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Daily-mcqs 03 Aug 2026

यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs 03 Aug 2026

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यूपीएससी और राज्य पीएससी परीक्षाओं के लिए समसामयिकी MCQs

Q1:

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   PM-KISAN एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) योजना है, जिसका पूर्ण वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा किया जाता है।

2.   पात्र किसान परिवारों को आधार-सक्षम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से प्रतिवर्ष ₹6,000 की राशि तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है।

3.   इस योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

4.   केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने इस योजना को 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने की स्वीकृति ₹3.15 लाख करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ दी है।

उपरोक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 1,2 और 4

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही: PM-KISAN एक केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector) योजना है, अर्थात इसका 100% वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।


कथन 2 – सही: पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की वित्तीय सहायता ₹2,000 की तीन समान किस्तों में आधार-सक्षम DBT प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाती है।


कथन 3 – गलत: इस योजना का क्रियान्वयन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा किया जाता हैग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा नहीं।


कथन 4 – सही: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस योजना को 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने की स्वीकृति ₹3.15 लाख करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ प्रदान की है।


                            

Q2:

PM-KISAN योजना की उपलब्धियों एवं चुनौतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 92% से अधिक लाभार्थियों ने प्राप्त वित्तीय सहायता का उपयोग कृषि गतिविधियों एवं कृषि निवेशों के लिए किया।
  2. लगभग 85% लाभार्थियों ने कृषि आय में वृद्धि तथा अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता में कमी की सूचना दी।
  3. यह योजना बटाईदार किसानों (Sharecroppers), पट्टेदार किसानों (Tenant Farmers) तथा भूमिहीन कृषि श्रमिकों को भी कवर करती है।
  4. भूमि अभिलेखों (Land Records) की अशुद्धियाँ तथा आधार-आधारित e-KYC में देरी योजना के क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 1,2 और 4

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही: विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO), नीति आयोग के अनुसार, 92% से अधिक लाभार्थियों ने PM-KISAN के अंतर्गत प्राप्त सहायता का उपयोग बीज, उर्वरक तथा अन्य कृषि आदानों (Farm Inputs) जैसे कृषि निवेशों के लिए किया।


कथन 2 – सही: लगभग 85% किसानों ने कृषि आय में वृद्धि तथा अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता में कमी की सूचना दी।


कथन 3 – गलत: यह योजना केवल पात्र भूमिधारक किसान परिवारों तक सीमित है। इसमें पट्टेदार किसान, बटाईदार किसान तथा भूमिहीन कृषि श्रमिक शामिल नहीं हैं, जिससे इन वर्गों का बहिष्करण (Exclusion) एक प्रमुख चिंता का विषय है।


कथन 4 – सही: योजना के क्रियान्वयन की प्रमुख चुनौतियों में भूमि अभिलेखों की अशुद्धियाँ, आधार-आधारित e-KYC में विलंब, तथा कृषि आदानों की बढ़ती लागत के कारण ₹6,000 की वार्षिक सहायता के वास्तविक मूल्य में कमी शामिल हैं।


                            

Q3:

स्यूटा (Ceuta) में हाल के प्रवासन (Migration) संकट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. स्यूटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) स्पेन के स्वायत्त शहर (Autonomous Cities) हैं, जो अफ्रीका के उत्तरी तट पर स्थित हैं।
  2. ये यूरोपीय संघ (European Union) की अफ्रीका के साथ एकमात्र स्थलीय सीमाएँ (Land Borders) हैं।
  3. प्रवासियों की अचानक बढ़ी हुई संख्या का कारण केवल स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय (Spanish Supreme Court) का वह निर्णय था, जिसने समुद्र मार्ग से आने वाले सभी प्रवासियों को स्पेन में रहने की कानूनी अनुमति प्रदान की।
  4. स्पेन ने मोरक्को (Morocco) के साथ मिलकर सीमा नियंत्रण को सुदृढ़ किया तथा प्रवासियों की वापसी को सुगम बनाया।

 नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,2 और 4

C: केवल 1,2 और 3

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: D

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही: स्यूटा (Ceuta) और मेलिला (Melilla) स्पेन के स्वायत्त शहर हैं, जो अफ्रीका के उत्तरी तट पर स्थित हैं तथा मोरक्को की सीमा से लगे हुए हैं।


कथन 2 – सही: ये यूरोपीय संघ की अफ्रीका के साथ एकमात्र स्थलीय सीमाएँ हैं, इसलिए यूरोप पहुँचने का प्रयास करने वाले प्रवासियों के लिए ये महत्वपूर्ण प्रवेश बिंदु हैं।


कथन 3 – गलत: स्पेन सरकार के अनुसार, मानव तस्करी नेटवर्क ने यह झूठी सूचना फैलाई कि स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के कारण समुद्र मार्ग से आने वाले सभी प्रवासियों को स्पेन में रहने की अनुमति मिल जाएगी। वास्तव में, न्यायालय के निर्णय में ऐसी कोई कानूनी अनुमति नहीं दी गई थी।


