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Daily-current-affairs / 07 Oct 2026

भारत में डेटा सेंटर: डिजिटल युग की वैज्ञानिक एवं तकनीकी रीढ़

भारत में डेटा सेंटर: डिजिटल युग की वैज्ञानिक एवं तकनीकी रीढ़

संदर्भ:

      • भारत में डिजिटल तकनीकों के तेजी से विस्तार के साथ डेटा सेंटर (Data Centres) आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधारभूत संरचना बनकर उभर रहे हैं। हाल ही में स्वतंत्र शोध संगठन पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (Policy Consensus Centre-PCC) ने बताया कि भारत में डेटा सेंटर की परिचालन क्षमता वर्ष 2020 में लगभग 375 मेगावाट से बढ़कर 2025 में 1,575 मेगावाट से अधिक हो गई। PCC के अनुसार, वर्ष 2030 तक यह क्षमता 4.5–9 गीगावाट तक पहुँच सकती है।
      • भारत सरकार के अनुसार, अगस्त 2026 तक देश की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1.57 गीगावाट हो चुकी थी। यह विस्तार मुख्यतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, 5G, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा स्थानीयकरण जैसी तकनीकों के बढ़ते उपयोग से प्रेरित है। इसलिए डेटा सेंटर को केवल डेटा संग्रहण और प्रसंस्करण की सुविधा के रूप में नहीं, बल्कि एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं को सक्षम बनाने वाले आधुनिक तकनीकी बुनियादी ढाँचे के केंद्र के रूप में समझना अधिक उपयुक्त होगा।

डेटा सेंटर: डिजिटल अर्थव्यवस्था की भौतिक रीढ़

      • डेटा सेंटर एक विशेष रूप से डिजाइन की गई सुविधा हैं जहाँ सर्वर, स्टोरेज, नेटवर्किंग उपकरण, जीपीयू, पावर सिस्टम, कूलिंग और साइबर सुरक्षा प्रणालियाँ डिजिटल डेटा को संग्रहित और संसाधित करती हैं।
      • किसी डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस सेवा और एआई आधारित प्रश्न के पीछे डेटा सेंटर में मौजूद कंप्यूटिंग संसाधन काम करते हैं। सामान्यतः डिजिटल अनुरोध की प्रक्रिया में या एआई जैसे उन्नत अनुप्रयोगों में बड़ी मात्रा में डेटा और उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग की आवश्यकता होती है। इसलिए डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल सेवाओं के लिए केवल भंडारण केंद्र नहीं, बल्कि कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हैं।

एआई, क्लाउड और 5जी: डेटा सेंटर विस्तार के प्रमुख चालक

भारत में डेटा सेंटर की माँग को समझने के लिए तीन तकनीकी बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं: एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और 5जी ।

      • कृत्रिम बुद्धिमत्ता: जेनरेटिव एआई और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के ट्रेनिंग एवं ऑपरेशन के लिए सामान्य कंप्यूटिंग की तुलना में कहीं अधिक जीपीयू और एआई एक्सेलेरेटर्स की आवश्यकता होती है। इससे हाई-डेंसिटी कंप्यूटिंग की माँग बढ़ रही है।
      • क्लाउड कंप्यूटिंग: क्लाउड कंप्यूटिंग ने कंप्यूटिंग और स्टोरेज को आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने की सुविधा प्रदान की है। इससे व्यवसायों को अपना महँगा सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की आवश्यकता कम हुई है और डेटा सेंटर की माँग बढ़ी है।
      • 5G और एज कंप्यूटिंग (Edge Computing): 5G और एज कंप्यूटिंग से तेज डेटा ट्रांसफर और कम latency संभव होती है। इससे इंडस्ट्रियल IoT, स्मार्ट सिटी, ऑटोनॉमस सिस्टम और रिमोट हेल्थकेयर जैसे अनुप्रयोगों को बढ़ावा मिलता है। इनमें कई सेवाओं के लिए डेटा को दूर स्थित डेटा सेंटर तक भेजने के बजाय उपयोगकर्ता के निकट संसाधित करना अधिक प्रभावी होता है। यही एज कंप्यूटिंग की अवधारणा है। इसलिए भविष्य में भारत में बड़े केंद्रीकृत डेटा सेंटर के साथ डिस्ट्रिब्यूटेड एज डेटा सेंटर का भी विस्तार हो सकता है।

