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Daily-mcqs 12 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 12 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए, जो अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 के अंतर्गत प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (एनटीसी) के संबंध में हैं:

1. इसे पाँच सदस्यीय निकाय के रूप में गठित करने का प्रस्ताव है, जिसमें एक अध्यक्ष, दो न्यायिक सदस्य तथा दो तकनीकी सदस्य होंगे।

2. राष्ट्रीय अधिकरण आयोग के अध्यक्ष का पद केवल वर्तमान या पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा ही धारण किया जा सकता है।

3. विधेयक में अधिकरण के सदस्यों के लिए पाँच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, की एक समान कार्यावधि निर्धारित की गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 में पाँच सदस्यीय राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (एनटीसी) की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इसमें एक अध्यक्ष, दो न्यायिक सदस्य तथा दो तकनीकी सदस्य होंगे।


कथन 2 गलत है:
विधेयक के अनुसार, आयोग का अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए। यह आवश्यक नहीं है कि अध्यक्ष वर्तमान या पूर्व भारत के मुख्य न्यायाधीश ही हों।


कथन 3 सही है:
विभिन्न अधिकरणों की व्यवस्था में संरचनात्मक एकरूपता लाने के उद्देश्य से विधेयक में सदस्यों के लिए पाँच वर्ष की निश्चित कार्यावधि या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, सदस्यों की योग्यता, वेतन तथा भत्तों में भी एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है।


 


                            

Q2:

भारत में अधिकरणों के संवैधानिक एवं विधिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. अधिकरण वर्ष 1950 में अपनाए गए भारतीय संविधान के मूल पाठ का हिस्सा थे।

2. एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि विशेष मामलों में अधिकरण उच्च न्यायालयों के अधिकार-क्षेत्र का पूर्णतः स्थान ले सकते हैं।

3. रोजर मैथ्यू (2019) सहित विभिन्न निर्णयों में सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर बल दिया कि अधिकरणों में नियुक्तियों पर कार्यपालिका का प्रभुत्व शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
अधिकरण भारतीय संविधान के मूल पाठ का हिस्सा नहीं थे। इन्हें 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 323- और 323- जोड़कर शामिल किया गया था। यह संशोधन स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।


कथन 2 गलत है:
ऐतिहासिक एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 32 के अंतर्गत तथा उच्च न्यायालयों द्वारा अनुच्छेद 226/227 के अंतर्गत न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा है। इसलिए अधिकरण केवल संवैधानिक न्यायालयों के अधिकार-क्षेत्र को पूरक कर सकते हैं, लेकिन उसे समाप्त या पूर्णतः प्रतिस्थापित नहीं कर सकते।


कथन 3 सही है:
भारत संघ बनाम आर. गांधी (2010), रोजर मैथ्यू बनाम साउथ इंडियन बैंक (2019) तथा मद्रास बार एसोसिएशन से संबंधित मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकरणों की नियुक्तियों एवं प्रशासन में न्यायिक प्रधानता, पर्याप्त कार्यकाल तथा कार्यपालिका के प्रभाव को कम करने की आवश्यकता पर लगातार बल दिया है। इसका उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत की रक्षा करना है।


                            

Q3:

बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. इसका उद्देश्य औपनिवेशिक काल के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त करके उसके स्थान पर नया कानून लागू करना है।

2. नए विधेयक के अंतर्गत बैंकर्स बुक्स की परिभाषा केवल उन भौतिक बही-खातों और जिल्दबद्ध लेखा-पुस्तकों तक सीमित है, जिन्हें बैंक की शाखाओं में रखा जाता है।

3. केंद्र सरकार को निर्धारित शर्तों के अंतर्गत इस साक्ष्य संबंधी व्यवस्था को अन्य वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं तक विस्तारित करने का अधिकार दिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 का उद्देश्य 135 वर्ष पुराने बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891 को निरस्त करके उसके स्थान पर नया कानून लागू करना है। इसका उद्देश्य आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप कानून को अद्यतन करना है।


कथन 2 गलत है:
विधेयक में बैंकर्स बुक्स की परिभाषा का व्यापक विस्तार किया गया है। यह अब केवल भौतिक बही-खातों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और आभासी रूप में रखे गए अभिलेख भी शामिल हैं। इनमें क्लाउड भंडारण, बैकअप आँकड़े तथा आपदा-पुनर्प्राप्ति प्रणालियों में सुरक्षित अभिलेख भी सम्मिलित हैं।