कथन 4 – सही: स्पेन ने मोरक्को के साथ समन्वय कर सीमा नियंत्रण को मजबूत किया, मानव तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई की तथा प्रवासियों की वापसी की प्रक्रिया को सुगम बनाया।


                            

Q4:

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1.   यह विधेयक जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करता है।

2.   दो वर्ष से अधिक विलंब से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (First-Class Judicial Magistrate) के आदेश की आवश्यकता होगी।

3.   एक से दो वर्ष के बीच विलंब से होने वाले पंजीकरण के लिए जिलाधिकारी (DM), उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यपालक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) द्वारा अनुमोदन की वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।

4.   यह विधेयक सिविल पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System - CRS) को समाप्त कर उसके स्थान पर न्यायिक पंजीकरण व्यवस्था लागू करता है।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 1,2 और 3

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

कथन 1 – सही: यह संशोधन विधेयक विशेष रूप से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करता है, जो विलंबित पंजीकरण (Delayed Registration) से संबंधित है।


कथन 2 – सही: दो वर्ष से अधिक विलंब से होने वाले जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होगी। इससे पहले यह अनुमोदन कार्यपालिका (Executive Authority) के माध्यम से होता था।


कथन 3 – सही: एक से दो वर्ष के बीच विलंब वाले मामलों में वर्तमान व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। ऐसे मामलों में अनुमोदन जिलाधिकारी (DM), उप-मंडलीय मजिस्ट्रेट (SDM) अथवा कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा ही दिया जाएगा।


कथन 4 – गलत: यह विधेयक सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) को समाप्त नहीं करता। बल्कि, अत्यधिक विलंब से होने वाले पंजीकरण की कड़ी जाँच (Stricter Scrutiny) के माध्यम से इसकी विश्वसनीयता को और सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।


                            

Q5:

 

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 तथा इसके हालिया संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. यह अधिनियम भारत में जन्म एवं मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण के लिए सिविल पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System - CRS) को वैधानिक ढाँचा प्रदान करता है।
  2. 2023 के संशोधन ने जन्म प्रमाण-पत्र को आधार, पासपोर्ट, मतदाता सूची, शैक्षणिक अभिलेख तथा ड्राइविंग लाइसेंस जैसे अभिलेखों को अद्यतन करने हेतु एकल दस्तावेज (Single Document) के रूप में उपयोग की अनुमति दी।
  3. 2026 के संशोधन विधेयक का एक उद्देश्य जनसांख्यिकीय (Demographic) एवं जीवन-सांख्यिकी (Vital Statistics) की शुद्धता में सुधार करना तथा पहचान-संबंधी धोखाधड़ी (Identity-related Fraud) को रोकना है।
  4. संशोधन विधेयक विलंब से होने वाले सभी जन्म एवं मृत्यु पंजीकरणों के लिए न्यायिक स्वीकृति (Judicial Approval) अनिवार्य करता है, चाहे विलंब की अवधि कितनी भी हो।

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

A: केवल 1 और 2

B: केवल 1,3 और 4

C: केवल 1,2 और 3

D: 1, 2, 3 और 4

उत्तर: C

स्पष्टीकरण:

 


कथन 1 – सही: जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 भारत में जन्म एवं मृत्यु के अनिवार्य पंजीकरण के लिए सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) का वैधानिक आधार प्रदान करता है। यह भारत में जीवन-सांख्यिकी (Vital Statistics) का प्रमुख स्रोत है।


कथन 2 – सही: 2023 के संशोधन के अंतर्गत एक राष्ट्रीय डिजिटल डेटाबेस की स्थापना की गई तथा जन्म प्रमाण-पत्र को आधार, पासपोर्ट, मतदाता सूची, शैक्षणिक संस्थानों के अभिलेख, ड्राइविंग लाइसेंस तथा अन्य सरकारी अभिलेखों को अद्यतन करने के लिए एकल दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई।


कथन 3 – सही: 2026 के संशोधन विधेयक के प्रमुख उद्देश्य हैं


फर्जी एवं कूटरचित (Fabricated) प्रमाण-पत्रों की रोकथाम।


सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) की विश्वसनीयता एवं अखंडता को सुदृढ़ करना।


जनसांख्यिकीय एवं जीवन-सांख्यिकी की शुद्धता में सुधार।


अत्यधिक विलंब से होने वाले पंजीकरणों में न्यायिक निगरानी को सुदृढ़ करना।


सुशासन एवं सार्वजनिक सेवा वितरण के लिए विश्वसनीय पहचान अभिलेख सुनिश्चित करना।


कथन 4 – गलत: न्यायिक स्वीकृति सभी विलंबित पंजीकरणों के लिए आवश्यक नहीं है। इसकी आवश्यकता केवल दो वर्ष से अधिक विलंब वाले मामलों में होती है। एक से दो वर्ष के बीच विलंब वाले मामलों में वर्तमान कार्यपालिका-आधारित अनुमोदन व्यवस्था ही लागू रहती है।


                            
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