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Daily-mcqs 07 Jul 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 07 Jul 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की रिपोर्ट "Labour Market Dynamics in Million-plus Cities" (PLFS 2025) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   भारत के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों (Million-plus Cities) में कार्यरत महिलाओं में नियमित वेतनभोगी (Regular Salaried) रोजगार का अनुपात, समग्र शहरी भारत की महिलाओं की तुलना में अधिक है।

2.   कार्यकर्ता जनसंख्या अनुपात (Worker Population Ratio - WPR) कुल जनसंख्या में रोज़गार प्राप्त तथा कार्य की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे बेरोज़गार व्यक्तियों के अनुपात को मापता है।

3.   नियमित वेतनभोगी रोजगार (Regular Salaried Employment) का कुल रोजगार में हिस्सा, समग्र शहरी भारत की तुलना में Million-plus Cities में अधिक है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1 और 2 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 2 और 3 केवल

D: 1, 2 और 3

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 सही है।
    रिपोर्ट के अनुसार, Million-plus Cities में कार्यरत 65.1% महिलाएँ नियमित वेतनभोगी नौकरियों में हैं, जबकि समग्र शहरी भारत में यह अनुपात 50.9% है। इससे स्पष्ट होता है कि बड़े शहरों में महिलाओं को औपचारिक (Formal) रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त हैं।

  • कथन 2 गलत है।
    यह श्रम बल भागीदारी दर (Labour Force Participation Rate - LFPR) की परिभाषा है, Worker Population Ratio (WPR) की नहीं।
    WPR
    कुल जनसंख्या में केवल कार्यरत (Employed) व्यक्तियों के अनुपात को दर्शाता है।

  • कथन 3 सही है।
    Million-plus Cities
    में कुल रोजगार का 58.5% हिस्सा नियमित वेतनभोगी रोजगार का है, जबकि समग्र शहरी भारत में यह 47.6% है। यह बड़े शहरों में रोजगार के अधिक औपचारिक (Formalised) होने का संकेत देता है।


                            

Q2:

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की रिपोर्ट "Labour Market Dynamics in Million-plus Cities" के अनुसार, भारत के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों (Million-plus Cities) में महिलाओं के रोजगार के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-से निष्कर्ष सही हैं?

1.   नियमित वेतनभोगी (Regular Salaried) रोजगार में महिलाओं का औसत वेतन, पुरुषों के औसत वेतन का लगभग 77% है।

2.   ग्रेटर मुंबई (Greater Mumbai) ने पूर्ण लैंगिक वेतन समानता (Gender Pay Parity) प्राप्त कर ली है, जहाँ महिलाएँ औसतन पुरुषों से अधिक कमाती हैं।

3.   Million-plus Cities में 30–59 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 67% महिलाएँ NEET (Not in Employment, Education or Training) अर्थात् तो रोजगार में हैं, शिक्षा में और ही किसी प्रशिक्षण में।

4.   महिलाओं की कम कार्यबल भागीदारी (Workforce Participation) का कारण केवल अपर्याप्त शैक्षिक उपलब्धि है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: 1, 2 और 3 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 1, 2 और 4 केवल

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 सही है।
    नियमित वेतनभोगी रोजगार में महिलाओं का औसत वेतन, पुरुषों के औसत वेतन का लगभग 77.2% है। यह आँकड़ा शहरी भारत तथा Million-plus Citiesदोनों में लगभग समान है, जो लैंगिक वेतन अंतर (Gender Pay Gap) के बने रहने को दर्शाता है।

  • कथन 2 गलत है।
    ग्रेटर मुंबई महानगरों में वेतन समानता के सबसे निकट है, जहाँ महिलाएँ पुरुषों के वेतन का लगभग 98.2% अर्जित करती हैं, लेकिन उनसे अधिक नहीं
    प्रयागराज, श्रीनगर, लखनऊ, पटना, मेरठ और वाराणसी जैसे शहरों में वेतन समानता प्राप्त हुई है या महिलाएँ औसतन पुरुषों से अधिक कमाती हैं।

  • कथन 3 सही है।
    Million-plus Cities
    में 30–59 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 67% महिलाएँ NEET श्रेणी में आती हैं। यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में महिलाएँ तो रोजगार में हैं, शिक्षा में और ही किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ी हुई हैं।

  • कथन 4 गलत है।
    रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की कम कार्यबल भागीदारी के पीछे केवल शिक्षा की कमी जिम्मेदार नहीं है। इसके प्रमुख कारणों में बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी, अवैतनिक घरेलू कार्य, लचीले रोजगार के अवसरों का अभाव, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मान्यताएँ तथा सुरक्षा एवं आवागमन (Mobility) संबंधी चिंताएँ शामिल हैं।


                            

Q3:

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (Global Passport Index - GPI) 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स पासपोर्टों की रैंकिंग केवल वीज़ा-मुक्त (Visa-free) तथा वीज़ा-ऑन-अराइवल (Visa-on-Arrival) यात्रा सुविधा के आधार पर करता है।

2.   इस सूचकांक में Enhanced Mobility घटक को सर्वाधिक भारांक (Weightage) दिया गया है।

3.   Investment Index तथा Quality of Living Index को समग्र रैंकिंग में समान भारांक दिया गया है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1 और 2 केवल

