यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: भारत का पहला प्लाज्मा बैंक (India's First Plasma Bank)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): भारत का पहला प्लाज्मा बैंक (India's First Plasma Bank)

भारत का पहला प्लाज्मा बैंक (India's First Plasma Bank)

चर्चा का कारण

  • कोरोना वायरस के इलाज के लिए दिल्ली स्थित सरकारी संस्थान ‘ इंस्टिट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलियरी साइंसेज’ में प्लाज्मा बैंक की स्थापना की गई है।
  • गौरतलब है कि सबसे पहले दिल्ली में ही प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग किया गया था और इसके शानदार नतीजे सामने आए थे। अब दुनिया के कई देशों में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी (plasma therapy) का इस्तेमाल हो रहा है। अमेरिका, स्पेन, दक्षिण कोरिया, इटली, तुर्की और चीन समेत कई देशों में इस थेरेपी का इस्तेमाल हो रहा है।

प्रमुख बिन्दु

  • दिल्ली सरकार ने उम्मीद जतायी है कि प्लाज्मा थेरेपी से कोविड-19 से मरने वालों की संख्या में कमी आ सकती है। इसके लिए सरकार ने 1031 और व्हाट्सएप नंबर 8800007722 जारी किया, जिन पर लोग कोविड-19 मरीजों के लिए प्लाज्मा दान करने के लिए सम्पर्क कर सकते हैं।
  • 18 से 60 वर्ष तक की आयु के लोग, जिनका वजन 50 किलोग्राम से कम नहीं है वे कोविड-19 मरीजों के लिए अपना प्लाज्मा दान कर सकते हैं।
  • प्लाज्मा थेरेपी में कोविड-19 के ठीक हुए मरीजों के रत्तफ़ से एंटीबॉडी लिया जाता है और कोविड-19 मरीजों को चढ़ाया जाता है।

कौन नहीं दे सकता प्लाज्मा

  • गर्भवती महिलाएं, शुगर के मरीज, हाइपरटेंशन की बीमारी या जिनका ब्लड प्रेशन 140 से ज्यादा है, वे प्लाज्मा नहीं दे सकते। इसके अलावा किडनी, हार्ट की बीमारी वाले लोग प्लाज्मा दान नहीं कर सकते हैं।

प्लाज्मा थेरेपी

  • ‘प्लाज्मा थेरेपी’ इस धारणा पर कार्य करती है कि कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके मरीजों के शरीर में संक्रमण को बेअसर करने वाले प्रतिरोधी एंटीबॉडीज (प्लाज्मा) विकसित हो जाते हैं। ठीक हुए ऐसे मरीजों के रत्तफ़ से प्लाज्मा निकालकर इन एंटीबॉडीज के जरिये नए मरीज के शरीर में मौजूद कोरोना वायरस का सफाया किया जाता है।
  • इस थेरेपी में ‘एस्पेरेसिस’ विधि से कोरोना से उबर चुके रोगी के शरीर से रत्तफ़ निकाला जाता है और इसी रत्तफ़ से केवल प्लाज्मा या प्लेटलेट्स जैसे अवयवों को निकालकर शेष बचा रत्तफ़ वापस डोनर के शरीर में चढ़ा दिया जाता है।
  • मेडिकल एक्सपर्ट की मानें तो एक व्यक्ति का प्लाज्मा 2 मरीजों का इलाज कर सकता है। किसी डोनर के शरीर से प्लाज्मा लेने के बाद उस प्लाज्मा को तकरीबन एक साल तक-60 डिग्री सेल्सियस के तापमान में स्टोर करके रखा जा सकता है।

प्लाज्मा थेरेपी की चुनौतियाँ

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि प्रयोग के हिसाब से रत्तफ़ प्लाज्मा का इस्तेमाल सही है लेकिन इसके लिए मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होनी आवश्यक है और डॉक्टरों के सामने कोरोना संक्रमित रोगी की रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने की बड़ी चुनौती रहती है। सबसे बड़ी चुनौती रहती है कि संक्रमित कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के हिसाब से कोरोना से जंग जीतने वाले व्यक्तियों के रत्तफ़ से पर्याप्त मात्र में प्लाज्मा एकत्रित करना।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जब तक कोरोना के इलाज के लिए बेहतर वैक्सीन तैयार नहीं होती, इस थेरेपी का उपयोग करना ठीक है लेकिन यह हर बार सफल ही हो, यह जरूरी नहीं। इस थेरेपी के इस्तेमाल से बड़ी उम्र वाले तथा उच्च रत्तफ़चाप व मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझ रहे कोरोना मरीजों को ठीक करना सबसे बड़ी चुनौती है।