यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण (Private Players in Space Sector)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण (Private Players in Space Sector)

अंतरिक्ष क्षेत्र का निजीकरण (Private Players in Space Sector)

चर्चा का कारण

  • भारत सरकार ने जून 2020 में अपने एक ऐतिहासिक निर्णय द्वारा भारत के अन्तरिक्ष क्षेत्र को निजी कम्पनियों के लिए भी खोल दिया है।
  • केन्द्र सरकार की मंशा है कि अंतरिक्ष क्षेत्र के विनियमन में ढील दी जाये जिससे कि इस क्षेत्र में ताकि इसमें भी निजी निवेश आ सके।

निजी भागीदारी को प्रेरित करना

  • अंतरिक्ष क्षेत्र मे निजी भागीदारी को प्रेरित करने का निर्णय देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के प्रधानमंत्री के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के अनुरूप है।
  • सरकार के इस निणर्य के बाद से निजी उद्यमियों को भी इसरो के बुनियादी ढांचे, वज्ञैानिक आरै तकनीकी संसाधनों और यहां तक कि उनके अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए डेटा का उपयोग करने की अनुमति होगी।
  • भारत सरकार की मंशा है कि निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष गतिविधियों की सम्पूर्ण शृंखला में अर्थात उपग्रह-आधारित सेवा से लेकर रॉकेट लॉन्च तक मे शामिल किया जाए।
  • प्रख्यात एयरोस्पेस वैज्ञानिक डॉ- ए- सिवथानू पिल्लई (Dr. A. Sivathanu Pillai) की अध्यक्षता वाली समिति ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का प्रस्ताव दिया था।
  • समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया था कि ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना के मॉडल का अनुपालन अंतरिक्ष उद्यमों में भी किया जाना चाहिए।
  • ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना में डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) ने निजी क्षेत्र के तौर पर निवेश किया है जबकि डीआरडीओं, एक सरकारी एजेंसी है। इसी प्रकार, इसरो (ISRO) को भी अंतरिक्ष क्षेत्र के किसी बड़े सार्वजनिक-निजी भागीदारी वाले प्रोजेक्ट में निवेश करना चाहिए।

इन-स्पेस (IN-SPACE)

  • कैबिनेट ने नवगठित राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केन्द्र (IN-SPACE) को मंजूरी दे दी है, जो इसरो की एक शाखा के रूप में कार्य करेगा, हालाँकि यह केन्द्र भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अधीन होगा।
  • इन-स्पेस (IN-SPACE), एक स्वायत्त नोडल एजेंसी होगी, जो इसरो से प्रभावित नहीं होगी और न ही इसरो के कार्य को प्रभावित करेगी।
  • इन-स्पेस एजेंसी, छह महीने बाद अपनी कार्यात्मक भूमिका में आयेगी जो देश में अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी उद्यमियों को बढ़ावा देगी।
  • यह एजेंसी, एक सुविधाकर्ता और एक नियामक के रूप में कार्य करेगी। इसके अतिरिक्त, यह इसरो और निजी क्षेत्र के बीच इंटरफेस के रूप में भी कार्य करेगी ताकि देश में अंतरिक्ष क्षेत्र में भी संसाधनों का सर्वोंत्तम उपयोग हो सके।

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

  • न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल), एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है।
  • यह उपक्रम, अंतरिक्ष गतिविधियों को आपूर्ति चालित (Supply Ariven) मॉडल से लेकर माँग चालित (Demand Driven) मॉडल तक पुनः उन्मुख करने का प्रयास करेगी ताकि हमारी अंतरिक्ष सम्पत्ति का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
  • यह अंतरिक्ष विभाग के अधीन है और इसरो के लिए विपणन शाखा के रूप में काम करेगा।
  • यह इसरो द्वारा प्रदान की जाने वाली प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करेगा और ग्राहकों को लाएगा।

महत्व

  • इससे न केवल इस क्षेत्र का त्वरित विकास होगा बल्कि भारतीय उद्योग वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण िखलाड़ी बन सकेगा।
  • इसके साथ, प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार उत्पन्न होंगे और भारत एक वैश्विक प्रौद्योगिकी पावरहाउस बन सकेगा ।
  • इसरो (ISRO) विज्ञान, अनुसंधान और विकास, रणनीतिक प्रक्षेपण आदि पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा ।
  • ये सुधार अंतरिक्ष परिसंपत्तियों और गतिविधियों के सामाजिक-आर्थिक उपयोग को बढ़ाएंगे, जिसमें अंतरिक्ष संपत्ति, डेटा और सुविधाओं तक बेहतर पहुंच भी शामिल है।
  • कुछ ग्रह अन्वेषण मिशन (Planetary Exploration Missions) भी भविष्य में निजी क्षेत्र के लिए खोले जाएंगे।