कथन 3 सही है:
विधेयक केंद्र सरकार को निर्धारित शर्तों के अधीन इस साक्ष्य संबंधी व्यवस्था को अन्य निर्दिष्ट वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं तक विस्तारित करने का अधिकार देता है। इससे बदलती वित्तीय एवं बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप कानून के दायरे को विस्तृत करने की सुविधा मिलती है।


                            

Q4:

बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 के अंतर्गत बैंक अधिकारियों की सुरक्षा एवं प्रमाणीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. बैंक कर्मचारियों के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य है कि वे प्रत्येक कानूनी कार्यवाही में बैंकिंग अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हों, चाहे बैंक उस वाद में पक्षकार हो या नहीं।

2. विधेयक में डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों का प्रमाणीकरण हस्तलिखित हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर तथा डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से करने की अनुमति दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: केवल 1

B: केवल 2

C: 1 व 2 दोनों

D: कोई नहीं

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:

कथन 1 गलत है:
अनावश्यक न्यायिक कार्यवाही से उत्पन्न बोझ को कम करने के लिए विधेयक बैंक कर्मचारियों को नियमित रूप से न्यायालय में बुलाए जाने से संरक्षण प्रदान करता है। यदि बैंक स्वयं विवाद में पक्षकार नहीं है, तो केवल बैंकिंग अभिलेख प्रस्तुत करने या उन्हें प्रमाणित करने के लिए बैंक कर्मचारियों को सामान्यतः व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।


हालाँकि, यदि कोई विशेष कारण मौजूद हो, जैसे अभिलेखों की सटीकता या विश्वसनीयता के संबंध में ठोस संदेह, तो न्यायालय बैंक कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने या अभिलेख प्रस्तुत करने का आदेश दे सकता है।


कथन 2 सही है:
डिजिटल अभिलेखों के लिए सटीकता, प्रामाणिकता और अखंडता के कठोर मानकों का पालन आवश्यक है। विधेयक में ऐसे अभिलेखों के प्रमाणीकरण के लिए हस्तलिखित हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर तथा डिजिटल हस्ताक्षरतीनों माध्यमों को मान्यता दी गई है।


 


 


                            

Q5:

उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण एवं क्षेत्रीय नामकरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर में विकसित होने वाले एक परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात को टाइफून (Typhoon) कहा जाता है, यदि उसकी अधिकतम निरंतर पवन गति कम से कम 74 मील प्रति घंटा हो।

2. टाइफून की प्रारंभिक घूर्णन गति कोरिओलिस बल के कारण उत्पन्न होती है। यही बल इन तूफानी प्रणालियों को भूमध्य रेखा के आसपास की पट्टी के भीतर बनने से रोकता है।

3. ऊँची ऊर्ध्वाधर पवन-कतरन एक परिपक्व टाइफून के ऊर्ध्वाधर विकास और तीव्रता को बढ़ाने वाले प्रमुख कारक के रूप में कार्य करती है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1 और 3

C: केवल 2 और 3

D: 1, 2, और 3

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:

कथन 1 सही है:
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान वर्गीकरण के अनुसार, पश्चिमी उत्तरी प्रशांत महासागर में विकसित होने वाले परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात को टाइफून कहा जाता है, जब उसकी अधिकतम निरंतर पवन गति कम से कम 74 मील प्रति घंटा (119 किमी प्रति घंटा) हो।


कथन 2 सही है:
चक्रवात के निर्माण के लिए आवश्यक प्रारंभिक घूर्णन या भंवर गति प्रदान करने में कोरिओलिस बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भूमध्य रेखा पर कोरिओलिस बल शून्य होता है तथा भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में लगभग अक्षांशों के भीतर यह अत्यंत कमजोर होता है। इसलिए उष्णकटिबंधीय चक्रवात इस भूमध्यरेखीय क्षेत्र में सामान्यतः नहीं बनते।


कथन 3 गलत है:
टाइफून के निर्माण और तीव्र होने के लिए कम ऊर्ध्वाधर पवन-कतरन आवश्यक परिस्थितियों में से एक है। अधिक ऊर्ध्वाधर पवन-कतरन के कारण ऊँचाई के साथ पवन की गति या दिशा में अत्यधिक परिवर्तन होता है। इससे चक्रवात की ऊर्ध्वाधर संरचना बाधित होती है और उसका संगठन कमजोर पड़ जाता है, जिससे उसका तीव्र होना रुक सकता है।


                            
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