भारत में डेटा सेंटर

भारत में डेटा सेंटर का तेजी से विस्तार: 

      • भारत में डेटा सेंटर का विकास डिजिटल परिवर्तन के साथ तेजी से हुआ है। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) नई दिल्ली, पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर में राष्ट्रीय डेटा सेंटर संचालित करता है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र में भी बड़े हाइपरस्केल और क्लाउड डेटा सेंटर विकसित हो रहे हैं। भारत में डेटा सेंटर की माँग का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी कारक एआई है।
      • एआई आधारित डेटा सेंटर के लिए उच्च क्षमता वाले जीपीयू,सीपीयू, मेमोरी, नेटवर्किंग उपकरण और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की आवश्यकता होती है। इसलिए डेटा सेंटर नीति को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण नीति से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
      • इसी दिशा में सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0, इंडियाएआई मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम और आईटी हार्डवेयर के लिए पीएलआई स्कीम 2.0 जैसी पहलें भारत के डिजिटल-औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं। इस दृष्टिकोण से भारत को केवल डिजिटल सेवाओं का उपभोक्ता नहीं, बल्कि विविध और AI प्रौद्योगिकी का निर्माता बनने में मदद कर सकता है।

डेटा सेंटर में कूलिंग टेक्नोलॉजी और एनर्जी एफिशिएंसी:

      • एआई और हाई परफॉरमेंस कंप्यूटिंग के कारण सर्वर की कंप्यूटिंग क्षमता तथा ऊर्जा घनत्व बढ़ रहा है। इसके साथ सर्वरों से उत्पन्न ऊष्मा भी बढ़ती है। इसलिए ऊष्मा प्रबंधन डेटा सेंटर की महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौती बन गया है।
      • पारंपरिक एयर कुलिंग के साथ नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जैसे: डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, इमर्शन कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग, क्लोज्ड-लूप कूलिंग जिनका उद्देश्य कम ऊर्जा और पानी के उपयोग में बेहतर हीट मैनेजमेंट करना है।
      • इसके साथ डेटा सेंटर में स्मार्ट पावर मैनेजमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज और AI-बेस्ड कूलिंग ऑप्टिमाइजेशन को बढ़ावा देना आवश्यक है। यहाँ पॉवर यूसेज इफेक्टिवनेस (PUE) एक महत्वपूर्ण संकेतक है, जो डेटा सेंटर की ऊर्जा दक्षता को समझने में सहायता करता है।
      • इस प्रकार भविष्य के डेटा सेंटर की तकनीकी सफलता केवल अधिक कंप्यूटिंग कैपेसिटी में नहीं, बल्कि कम ऊर्जा में अधिक कंप्यूटिंग उपलब्ध कराने में होगी।

साइबर सुरक्षा और डेटा संप्रभुता:

      • डेटा सेंटर में बड़ी मात्रा में वित्तीय, स्वास्थ्य, सरकारी और व्यावसायिक डेटा संग्रहीत होता है। इसलिए ये राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण अवसंरचना हैं। प्रमुख खतरे रैनसमवेयर, DDoS अटैक, मैलवेयर, इनसाइडर थ्रेट्स, सप्लाई चेन अटैक, डेटा ब्रीच हैं।  इनसे निपटने के लिए एन्क्रिप्शन, ज़ीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नेटवर्क सेगमेंटेशन और कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों की आवश्यकता है।
      • साथ ही, घरेलू डेटा सेंटर भारत की डाटा संप्रभुता (Data Sovereignty) को मजबूत कर सकते हैं। इससे महत्वपूर्ण डेटा के भंडारण और प्रसंस्करण पर भारत का नियामकीय नियंत्रण बढ़ता है। हालाँकि, डेटा स्थानीयकरण अपने आप में पर्याप्त नहीं है। इसके साथ डेटा संरक्षण, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार डेटा प्रशासन भी आवश्यक हैं।

भारत के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी महत्व:

डेटा सेंटर का विकास भारत की कई उभरती प्रौद्योगिकियों को गति दे सकता है।

      • एआई और हाई परफॉरमेंस कंप्यूटिंग: देश में पर्याप्त कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर AI अनुसंधान, मशीन लर्निंग और वैज्ञानिक सिमुलेशन को बढ़ावा दे सकता है।
      • सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम: डेटा सेंटर के लिए जीपीयू, सीपीयू, मेमोरी और नेटवर्किंग कंपोनेंट्स की बढ़ती माँग घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर उद्योग को प्रोत्साहित कर सकती है।
      • क्वांटम कंप्यूटिंग:भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए विशेष कंप्यूटिंग और कूलिंग  इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होगी। इसलिए वर्तमान डेटा सेंटर क्षमता भविष्य के उन्नत कंप्यूटिंग इकोसिस्टम की आधारशिला बन सकती है।
      • साइबर सिक्यूरिटी: महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भारत में स्वदेशी साइबर सुरक्षा तकनीकों और विशेषज्ञता के विकास को प्रोत्साहित करेगी।
      • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर: डेटा सेंटर भारत के डिजिटल भुगतान, पहचान, स्वास्थ्य, शिक्षा और ई-गवर्नेंस जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वसनीय कंप्यूटिंग सपोर्ट प्रदान करते हैं।

प्रमुख चुनौतियाँ:

भारत के सामने डेटा सेंटर क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी चुनौतियाँ हैं:

      • उच्च क्षमता वाले जीपीयू, एडवांस्ड प्रोसेसर और दूसरे क्रिटिकल पार्ट्स के लिए आयात निर्भरता।
      • AI आधारित उच्च-घनत्व कंप्यूटिंग के कारण बढ़ती ऊर्जा और कूलिंग आवश्यकता।
      • संवेदनशील डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते साइबर हमले।
      • तेजी से बदलती तकनीक के कारण उत्पन्न ई कचरा।

आगे की राह:

भारत को डेटा सेंटर के विकास के लिए एकीकृत और प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इसके अंतर्गत:

      • डेटा सेंटर को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण से जोड़ा जाए।
      • जीपीयू, सर्वर और नेटवर्क उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जाए।
      • तरल शीतलन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऊर्जा दक्षता जैसी तकनीकों को अपनाया जाए।
      • नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण का विस्तार किया जाए।
      • साइबर सुरक्षा और आपदा पुनर्बहाली के मजबूत मानक विकसित किए जाएँ।
      • एज कंप्यूटिंग और उन्नत डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जाए।
      • कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा के लिए कुशल तकनीकी मानव संसाधन तैयार किया जाए।

निष्कर्ष:

डेटा सेंटर केवल डिजिटल डेटा के भंडारण की सुविधाएँ नहीं हैं, बल्कि एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5जी, सेमीकंडक्टर, साइबर सुरक्षा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने वाली वैज्ञानिक एवं तकनीकी रीढ़ हैं। भारत में इनका विस्तार देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता को भी मजबूत कर सकता है। हालाँकि, भविष्य की सफलता केवल डेटा सेंटर की स्थापित क्षमता बढ़ाने में नहीं, बल्कि अधिक कंप्यूटिंग शक्ति को कम ऊर्जा, कम जल और अधिक सुरक्षा के साथ उपलब्ध कराने में होगी। विकसित भारत @2047 के लिए डेटा सेंटर केवल डिजिटल अवसंरचना नहीं, बल्कि भारत की अगली पीढ़ी की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता का आधार बन सकते हैं।

 

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