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Daily-current-affairs / 15 Sep 2026

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में कॉपीराइट का भविष्य

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में कॉपीराइट का भविष्य

संदर्भ:

हाल ही में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा निर्मित कलाकृति के कॉपीराइट पंजीकरण से जुड़े मामले ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया है कि क्या AI प्रणाली को किसी रचना का कानूनी लेखक माना जा सकता है। यह मामला AI, मानव रचनात्मकता और बौद्धिक संपदा अधिकारों के बीच संबंधों को स्पष्ट करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

कॉपीराइट क्या है?

कॉपीराइट एक बौद्धिक संपदा अधिकार है, जो मौलिक साहित्यिक, नाटकीय, संगीतात्मक और कलात्मक कृतियों सहित अन्य संरक्षित कार्यों के रचनाकारों को उनके कार्य के उपयोग पर विशेष कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

भारत में कॉपीराइट से संबंधित प्रमुख कानून कॉपीराइट अधिनियम, 1957 है।

कॉपीराइट की प्रमुख विशेषताएँ:

      • यह मौलिक रचनाओं को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
      • यह विचारों के बजाय उनकी मौलिक अभिव्यक्ति की रक्षा करता है।
      • यह रचनाकार को पुनरुत्पादन, वितरण और अन्य संबंधित अधिकार प्रदान करता है।
      • यह रचनाकारों को आर्थिक लाभ तथा अपनी रचनाओं पर नियंत्रण का अवसर देता है।

डाबस (DABUS) मामला क्या है?

      • डाबस (DABUS) एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणाली है, जिसे अमेरिकी AI शोधकर्ता स्टीफन थेलर ने विकसित किया है। थेलर ने डाबस (DABUS) द्वारा निर्मित कलाकृति अ रीसेंट एंट्रेंस टू पैराडाइज़’ (A Recent Entrance to Paradise) के लिए कॉपीराइट पंजीकरण का प्रयास किया। इस मामले में AI प्रणाली को रचना का लेखक बताया गया था।
      • इससे निम्नलिखित प्रश्न प्रस्तुत हुए कि क्या किसी AI प्रणाली को मानव के समान कानूनी लेखक का दर्जा दिया जा सकता है?
      • भारतीय कॉपीराइट व्यवस्था के संदर्भ में मुख्य बिंदु यह है कि AI को स्वयं कानूनी लेखक मानने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। किसी AI-निर्मित रचना के कॉपीराइट संरक्षण के लिए मानव रचनात्मक योगदान और लेखक की कानूनी पहचान महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत में कॉपीराइट का कानूनी ढाँचा:

      • कॉपीराइट अधिनियम, 1957: यह भारत में कॉपीराइट संरक्षण का प्रमुख कानून है। इसका उद्देश्य रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा करना तथा रचनात्मक कार्यों को प्रोत्साहित करना है।
      • धारा 2(d): लेखक की परिभाषा: यह धारा विभिन्न प्रकार की रचनाओं के लेखक की पहचान से संबंधित प्रावधान प्रदान करती है। कंप्यूटर-जनित कार्यों के संदर्भ में यह धारा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
      • धारा 13: कॉपीराइट का विषय: यह धारा उन मौलिक साहित्यिक, नाटकीय, संगीतात्मक और कलात्मक कृतियों तथा अन्य कार्यों से संबंधित है, जिन पर कॉपीराइट संरक्षण लागू हो सकता है।
      • धारा 17: कॉपीराइट का प्रथम स्वामी: सामान्यतः लेखक को कॉपीराइट का प्रथम स्वामी माना जाता है। हालांकि, रोजगार, अनुबंध और अन्य कानूनी परिस्थितियों में इसके अपवाद हो सकते हैं।

Copyright Infringement in the Age of AI: Who Owns AI-Generated Content? -  Legal Blur

AI-जनित और AI-की सहायता से रचित रचना में अंतर:

      • AI-जनित रचना:
        • ऐसी रचना, जिसे AI प्रणाली काफी हद तक स्वतंत्र रूप से तैयार करती है और जिसमें मानव का प्रत्यक्ष रचनात्मक योगदान सीमित हो सकता है।
        • मुख्य प्रश्न: क्या इस रचना में पर्याप्त मानवीय रचनात्मक योगदान मौजूद है?
      • AI-सहायित रचना:
        • ऐसी रचना, जिसमें मानव विषय, विचार, निर्देश, संरचना, चयन, संपादन और अंतिम रचनात्मक निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
        • अब प्रश्न ये है कि रचना में मानव का मौलिक योगदान कितना महत्वपूर्ण है? इसलिए, केवल AI का उपयोग करने से किसी मानव की रचना स्वतः कॉपीराइट संरक्षण से बाहर नहीं हो जाती। वास्तविक मानवीय रचनात्मक योगदान का मूल्यांकन आवश्यक है।

AI और कॉपीराइट से जुड़े प्रमुख मुद्दे:

