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Daily-mcqs 19 Sep 2026
Q1:
हाल ही में समाचारों में देखी गई Leopardus tilcayo के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह एक नई पहचान की गई जंगली बिल्ली की प्रजाति है, जो बोलीविया के क्लाउड फॉरेस्ट की मूल निवासी है। 2. यह Leopardus वंश से संबंधित है और आकार एवं वजन में एक औसत घरेलू बिल्ली से बड़ी है। 3. इसकी विकासवादी वंशावली (evolutionary lineage) अन्य संबंधित टाइगर कैट्स से लगभग 14 लाख वर्ष पहले अलग हो गई थी। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
वैज्ञानिकों ने Leopardus tilcayo को बोलीविया के हरे-भरे पर्वतीय युंगास (Yungas) क्लाउड फॉरेस्ट में एक नई जंगली बिल्ली की प्रजाति के रूप में औपचारिक रूप से पहचान दी है। यह एक सदी से भी अधिक समय में औपचारिक रूप से वर्णित की गई पहली जीवित बिल्ली प्रजाति है।
कथन 2 गलत है:
टिल्कायो (Tilcayo) एक छोटी जंगली बिल्ली है, जिसकी लंबाई लगभग 46 सेंटीमीटर और वजन लगभग 1.4 से 2 किलोग्राम (लगभग 3 से 4 पाउंड) होता है। इसलिए यह औसत घरेलू बिल्ली से बड़ी नहीं, बल्कि छोटी है।
कथन 3 सही है:
आनुवंशिक (genetic) और जीनोमिक (genomic) विश्लेषणों के माध्यम से शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि Leopardus tilcayo एक अलग विकासवादी वंशावली का प्रतिनिधित्व करती है, जो अन्य संबंधित दक्षिण अमेरिकी टाइगर कैट्स से लगभग 14 लाख वर्ष पहले अलग हुई थी।
Q2:
पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान, आनुवंशिक संसाधन और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर तीसरे BIMSTEC सम्मेलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका समापन गोवा में हुआ और इसका आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा किया गया था। 2. BIMSTEC के केवल कुछ चुनिंदा दक्षिण एशियाई सदस्य देशों ने विचार-विमर्श में भाग लिया। 3. सम्मेलन के परिणामस्वरूप ‘गोवा निष्कर्ष (Goa Conclusions)’ सामने आए, जिनमें संस्थागत नीति सहयोग, मानक (Standards) और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 1 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 17 सितंबर 2026 को गोवा में हुआ। इसका आयोजन भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा किया गया था। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), गोवा ने नोडल संस्थान के रूप में कार्य किया।
कथन 2 गलत है:
सम्मेलन में BIMSTEC के सभी सात सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। ये देश हैं—बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड। इसलिए यह कहना गलत है कि केवल कुछ चुनिंदा देशों ने भाग लिया।
कथन 3 सही है:
सम्मेलन के साथ आयोजित दूसरी BIMSTEC नोडल ग्रुप बैठक में सहयोग के चार प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके परिणामस्वरूप ‘गोवा निष्कर्ष (Goa Conclusions)’ पर सहमति बनी, जिसने पारंपरिक ज्ञान, व्यापार और मानकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक रोडमैप प्रदान किया।
Q3:
बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल (BIMSTEC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. BIMSTEC की स्थापना 1997 में बैंकॉक घोषणा (Bangkok Declaration) के माध्यम से हुई थी। 2. यह भारत की “पड़ोसी प्रथम (Neighbourhood First)” नीति को “एक्ट ईस्ट (Act East)” नीति से जोड़ने वाले एक रणनीतिक सेतु के रूप में कार्य करता है। 3. WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन (WHO Global Centre for Traditional Medicine) ढाका, बांग्लादेश में स्थित है और क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के मुख्यालय के रूप में कार्य करता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: A
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा (Bangkok Declaration) को अपनाने के माध्यम से हुई थी। इसका स्थायी सचिवालय ढाका, बांग्लादेश में स्थित है।
कथन 2 सही है:
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से BIMSTEC दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक सेतु का कार्य करता है। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण साझा मंच है, जो “पड़ोसी प्रथम (Neighbourhood First)” पहल को “एक्ट ईस्ट (Act East)” नीति के साथ जोड़ता है। इसके अतिरिक्त, कलादान परियोजना (Kaladan Project) और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग (India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway) जैसी सीमा-पार संपर्क परियोजनाएँ इस सहयोग को और मजबूत करती हैं।
कथन 3 गलत है:
WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन जामनगर, गुजरात (भारत) में स्थापित किया गया है, न कि ढाका, बांग्लादेश में। ढाका BIMSTEC के स्थायी सचिवालय का मुख्यालय है, WHO के पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का नहीं।
Q4:
निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आदेश के पैरा 15 के तहत, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी गुटों या अलग हुए गुटों के बीच उस दल का वास्तविक प्रतिनिधि होने के दावे से संबंधित विवादों का निर्णय लेने वाला एकमात्र प्राधिकरण है। 2. किसी विवाद में चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम के आवंटन के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग का निर्णय अंतरिम (Interim) होता है और इसे छह महीने के भीतर भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मान्य किया जाना आवश्यक है। 3. किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक (Interim Freeze) लगाए जाने की स्थिति में, प्रतिद्वंद्वी गुट मूल चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं कर सकते और उन्हें भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए ‘मुक्त (Free)’ चुनाव चिह्नों की सूची में से किसी चिह्न का चयन करना होता है। उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 1 और 3
