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Daily-mcqs 21 Aug 2026
Q1:
निम्नलिखित कथनों पर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) और हाल के संस्थागत सुधार उपायों के संदर्भ में विचार कीजिए: 1. NTA एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसकी स्थापना संसद के एक विशिष्ट अधिनियम के तहत उच्च-दांव वाली राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएँ आयोजित करने के लिए की गई है। 2. के. राधाकृष्णन समिति का गठन NTA की संरचनात्मक कमजोरियों, डेटा सुरक्षा और प्रणालीगत सुधारों की समीक्षा करने के लिए किया गया था। 3. नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय कार्यबल का गठन सार्वजनिक परीक्षाओं में उन्नत तकनीक, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना और छेड़छाड़-रोधी लॉजिस्टिक्स को एकीकृत करने के लिए किया गया । उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की स्थापना वर्ष 2017 में एक स्वायत्त और आत्मनिर्भर प्रमुख परीक्षा संस्था के रूप में की गई थी। हालाँकि, इसे संसद के किसी प्रत्यक्ष अधिनियम के माध्यम से स्थापित नहीं किया गया था, बल्कि Societies Registration Act, 1860 के तहत एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में गठित किया गया था। इसलिए यह एक गैर-वैधानिक निकाय (Non-Statutory Body) है।
कथन 2 सही है:
परीक्षाओं में विवादों और पेपर लीक जैसी घटनाओं (जैसे NEET-UG) के बाद, शिक्षा मंत्रालय ने NTA की संरचना, पारदर्शिता और परीक्षा प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा के लिए पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया।
कथन 3 सही है:
सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय कार्यबल गठित किया। इसका उद्देश्य मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure), एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन और अगली पीढ़ी के साइबर सुरक्षा ढाँचे का उपयोग करके परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है।
Q2:
भारत में बहुविवाह (Polygamy) के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 कुछ वैधानिक अपवादों के अधीन द्विविवाह (Bigamy) के लिए दंड का प्रावधान करती है। 2. सरला मुद्गल बनाम भारत संघ (1995) मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह को सीधे तौर पर असंवैधानिक घोषित कर दिया था। 3. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आँकड़ों के अनुसार, एक से अधिक विवाह की प्रथा केवल मुस्लिम समुदाय तक सीमित है और भारत के अन्य धार्मिक समूहों में इसका कोई अस्तित्व नहीं है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82 पति या पत्नी के जीवित रहते पुनः विवाह करने अर्थात द्विविवाह (Bigamy) से संबंधित है। इसमें कुछ वैधानिक शर्तों और अपवादों के अधीन अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है।
कथन 2 गलत है:
सरला मुद्गल बनाम भारत संघ (1995) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि कोई हिंदू पति केवल दूसरी शादी करने के उद्देश्य से इस्लाम धर्म स्वीकार नहीं कर सकता, जबकि उसकी पहली शादी अभी वैध है।
हालाँकि, इस निर्णय में न्यायालय ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बहुविवाह को सीधे तौर पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया था। निर्णय का मुख्य केंद्र पहली शादी के रहते द्विविवाह के कानून से बचने के लिए धोखाधड़ीपूर्ण धर्मांतरण का मुद्दा था।
कथन 3 गलत है:
NFHS-5 (2019–21) के आँकड़े बताते हैं कि एक से अधिक विवाह की प्रथा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। सर्वेक्षण के अनुसार, कई विवाहों की प्रचलित दर लगभग:
इससे स्पष्ट होता है कि यह प्रथा भारत के विभिन्न धार्मिक समुदायों में पाई जाती है, न कि केवल मुस्लिम समुदाय में।
Q3:
भारत में व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) और समानता से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों तथा न्यायिक विमर्श के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के संविधान का अनुच्छेद 44 भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code—UCC) का प्रावधान करता है। 2. अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार पूर्ण (Absolute) है। 3. विवाह और तलाक भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (Concurrent List) की प्रविष्टि 5 (Entry 5) के अंतर्गत आते हैं। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
अनुच्छेद 44 संविधान के भाग IV में निहित राज्य के नीति-निर्देशक तत्व (Directive Principles of State Policy—DPSP) का हिस्सा है। इसमें कहा गया है कि राज्य भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
कथन 2 गलत है:
अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता तथा धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। हालाँकि, यह अधिकार पूर्ण नहीं है। संविधान के अनुसार, यह लोक व्यवस्था (Public Order), सदाचार (Morality), स्वास्थ्य (Health) तथा संविधान के भाग III में निहित अन्य मौलिक अधिकारों के अधीन है।
कथन 3 सही है:
विवाह और तलाक, साथ ही शिशु एवं नाबालिग, दत्तक ग्रहण, वसीयत, निर्वसीयतता (Intestacy) और उत्तराधिकार आदि विषय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (List III) की प्रविष्टि 5 के अंतर्गत आते हैं। इसका अर्थ है कि इन विषयों पर संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं।
Q4:
दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार (Rights of Persons with Disabilities—RPwD) अधिनियम, 2016 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसने दिव्यांग व्यक्तियों (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 का स्थान लिया और मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया। 2. यह बेंचमार्क दिव्यांगता (Benchmark Disabilities) वाले व्यक्तियों के लिए सरकारी रोजगार में 5% आरक्षण का प्रावधान करता है। 3. यह अधिनियम संयुक्त राष्ट्र दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर कन्वेंशन (UNCRPD) के तहत भारत के दायित्वों के अनुरूप है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
RPwD अधिनियम, 2016 ने पुराने दिव्यांग व्यक्तियों (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 का स्थान लिया। इसने निर्दिष्ट दिव्यांगताओं की श्रेणियों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया।
कथन 2 गलत है:
यह अधिनियम बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए सरकारी रोजगार में कम से कम 4% आरक्षण का प्रावधान करता है, न कि 5%।
हालाँकि, उच्च शिक्षण संस्थानों में कम से कम 5% आरक्षण का प्रावधान है।
कथन 3 सही है:
यह कानून संयुक्त राष्ट्र दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर कन्वेंशन (UNCRPD) के तहत भारत के दायित्वों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाया गया था। इसने दिव्यांगता के प्रति दृष्टिकोण को दान/कल्याण-आधारित मॉडल से अधिकार-आधारित मॉडल की ओर स्थानांतरित किया।