यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organisation)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organisation)

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organisation)

चर्चा का कारण

  • वर्तमान में प्रशांत महासागर में चीन की दखल अंदाजी को रोकने हेतु अमेरिका प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ अपने रक्षा संबंधों को औपचारिक रूप देना चाहता है। चीन के साथ मुकाबला करने के उद्देश्य से वह भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की तरह ही गठबंधन बनाना चाहता है।

उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो)

  • यह संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और कई पश्चिमी यूरोपीय देशों द्वारा 4 अप्रैल, 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि (जिसे वाशिंगटन संधि भी कहा जाता है) द्वारा स्थापित एक अंतर-सरकारी सैन्य गठबंधन है, जो तत्कालीन सोवियत संघ के िखलाफ सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने के उदेश्य से गठित किया गया था।
  • इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है।
  • मित्र देशों की कमान संचालन का मुख्यालय मॉन्स, बेल्जियम में है और इसके 30 सदस्य हैं जो मुख्य रूप से यूरोप और उत्तरी अमेरिका में हैं।

पृष्ठभूमि

  • बेल्जियम, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम द्वारा 17 मार्च 1948 को हस्ताक्षरित ब्रुसेल्स की संधि को नाटो समझौते का अग्रदूत माना जाता है।
  • इस संधि ने पश्चिमी यूरोपीय संघ बनने हेतु एक सैन्य गठबंधन की स्थापना की। हालांकि, सोवियत संघ की सैन्य शक्ति का मुकाबला करने हेतु अमेरिकी भागीदारी को इसमें आवश्यक माना गया था और इसलिए एक नए सैन्य गठबंधन के लिए बातचीत लगभग तुरंत शुरू हो गयी। इन वार्ता के परिणामस्वरूप 4 अप्रैल 1949 को उत्तरी अटलांटिक संधि पर वाशिंगटन, डीसी में हस्ताक्षर किए गए।

उद्देश्य

  • राजनीतिकः नाटो लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देता है और सदस्यों को समस्याओं को हल करने, आपस में विश्वास बनाने और लंबे समय में संघर्ष को रोकने के लिए रक्षा और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर परामर्श और सहयोग करने में सक्षम बनाता है।
  • सैन्यः नाटो विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। परन्तु यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो इसके पास संकट-प्रबंधन कार्यों को करने की सैन्य शक्ति भी है।

महत्व

  • यह सामूहिक रक्षा की एक ऐसी प्रणाली का गठन करता है, जिससे इसके स्वतंत्र सदस्य राज्य किसी भी बाहरी पार्टी द्वारा किए गए हमले के जवाब में आपसी रक्षा के लिए सहमत होते हैं।

वारसा संधि

  • नाटो की प्रतिक्रिया के रूप में, यूएसएसआर ने वॉरसॉ पैक्ट बनाया था
  • 1955 में हस्ताक्षर किए गए इस समझौते का गठन शीत युद्ध के दौरान पश्चिम जर्मनी को नाटो का सदस्य बनाने के तत्काल बाद किया गया था।
  • यह तत्कालीन सोवियत संघ, अल्बानिया, बुल्गारिया, स्लोवाकिया, पूर्वी जर्मनी, हंगरी, पोलैंड और रोमानिया के बीच आपसी-रक्षा संगठन स्थापित करने वाली एक संधि है।
  • पूर्वी यूरोप में लोकतांत्रिक क्रांतियों और सोवियत संघ के विघटन के बाद, 1991 में इस समझौते को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया था