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Daily-current-affairs / 16 Jan 2026

नीति से परिणाम तक: प्रगति और भारत की नई प्रशासनिक संस्कृति

नीति से परिणाम तक: प्रगति और भारत की नई प्रशासनिक संस्कृति

संदर्भ:

भारत में विकास की सबसे बड़ी चुनौती अक्सर नीति निर्माण नहीं, बल्कि उसका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन रही है। हाल ही में 31 दिसंबर 2025 को भारत की प्रमुख शासन पहल ‘प्रगति’ (Pro-Active Governance and Timely Implementation- PRAGATI) की 50वीं बैठक आयोजित हुई, जो प्रभावी, प्रौद्योगिकी-आधारित प्रशासन की दिशा में भारत सरकार की प्रतिबद्धता का एक प्रतीकात्मक पड़ाव है। 2015 में एक रियल-टाइम समीक्षा मंच के रूप में शुरू हुई प्रगति (PRAGATI) आज प्रशासनिक सुधारों की आधारशिला बन चुकी है जो जवाबदेही, सहकारी संघवाद और परिणामोन्मुखी सार्वजनिक वितरण को एकीकृत करती है।

      • PRAGATI जैसे मंच का उदय भारतीय शासन व्यवस्था में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है। प्रौद्योगिकी, नेतृत्व और जवाबदेही को एकीकृत करते हुए PRAGATI ने यह सिद्ध किया है कि सक्रिय निगरानी और समन्वय से वर्षों से लंबित परियोजनाओं को भी गति दी जा सकती है। ऐसे देश में, जहाँ ऐतिहासिक रूप से नौकरशाही विलंब ने विकास को बाधित किया है, PRAGATI की दशक-लंबी यात्रा सक्रिय निगरानी और परिणाम-केंद्रित शासन की ओर एक सचेत बदलाव को दर्शाती है।

प्रगति (PRAGATI)

प्रगति (PRAGATI- Pro-Active Governance And Timely Implementation), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा शुरू किया गया एक सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) प्लेटफ़ॉर्म है, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों की बड़ी परियोजनाओं और शिकायतों की समीक्षा करना और उन्हें समय पर पूरा करवाना है, जिससे सक्रिय शासन और बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। यह मंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, भू-स्थानिक मैपिंग और डेटा प्रबंधन जैसी तकनीकों का उपयोग करता है, जिससे प्रधानमंत्री सीधे अधिकारियों से जुड़कर समस्याओं को सुलझाते हैं और परियोजनाओं में तेजी लाते हैं।

मुख्य उद्देश्य:

    • सक्रिय शासन: समस्याओं के उत्पन्न होने से पहले ही उनका समाधान करना।
    • समयबद्ध कार्यान्वयन: परियोजनाओं में देरी के कारणों की पहचान कर उन्हें तुरंत दूर करना।
    • समन्वय: केंद्र और राज्य के विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाना।
    • जवाबदेही: परियोजना की प्रगति की वास्तविक समय (real-time) में निगरानी कर जवाबदेही सुनिश्चित करना।  

अवधारणा से संस्थागत स्वरूप तक:

      • भारत में बड़े पैमाने की अवसंरचना और सामाजिक परियोजनाएँ लंबे समय से लागत-वृद्धि, देरी और नौकरशाही जड़ता से ग्रस्त रही हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने PRAGATI की परिकल्पना की जो एक ऐसा एकीकृत, इंटरैक्टिव मंच जो रियल-टाइम निगरानी और अंतर-सरकारी समन्वय को सक्षम बनाता है।
      • PRAGATI तीन प्रमुख प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करता है:
        • डिजिटल डेटा प्रबंधन- केंद्रीकृत सूचना और प्रगति-ट्रैकिंग के लिए
        • वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग-  प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों के बीच प्रत्यक्ष संवाद हेतु
        • जियो-स्पैशियल तकनीक-  परियोजनाओं की दृश्य निगरानी और निर्णय-निर्माण के लिए
      • इन उपकरणों के माध्यम से PRAGATI यह सुनिश्चित करता है कि परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी जिसमें फील्ड-स्तरीय साक्ष्य भी शामिल हैं, सुलभ हो, ताकि डेटा-आधारित और समयोचित निर्णय लिए जा सकें। यह मंच संरचित फॉलो-अप को भी संस्थागत बनाता है, जिससे मंत्रालयों और राज्यों में जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
      • प्रगति (PRAGATI) की वैचारिक जड़ें ‘स्वागत’ (SWAGAT- State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) में हैं, जिसे 2003 में गुजरात में शुरू किया था। ‘स्वागत’ के तहत नागरिक ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कर सकते थे, उनकी प्रगति ट्रैक कर सकते थे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से संवाद कर सकते थे। इसी विचार को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देते हुए PRAGATI ने शिकायत निवारण से आगे बढ़कर समग्र परियोजना प्रबंधन का रूप लिया जिसमें अवसंरचना, सामाजिक योजनाएँ और सार्वजनिक सेवाएँ शामिल हैं।