B: 1 और 3 केवल

C: 2 और 3 केवल

D: 1, 2 और 3

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 गलत है।
    पारंपरिक पासपोर्ट रैंकिंग के विपरीत, ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (GPI) बहुआयामी (Multidimensional) दृष्टिकोण अपनाता है। यह केवल यात्रा की स्वतंत्रता (Travel Freedom) के आधार पर ही नहीं, बल्कि निवेश के अवसर (Investment Opportunities) तथा जीवन की गुणवत्ता (Quality of Living) के आधार पर भी पासपोर्टों का मूल्यांकन करता है।

  • कथन 2 सही है।
    Enhanced Mobility
    घटक को 50% का सर्वाधिक भारांक दिया गया है। इसमें वीज़ा-मुक्त यात्रा, यात्रा की सुगमता तथा वैश्विक पहुँच (Global Access) जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है।

  • कथन 3 सही है।
    Investment Index
    तथा Quality of Living Indexदोनों को समग्र स्कोर में 25–25% का समान भारांक दिया गया है।


                            

Q4:

ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स (Global Passport Index - GPI) 2026 में भारत के प्रदर्शन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   भारत ने 197 देशों में 125वाँ स्थान प्राप्त किया।

2.   भारतीय पासपोर्ट धारकों को 26 देशों में वीज़ा-मुक्त (Visa-free) या वीज़ा-ऑन-अराइवल (Visa-on-Arrival) सुविधा प्राप्त है।

3.   Investment Index में भारत की रैंकिंग, पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हुई है।

4.   भारत का समग्र संयुक्त स्कोर (Overall Composite Score) पिछले पाँच वर्षों की तुलना में घट गया है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

A: 1, 2 और 3 केवल

B: 1, 3 और 4 केवल

C: 1, 2 और 4 केवल

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: A

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 सही है।
    ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत ने 197 देशों में 125वाँ स्थान प्राप्त किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक स्थान नीचे है।

  • कथन 2 सही है।
    भारतीय पासपोर्ट धारकों को 26 देशों में वीज़ा-मुक्त अथवा वीज़ा-ऑन-अराइवल यात्रा की सुविधा प्राप्त है। शीर्ष रैंक वाले पासपोर्टों की तुलना में यह संख्या अभी भी अपेक्षाकृत कम है।

  • कथन 3 सही है।
    Investment Index
    में भारत की रैंकिंग तीन स्थान सुधरकर 94वें स्थान पर पहुँच गई। साथ ही, Quality of Living Index में भी भारत की रैंकिंग में उल्लेखनीय सुधार होकर 118वाँ स्थान प्राप्त हुआ।

  • कथन 4 गलत है।
    भारत का समग्र संयुक्त स्कोर (Overall Composite Score) घटा नहीं, बल्कि 45.1 तक बढ़ गया, जो पिछले पाँच वर्षों का सर्वोच्च स्तर है। अर्थात, समग्र रैंक में गिरावट के बावजूद भारत के प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया।


 


                            

Q5:

पंडवानी (Pandavani) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   पंडवानी एक पारंपरिक लोक नाट्य (Folk Theatre) एवं मौखिक कथा-वाचन (Oral Storytelling) की परंपरा है, जिसका उद्भव मुख्यतः छत्तीसगढ़ में हुआ।

2.   इसमें रामायण के प्रसंगों का वर्णन किया जाता है, जिसमें विशेष रूप से भगवान राम पर बल दिया जाता है।

3.   प्रस्तोता (कलाकार) प्रदर्शन के दौरान सामान्यतः तंबूरा (एकतारा) का उपयोग एक वाद्य यंत्र तथा प्रतीकात्मक उपकरण (Symbolic Prop) दोनों के रूप में करता/करती है।

4.   तात्कालिक प्रस्तुति (Improvisation) तथा दर्शकों के साथ संवाद (Audience Interaction) पंडवानी की महत्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: 1, 2 और 3 केवल

B: 1, 3 और 4 केवल

C: 1, 2 और 4 केवल

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: B

स्पष्टीकरण:


  • कथन 1 सही है।
    पंडवानी एक प्रसिद्ध लोक नाट्य एवं मौखिक कथा-वाचन परंपरा है, जिसका उद्भव मुख्यतः छत्तीसगढ़ में हुआ। इसका प्रदर्शन मध्य प्रदेश तथा ओडिशा के कुछ क्षेत्रों में भी किया जाता है। इसमें कथा-वाचन, संगीत, नाटकीय अभिनय तथा तात्कालिक प्रस्तुति (Improvisation) का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

  • कथन 2 गलत है।
    पंडवानी रामायण पर नहीं, बल्कि महाभारत पर आधारित है। 'पंडवानी' शब्द का शाब्दिक अर्थ है'पांडवों की कथा' इसकी प्रस्तुतियों में विशेष रूप से भीम के वीरतापूर्ण प्रसंगों पर अधिक बल दिया जाता है, हालांकि महाभारत के अन्य प्रसंग भी प्रस्तुत किए जाते हैं।

  • कथन 3 सही है।
    कलाकार सामान्यतः तंबूरा (एकतारा) अपने साथ रखता/रखती है, जो केवल वाद्य यंत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक उपकरण के रूप में भी प्रयुक्त होता है। कथा-वाचन के दौरान इसे अस्त्र, रथ या अन्य वस्तुओं के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

  • कथन 4 सही है।
    लिखित पटकथा पर आधारित नाटकों के विपरीत, पंडवानी मुख्यतः मौखिक प्रस्तुति, तात्कालिक रचनात्मकता (Improvisation), भावपूर्ण अभिनय, स्वर के उतार-चढ़ाव तथा दर्शकों के साथ संवाद पर आधारित होती है। यही विशेषताएँ प्रत्येक प्रस्तुति को विशिष्ट और जीवंत बनाती हैं।


 


                            
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