक या अनावश्यक उपयोग से प्रतिजैविक प्रतिरोध (AMR) तेजी से बढ़ता है।
कथन 3 – सही:
Reserve श्रेणी की एंटीबायोटिक्स अंतिम विकल्प (Last-resort) की दवाएँ हैं। इनका उपयोग तब किया जाता है जब अन्य एंटीबायोटिक्स प्रभावी नहीं रहतीं, विशेषकर बहु-दवा प्रतिरोधी (MDR) संक्रमणों के उपचार में।
कथन 4 – गलत:
The Lancet Public Health अध्ययन में इसके विपरीत निष्कर्ष सामने आया। भारत में कुल एंटीबायोटिक खपत का केवल 27% हिस्सा Access श्रेणी का है, जबकि अनुमानित आवश्यकता 52.3% है। अर्थात, भारत में Access एंटीबायोटिक्स का उपयोग अनुशंसित स्तर से कम है तथा Watch श्रेणी की एंटीबायोटिक्स का अपेक्षाकृत अधिक उपयोग किया जाता है।
Q9:
भारत के पवन ऊर्जा (Wind Power) क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 30 जून 2026 तक भारत की स्थापित (Installed) पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट (MW) थी। 2. ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक संचयी (Cumulative) पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता के आधार पर भारत का विश्व में चौथा स्थान था। 3. राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (National Institute of Wind Energy - NIWE) के अनुसार, 120 मीटर हब ऊँचाई (Hub Height) पर भारत की अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता 695.5 गीगावाट (GW) है। 4. वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य में पवन ऊर्जा का योगदान कम-से-कम 140 गीगावाट होने की अपेक्षा है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1,3 और 4
C: केवल 1,2 और 3
D: 1, 2, 3 और 4
उत्तर: D
स्पष्टीकरण:
30 जून 2026 तक भारत की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 57,443 मेगावाट (57.44 गीगावाट) थी। पवन ऊर्जा भारत के प्रमुख नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा स्रोतों में से एक है।
GWEC रिपोर्ट 2026 के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक संचयी पवन ऊर्जा स्थापित क्षमता के आधार पर भारत विश्व में चौथे स्थान पर था। भारत से आगे चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और जर्मनी थे।
राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (NIWE) के अनुसार, 120 मीटर हब ऊँचाई पर भारत की अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता 695.5 गीगावाट है।
भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं (Climate Commitments) के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य में पवन ऊर्जा से कम-से-कम 140 गीगावाट का योगदान अपेक्षित है।