      • लेखक की पहचान: AI द्वारा निर्मित रचना का कानूनी लेखक कौन होगा? क्या वह व्यक्ति लेखक होगा, जिसने AI को निर्देश दिया, या वह व्यक्ति जिसने AI के आउटपुट को संपादित और विकसित किया?
      • मौलिकता का निर्धारण: AI द्वारा निर्मित रचना की मौलिकता कैसे निर्धारित की जाएगी? क्या केवल एक निर्देश देने को पर्याप्त रचनात्मक योगदान माना जा सकता है?
      • प्रशिक्षण डेटा का उपयोग: AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए पुस्तकों, चित्रों, संगीत, समाचारों और अन्य कॉपीराइट-संरक्षित सामग्री के उपयोग की वैधता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
      • कॉपीराइट उल्लंघन की जिम्मेदारी: यदि AI द्वारा तैयार सामग्री किसी मौजूदा रचना की नकल करती है, तो उसके लिए AI डेवलपर, उपयोगकर्ता या अन्य संबंधित पक्षों में से कौन जिम्मेदार होगा?
      • रचनाकारों के आर्थिक हित: AI के कारण बड़ी मात्रा में सामग्री का निर्माण संभव हो गया है। इससे कलाकारों, लेखकों, संगीतकारों और अन्य रचनाकारों के रोजगार, पारिश्रमिक तथा अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य:

      • संयुक्त राज्य अमेरिका: अमेरिकी कॉपीराइट व्यवस्था में मानव रचनात्मकता को केंद्रीय महत्व दिया जाता है। केवल AI द्वारा निर्मित सामग्री को सामान्यतः कॉपीराइट संरक्षण प्राप्त करने में कठिनाई होती है, यदि उसमें पर्याप्त मानव रचनात्मक योगदान नहीं है।
      • यूनाइटेड किंगडम: UK के कॉपीराइट, डिज़ाइन्स एंड पेटेंट्स एक्ट, 1988 में कंप्यूटर-जनित कार्यों के संबंध में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में उस व्यक्ति को लेखक माना जा सकता है, जिसने रचना के निर्माण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ की हों।
      • यूरोपीय संघ: यूरोपीय संघ में AI के नियमन के साथ-साथ कॉपीराइट-संरक्षित सामग्री के उपयोग, पारदर्शिता और अधिकारधारकों के हितों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

भारत के लिए महत्व:

      • रचनात्मक उद्योगों में नवाचार और उत्पादकता को बढ़ावा।
      • भारतीय भाषाओं, शिक्षा, डिजाइन, फिल्म और प्रकाशन के क्षेत्र में नए अवसर।
      • छोटे रचनाकारों के लिए कम लागत पर सामग्री निर्माण की सुविधा।
      • डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI आधारित उद्योगों के विकास को प्रोत्साहन।

प्रमुख चुनौतियाँ:

      • रचनाकारों के आर्थिक हितों और पारिश्रमिक की सुरक्षा।
      • प्रशिक्षण डेटा के अनधिकृत उपयोग की समस्या।
      • AI-निर्मित सामग्री में जवाबदेही और पारदर्शिता का अभाव।
      • मौलिक मानव रचनात्मकता के मूल्यांकन के लिए स्पष्ट मानदंडों की आवश्यकता।
      • AI तकनीक और मौजूदा बौद्धिक संपदा कानूनों के बीच संतुलन स्थापित करना।

आगे की राह:

      • कानूनी स्पष्टता: AI-जनित और AI-सहायित कार्यों के संबंध में कॉपीराइट कानून में स्पष्ट दिशानिर्देश विकसित किए जाने चाहिए।
      • मानव रचनात्मकता की सुरक्षा: कॉपीराइट निर्धारण में मानव के मौलिक रचनात्मक योगदान को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए।
      • पारदर्शी AI व्यवस्था: AI मॉडल के प्रशिक्षण डेटा, सामग्री के स्रोत और AI के उपयोग से संबंधित उचित प्रकटीकरण की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।
      • हितधारकों के बीच संवाद: कलाकारों, लेखकों, तकनीकी कंपनियों, प्रकाशकों और नीति-निर्माताओं के बीच व्यापक परामर्श आवश्यक है।
      • अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत को विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर AI और बौद्धिक संपदा से संबंधित साझा सिद्धांतों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

निष्कर्ष:

डाबस (DABUS) प्रकरण यह स्पष्ट करता है कि किसी रचना का मौलिक होना और उसके लेखक का कानूनी रूप से मान्य होना दो अलग-अलग प्रश्न हैं। AI रचनात्मक प्रक्रिया को बदल रहा है, लेकिन वर्तमान कॉपीराइट व्यवस्था में लेखकीय अधिकार को मानव या मान्य कानूनी इकाई से जोड़ना महत्वपूर्ण है। भारत को तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा के बीच संतुलन स्थापित करना होगा। इसके लिए ऐसा कानूनी ढाँचा आवश्यक है, जो AI के विकास के साथ अनुकूलित हो सके और मानव रचनात्मकता, आर्थिक हितों तथा बौद्धिक संपदा अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करे।

 

संभावित UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न

प्रश्न: कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा निर्मित रचनाओं के संदर्भ में मानव लेखकीय अधिकार और कॉपीराइट संरक्षण की अवधारणा नई कानूनी चुनौतियाँ उत्पन्न कर रही है।भारत के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

 

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