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 सही है:
निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल में विभाजन (Split) या विलय (Merger) से संबंधित विवादों पर निर्णय लेने का विशेष अधिकार प्राप्त है। ऐसे संगठनात्मक विवादों में ECI निर्णय लेने वाला प्रमुख/एकमात्र प्राधिकरण है।
कथन 2 गलत है:
पैरा 15 के तहत ECI द्वारा दिए गए निर्णय बाध्यकारी और अंतिम होते हैं, हालांकि वे न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन होते हैं। संबंधित पक्ष उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका (Writ Petition) या विशेष अनुमति याचिका (Special Leave Petition) के माध्यम से चुनौती दे सकते हैं। ECI के निर्णय को छह महीने के भीतर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वतः मान्य किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
कथन 3 सही है:
जब किसी आपात स्थिति या महत्वपूर्ण चुनाव के दौरान निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ECI किसी चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक (Interim Freeze) लगाता है, तो किसी भी गुट को मूल पार्टी के नाम या चुनाव चिह्न का उपयोग करने की अनुमति नहीं होती। दोनों गुटों को वैकल्पिक नाम प्रस्तावित करने होते हैं और ECI की ‘मुक्त चुनाव चिह्नों (Free Symbols)’ की सूची में उपलब्ध विकल्पों में से चुनाव चिह्न चुनना होता है।
Q5:
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 324 ECI को संसद, राज्य विधानमंडलों तथा पंचायतों और नगरपालिकाओं जैसे स्थानीय निकायों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है। 2. अनुच्छेद 325 किसी भी पात्र नागरिक को धर्म, मूलवंश (Race), जाति या लिंग के आधार पर मतदाता सूची में शामिल किए जाने से वंचित करने पर रोक लगाता है। 3. अनुच्छेद 329 न्यायालयों को चुनाव संबंधी मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकता है और यह निर्धारित करता है कि चुनाव को केवल निर्वाचन याचिका (Election Petition) के माध्यम से निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी जा सकती है। उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: C
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
अनुच्छेद 324 संसद, राज्य विधानमंडलों तथा भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों से संबंधित है। यह राज्यों में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों से संबंधित नहीं है। स्थानीय निकायों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण अलग-अलग राज्य निर्वाचन आयोगों (State Election Commissions) के पास होता है, जिनकी स्थापना क्रमशः अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत की गई है।
कथन 2 सही है:
अनुच्छेद 325 स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी व्यक्ति को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या इनमें से किसी के आधार पर मतदाता सूची में शामिल होने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, ऐसे आधारों पर किसी विशेष मतदाता सूची में शामिल किए जाने का दावा भी नहीं किया जा सकता।
कथन 3 सही है:
अनुच्छेद 329 चुनाव संबंधी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है। इसके अनुसार, संसद के किसी सदन या राज्य विधानमंडल के चुनाव को केवल निर्वाचन याचिका (Election Petition) के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। यह याचिका संबंधित विधायिका द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष और निर्धारित तरीके से प्रस्तुत की जाती है।
Q6:
भारत निर्वाचन आयोग की संरचना, कार्यकाल और सदस्यों को पद से हटाने के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान निर्वाचन आयुक्तों की संख्या को स्थायी रूप से निर्धारित करता है, जिससे 1950 में अपनी स्थापना के समय से ही निर्वाचन आयोग का बहु-सदस्यीय निकाय होना अनिवार्य था। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के पास निर्णय लेने में समान शक्तियाँ, समान वेतन और समान मतदान अधिकार होते हैं। 3. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त—दोनों को केवल संसद द्वारा महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया के माध्यम से ही पद से हटाया जा सकता है। उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
A: केवल 1 और 2
B: केवल 2
C: केवल 2 और 3
D: 1, 2, और 3
उत्तर: B
स्पष्टीकरण:
कथन 1 गलत है:
संविधान भारत निर्वाचन आयोग की सदस्य संख्या को स्थायी रूप से निर्धारित नहीं करता है। अनुच्छेद 324(2) के अनुसार, आयोग में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) तथा राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर निर्धारित संख्या में अन्य निर्वाचन आयुक्त, यदि कोई हों, शामिल हो सकते हैं। शुरुआत में यह एक-सदस्यीय निकाय था और बाद में इसे बहु-सदस्यीय निकाय बनाया गया।
कथन 2 सही है:
जब निर्वाचन आयोग बहु-सदस्यीय रूप में कार्य करता है, तब मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त समान स्तर पर कार्य करते हैं। उनके पास निर्णय लेने और मतदान के समान अधिकार होते हैं। मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन भी प्राप्त होता है।
कथन 3 गलत है:
केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) को कार्यकाल की संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है और उन्हें संसद द्वारा महाभियोग की प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
इसके विपरीत, अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए समान सुरक्षा प्राप्त नहीं है। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर पद से हटाया जा सकता है।