यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: गाफा टैक्स (GAFA Tax)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): गाफा टैक्स (GAFA Tax)

गाफा टैक्स (GAFA Tax)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में फ्रांस ने GAFA कर पर गतिरोध की पुष्टि कर दी है। इस संदर्भ में फ्रांस ने डिजिटल कंपनियों द्वारा देश में अर्जित कुल राजस्व पर 3% GAFA टैक्स लगाने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि

  • कुछ महीने पहले आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (Organization for Economic Co-operationand Development) के संरक्षण में 137 देशों द्वारा 2020 के अंत तक बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियों पर कर लगाने के लिए एक समझौते पर बातचीत करने हेतु सहमति व्यत्तफ़ की गयी थी।
  • इसके लिए फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और स्पेन ने OECD के लिए एक निष्पक्ष डिजिटल कर प्रणाली पर अपनी सहमति की पुष्टि कर दी है, परन्तु अमेरिका ने डिजिटल व्यवसायों के दीर्घानुभवीयों के लिए वैश्विक कर प्रणाली को दुरस्त करने हेतु चल रही वार्ता से स्वयं को अलग कर लिया है।

गाफा (GAFA) टैक्स क्या है?

  • GAFA टैक्स का नामकरण Google, Apple, Facebook, तथा Amazon कंपनियों के नाम को मिलाकर किया गया है। यह विश्व की बड़ी प्रौद्योगिकी तथा इंटरनेट कंपनियों पर लगाया जाने वाला एक प्रस्तावित डिजिटल कर है।

समस्याएं

  • अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय देशों से असहमति जताते हुए कहा है कि यह कदम अमेरिकी फर्मों के प्रति भेदभावपूर्ण है। अमेरिका का मानना है कि वर्तमान अन्तर्राष्ट्रीय कर नियमों में नए कर-प्रावधानों के लिए व्यापक रूप से पुनर्गठन की आवश्यकता है।
  • अमेरिका ने कर संबधी वार्ता से अपने को अलग कर लिया है, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापार विवाद के पुनः भड़कने की संभावना उत्पन्न हो गयी है। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि फ्रांस के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम, स्पेन, इटली तथा अन्य देशों ने बड़ी डिजिटल कंपनियों पर कर लगा दिया है।

भारत में डिजिटल टैक्स संबंधी नवीनतम संशोधन

  • भारत में 560 मिलियन से अधिक लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं। भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा ऑनलाइन उपयोगकर्ता है। कुछ समय पूर्व भारतीय कराधान में, डिजिटल माध्यमों से अर्जित आय को उचित कर-प्रणाली के अंतर्गत लाने हेतु दो महत्वपूर्ण संशोधन प्रस्तावित किए गए-
  • इक्विलाइजेशन लेवी (Equilization Levy )
  • भारत ने पहली बार वर्ष 2016 में समतुल्य लेवी लागू की थी। इस प्रावधान में नया संशोधन 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी हुआ है, इसके अंतर्गत, कर आधार को ऑनलाइन विज्ञापन से बढाकर लगभग सभी ऑनलाइन वाणिज्य गतिविधियों तक विस्तृत कर दिया गया है।
  • महत्त्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति मॉडल की अवधारणा (Significant Economic Presence Model - SEP)
  • भारत सरकार द्वारा अपनाए गए मानदंड के अनुसार एक गैर-निवासी कंपनी को निम्न स्थितियों में SEP के अंतर्गत माना जाता हैः
    • यदि भारत के भीतर अनिवासी कंपनी या व्यवसाय द्वारा किये गए लेनदेन के माध्यम से उसे निर्धारित की गई राशि से अधिक राजस्व प्राप्त होता है।
    • यदि गैर-निवासी व्यवस्थित रूप से और लगातार भारत में डिजिटल माध्यमों से व्यापार करता है।
  • SEP का उपयोग विदेशों में स्थिति परन्तु भारत में व्यवसाय करने वाली कंपनियों को देश के कर-दायरे में लाने के लिए किया जाता है।