यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (विषय: परिसीमन आयोग (Delimitation Commission)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): परिसीमन आयोग (Delimitation Commission)

रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी (Raman Spectroscopy)

चर्चा का कारण

  • हाल ही मे चुनाव आयोग (ईसी) के पूर्व कानूनी चेयरमैन एस के मेंदीरत्ता ने अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, असम और नागालैंड के लिए परिसीमन आयोग की स्थापना के केंद्र सरकार के आदेश को असंवैधानिक और अवैध बताया। विदित हो कि जब वर्ष 2008 में आिखरी बार परिसीमन हुआ था, तब इन राज्यों को छोड़ दिया गया था।
  • कई संगठनों ने परिसीमन प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2001 की जनगणना को आधार के रूप में प्रयोग किये जाने को गुवाहाटी उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। असम से एक सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल ने तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री से मिलकर परिसीमन की प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की, क्योंकि उस समय तक ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’ (National Register of Citizens- NRC) के आँकड़ों को अद्यतन/अपडेट नहीं किया गया था।

परिसीमन क्या है?

  • परिसीमन का अर्थ होता है फ्सीमा निर्धारण अर्थात किसी भी राज्य की लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रें की सीमाओं के निर्धारण को ही परिसीमन कहते हैं। जिसका सरल शब्दों में अर्थ है कि किसी राज्य के कई गॉँवों, कस्बों और शहरों को एक इकाई मान या राजनीतिक क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र) मान कर, पुरे राज्य को इसी तरह कई इकाइयों में बाँटकर, उस पूरे राज्य को कई विधानसभा या राज्यसभा क्षेत्र/ सीटों में बॉटा जा सकें, ताकि वहाँ के निवासी उनके विधानसभा या राज्यसभा क्षेत्र के लिए वोट डाल कर अपना पसंदीदा मंत्री और सरकार का चुनाव कर सकें।
  • इसका उद्देश्य समान जनसंख्या क्षेत्रें के लिए समान प्रतिनिधित्व प्रदान करना है, और भौगोलिक क्षेत्रें का उचित विभाजन है, ताकि किसी भी राजनीतिक दल को फायदा न हो। परिसीमन आयोग के आदेशों पर किसी भी अदालत के समक्ष सवाल नहीं उठाया जा सकता है।

परिसीमन का इतिहास

  • भारत के संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार, भारत सरकार हर 10 साल में जनगणना के पश्चात परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। हर परिसीमन के बाद जनसंख्या के हिसाब से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों की संख्या में बदलाव किया जाता है।
  • भारत में वर्ष 1952 में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। 1952 के बाद वर्ष 1963, 1973 और वर्ष 2002 में परिसीमन आयोग गठित किए जा चुके हैं। भारत में वर्ष 2002 के बाद परिसीमन आयोग का गठन नहीं किया गया हैं।
  • 12 जुलाई, 2002 को उच्चतम न्यायालय से अवकाश प्राप्त न्यायधीश कुलदीप सिंह की अध्यक्षता में परिसीमन आयोग का गठन किया गया था। उन्होंने अपनी रिपोर्ट को केन्द्र सरकार को वर्ष 2007 में सौंपा था जिसे तत्कालीन मनमोहन सरकार ने अनदेखा कर दिया परंतु वर्ष 2008 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पश्चात वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रें का परिसीमन किया गया।

परिसीमन आयोग

  • परिसीमन आयोग को भारतीय सीमा आयोग भी कहते हैं। इसके अंतर्गत सीटों की संख्या के आवंटन और क्षेत्रें में उनके सीमांकन का काम किया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 82 के मुताबिक, सरकार हर एक दशक (10 साल) बाद परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है।
  • इसके तहत जनसंख्या के आधार पर विभिन्न विधानसभा व लोकसभा क्षेत्रें का निर्धारण होता है। बता दें कि परिसीमन की वजह से किसी भी राज्य से प्रतिनिधियों की संख्या नहीं बदलती। लेकिन जनसंख्या के हिसाब से अनुसूचित जाति जनजाति सीटों की संख्या बदल जाती है। परिसीमन आयोग का अध्यक्ष मुख्य चुनाव आयुत्तफ़ होता है।
  • अब तक चार बार परिसीमन आयोग का गठन हो चुका है। सबसे पहले 1952 में इस आयोग का गठन किया गया था, इसके बाद 1962, 1972 और 2002 में इस आयोग का गठन किया गया था।

आयोग के मुख्य कार्य

  • हाल में हुई जनगणना के आधार पर देश के सभी लोकसभा और विधानसभा के निर्वाचन क्षेत्रें की फिर से सीमाएं निर्धारित करना।
  • सीमाओं के पुनर्निर्धारण में राज्य में प्रतिनिधित्व को स्थिर रखना, यानी चुने गए प्रतिनधियों की संख्या में कोई बदलाव नहीं होना।
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना विधानसभा सीटों के निर्धारण क्षेत्र की जनगणना के अनुसार करना।