संचालनात्मक संरचना:

      • प्रगति (PRAGATI) तीन-स्तरीय तंत्र के माध्यम से कार्य करता है:
        • शीर्ष-स्तरीय समीक्षा: प्रधानमंत्री, राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों के साथ PRAGATI बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, जहाँ परियोजनाओं और योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है।
        • फॉलो-अप तंत्र: बैठकों में लिए गए निर्णयों की निगरानी परियोजनाओं के लिए कैबिनेट सचिवालय द्वारा की जाती है, जबकि योजनाओं और शिकायतों की निगरानी संबंधित मंत्रालय करते हैं, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की निरंतर देखरेख में।
        • मुद्दे की वृद्धि : सामान्य मुद्दों का समाधान मंत्रालय स्तर पर किया जाता है; जटिल या उच्च-प्राथमिकता वाले मामलों को सीधे प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप हेतु PRAGATI में उठाया जाता है।
      • यह मंच PM GatiShakti, PARIVESH और PM Ref Portal जैसी अन्य पहलों के साथ भी एकीकृत है, ताकि अवसंरचना, पर्यावरण और क्षेत्र-विशिष्ट डेटा निर्णय-निर्माण को सूचित कर सकें।

50वीं बैठक का महत्व:

यह बैठक केवल औपचारिक नहीं थी; इसने भारत के समकालीन शासन-पथ की कई निर्णायक विशेषताओं को रेखांकित किया:

      • दायरे का विस्तार: प्रगति (PRAGATI) के शुरुआती वर्षों में ध्यान मुख्यतः अवसंरचना देरी पर था, परंतु अब इसका दायरा सामाजिक कल्याण योजनाओं तक विस्तृत हो गया है। इसका उदाहरण प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) की समीक्षा है जो एक मातृत्व लाभ कार्यक्रम है। पारदर्शिता और वितरण दक्षता बढ़ाने के लिए बायोमेट्रिक आधार एकीकरण पर जोर मंच की अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है।
      • प्रौद्योगिकी का अंगीकरण: परियोजना जीवन-चक्र के प्रत्येक चरण में प्रौद्योगिकी को अंतर्निहित करने का प्रधानमंत्री का निर्देश डिजिटल शासन को प्रशासनिक दक्षता के गुणक के रूप में स्थापित करता है। डैशबोर्ड से लेकर रियल-टाइम अलर्ट तक, मंच की तकनीकी संरचना ने जवाबदेही के मानकों को पुनर्परिभाषित किया है।
      • सहकारी संघवाद: केंद्र, राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को एकीकृत मंच पर लाने का PRAGATI का उद्देश्य सहकारी संघवाद का सशक्त उदाहरण है। विविध प्रशासनिक इकाइयों के बीच प्रत्यक्ष संवाद से भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ और समन्वय संबंधी रुकावटें जो परंपरागत रूप से परियोजनाओं को धीमा करती हैं काफी हद तक सुलझ जाती हैं।

उपलब्धियाँ:

      • मात्रात्मक रूप से बीते दशक में प्रगति का प्रभाव उल्लेखनीय रहा है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस तंत्र के माध्यम से ₹85 लाख करोड़ से अधिक के निवेश-सम्बद्ध प्रोजेक्ट्स में तेजी आई है जिसमें सड़क, ऊर्जा, रेलवे, जल संसाधन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
      • इसके अतिरिक्त, स्वतंत्र आकलन जिनमें अकादमिक अध्ययन भी शामिल हैं, PRAGATI की भूमिका को महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को गति देने और सार्वजनिक प्रशासन में जवाबदेही की संस्कृति स्थापित करने में रेखांकित करते हैं।
      • फिर भी, वास्तविक उपलब्धि केवल मौद्रिक मूल्य में नहीं, बल्कि परिवर्तनकारी वितरण में निहित है: लंबे समय से लंबित अवसंरचना का साकार होना, कल्याण योजनाओं का अधिक पारदर्शिता के साथ लाभार्थियों तक पहुँचना, और नौकरशाही समन्वय का प्रतिक्रियात्मक से अग्रिम (anticipatory) दृष्टिकोण की ओर बढ़ना।

PRAGATI के माध्यम से अनेक अवसंरचना परियोजनाओं में लंबे समय से चली आ रही बाधाओं का समाधान हुआ है:

      • बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल (असम): 1997 में परिकल्पित, 2018 में पूर्णपूर्वोत्तर भारत में संपर्क और रणनीतिक गतिशीलता में सुधार।
      • नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा: भूमि अधिग्रहण और बहु-एजेंसी चुनौतियों के कारण 25 वर्षों की देरी; PRAGATI हस्तक्षेप के बाद चरण-I का उद्घाटन 2025 में।
      • भिलाई इस्पात संयंत्र आधुनिकीकरण: 2007 में स्वीकृत, अनुबंध और क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों के कारण विलंबित; PRAGATI के माध्यम से प्रभावी पूर्णता।
      • सुपर थर्मल पावर परियोजनाएँ (छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड, नॉर्थ करनपुरा, नबीनगर): भूमि, ईंधन और प्रशासनिक बाधाओं के समाधान हेतु PRAGATI के अंतर्गत उठाए गएऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड विश्वसनीयता में सुधार।
      • मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक: भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल—PRAGATI के अंतर्गत समन्वित स्वीकृतियों और निष्पादन निगरानी से लाभान्वित।

अन्य परियोजनाओं में प्राकृतिक गैस पाइपलाइन (JHBDPL), राजमार्ग विस्तार (NH-161, NH-75, NH-344M) और रेल संपर्क परियोजनाएँ (जम्मूउधमपुरश्रीनगरबारामूला रेल लाइन) शामिल हैं, जिन्हें उच्च-स्तरीय निगरानी और जवाबदेही प्रवर्तन से लाभ मिला।

चुनौतियाँ:

      • सफलताओं के बावजूद भूमि अधिग्रहण और अंतर-विभागीय समन्वय बड़े अवसंरचना प्रोजेक्ट्स में अभी भी स्थायी बाधाएँ बने हुए हैं। वरिष्ठ प्रशासकों ने स्वीकार किया है कि यद्यपि मंच निगरानी को सुदृढ़ करता है, परंतु अंतर्निहित संरचनात्मक मुद्देजैसे नीति कठोरता और प्रक्रियात्मक विलंब अभी भी गहरे सुधार की माँग करते हैं।
      • इसके अतिरिक्त, PRAGATI मॉडल का स्थानीय स्वामित्व केंद्रीकृत शीर्ष के परे राज्य और जिला स्तरों पर और अधिक सुदृढ़ किए जाने की आवश्यकता है।

प्रगति (PRAGATI) से प्रमुख सबक:

      • प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन: डिजिटल डैशबोर्ड, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और जियोस्पैशियल टूल्स शासन को सक्रिय और डेटा-आधारित बनाते हैं।
      • समयबद्ध जवाबदेही: स्पष्ट समय-सीमाओं के साथ निर्णयों की ट्रैकिंग, बहु-एजेंसी फॉलो-थ्रू सुनिश्चित करती है।
      • सहकारी संघवाद: केंद्र और राज्यों के बीच प्रत्यक्ष सहभागिता से अंतर-सरकारी टकराव कम होता है।
      • परिणामोन्मुखता: प्रक्रियाओं से हटकर ठोस परिणामों पर ध्यान, जिससे नागरिकों का शासन पर विश्वास बढ़ता है।
      • अनुकरणीय मॉडल: बड़े संघीय लोकतंत्रों में परियोजना त्वरितीकरण के लिए PRAGATI एक वैश्विक मानक प्रस्तुत करता है।

निष्कर्ष:

प्रगति (PRAGATI)  मॉडल केवल निरंतरता का संकेत नहीं, बल्कि विकसित होती प्रशासनिक सोच का प्रतिबिंब है। भारत जैसे विविध और जटिल लोकतंत्र में प्रगति जैसी शासन नवाचार पहलें महत्वपूर्ण सीख देती हैं। प्रौद्योगिकी, नेतृत्व-संलग्नता और अंतर-सरकारी समन्वय का संयोजन उन अन्य संघीय लोकतंत्रों के लिए भी एक उपयोगी टेम्पलेट हो सकता है, जो समान कार्यान्वयन चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जैसे-जैसे देश 2047 के विज़न की ओर अग्रसर है, PRAGATI का विकास एक व्यापक संदेश देता है कि भारत की प्रगति केवल अच्छी नीतियाँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन नीतियों को समयबद्ध और ठोस प्रभाव में बदलने वाली सक्षम संस्थाओं के निर्माण पर निर्भर है।

 

UPSC/PCS मेन्स परीक्षा मॉक प्रश्न: नीति निर्माण से अधिक, नीति क्रियान्वयन भारत की बड़ी चुनौती रहा है। इस कथन के आलोक में प्रगति (PRAGATI) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।