यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: एक देश-एक वोटर आईडी (One Nation One Voter ID)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): एक देश-एक वोटर आईडी (One Nation One Voter ID)

एक देश-एक वोटर आईडी (One Nation One Voter ID)

चर्चा का कारण

  • कोविड-19 महामारी के कारण भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए पोस्टल बैलट से मतदान करना संभव बनाया है। चुनाव आयोग ने ऐसा कदम इसलिए उठाया है क्योंकि बुजुर्ग व्यक्ति इस महामारी के प्रति अधिक जोिखम में हैं। इससे पहले यह विकल्प केवल अक्षम नागरिकों और 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध था।
  • कुछ जानकारों का मानना है कि यही समान सशक्तिकरण दृष्टिकोण प्रवासी श्रमिकों व अन्य वर्गों के लिए भी अपनाया जाना चाहिए जो वोट देने के लिए अपने राज्यों की ओर लौटते हैं।

प्रवासी श्रमिकों के लिए आवश्यक क्यों

  • प्रवासी श्रमिक आजीविका की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर जाते रहते हैं। चुनाव के समय वे जब वोट नहीं दे पाते हैं तो उन्हें राजनीतिक रूप से शक्तिहीन माना जाता है।
  • 2017 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग 13.9 करोड़ है जो भारत की श्रम शक्ति का लगभग एक तिहाई है। प्रवासी श्रमिक आर्थिक आजीविका की तलाश में निर्माण क्षेत्र , घरेलू क्षेत्र, ईंट भट्टों, खानों, परिवहन, सुरक्षा, व कृषि कार्यों, आदि में इधर से उधर यात्र करते हैं। कई लोग कभी अपने घर और कस्बों में लौटते भी नहीं हैं।
  • कुछ राज्य सरकारों द्वारा प्रवासियों के प्रति उदासीन रवैये से यह निष्कर्ष निकलता है कि यह समूह राजनीतिक दलों के वोट बैंक का हिस्सा नहीं है।
  • आंतरिक प्रवासी श्रमिक अपने रोजगार के स्थान पर मतदाताओं के रूप में नामांकित नहीं होते हैं क्योंकि इसके लिए उन्हे वहाँ का निवास प्रमाण पत्र देना होगा , साथ ही निर्वाचन आयोग के पास ऐसी कोई सुविधा नहीं है कि वे प्रवासियों को उनके रोजगार क्षेत्र से वोट देने की सुविधा दे पाये।

चुनाव आयोग के कर्तव्य

  • चुनाव आयोग की जिम्मेदारी होनी चाहिए कि प्रत्येक भारतीय जो मतदान करने के योग्य है, वोटरलिस्ट में पंजीकृत हो । गौरतलब है कि वर्तमान में भारत में 91.05 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता हैं और 2019 के आम चुनाव में रिकॉर्ड 67.4%, यानी 61.36 करोड़ मतदाताओं ने अपना वोट डाला।
  • चुनाव आयोग को एक तिहाई लोग (29.68 करोड़) जो अपना वोट नहीं डालते हैं, पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रयास करना होगा। राष्ट्रीय चुनाव अध्ययन सर्वेक्षणों से पता चला है कि लगभग 10» पंजीकृत मतदाता राजनीति में रुचि की कमी के कारण मतदान करने से बचते हैं। इसके अलावा 20 करोड़ मतदाता ऐसे हैं जो मतदान करना चाहते हैं लेकिन ऐसा करने में वे असमर्थ हैं। इनमें से लगभग तीन करोड़ अनिवासी भारतीय (एनआरआई)हैं।
  • यह दिलचस्प है कि अनिवासी भारतीयों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम करने के लिए, सरकार ने कानून बनाया। इसके अनुसार अनिवासी भारतीय अपने मताधिकार के प्रयोग के लिए इलाके के किसी व्यक्ति को नॉमिनेट कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को प्रॉक्सी या छप्र वोटिंग कहा जाता है । इसके विपरीत देखा जाये तो यह सुविधा गरीब प्रवासी श्रमिकों के लिए उपलब्ध नहीं है।

चुनाव आयोग को क्या करना चाहिए

  • घर से दूर तैनात सरकारी कर्मचारी (जैसे, सैन्यकर्मी) इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम (ईटीपीबीएस) के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह देश में कहीं से भी अपने मतदाताओं को डिजिटल रूप से मतदान करने में सक्षम बनाने के लिए आधार-लिंक्ड मतदाता-आईडी आधारित समाधान का परीक्षण कर रहा है, इसमे कुछ और समय लग सकता है।
  • प्रवासी श्रमिकों द्वारा मतदान की सुविधा के लिए, चुनाव आयोग जिला कलेक्ट्रेट के नेटवर्क का उपयोग करते हुए पर्याप्त उपाय कर सकता है। प्रवासियों को अपने मौजूदा मतदाता पहचान पत्र और उनके अस्थायी प्रवास की अवधि के आधार पर अपने शहर के कार्यक्षेत्र में शारीरिक रूप से मतदान करने में सक्षम होना चाहिए। एक ऐसे युग में जहां बैंकिंग लेन-देन ऑनलाइन हो गए हैं, ऐसे में देखा जाये तो चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से समझौता किए बिना अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्रें में वोट डालने के लिए तकनीकी रूप से मदद मुहैया कराई जा सकती है।