यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: कुकिंग एनर्जी एक्सेस सर्वे 2020 (Cooking Energy Access Survey 2020)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): कुकिंग एनर्जी एक्सेस सर्वे 2020 (Cooking Energy Access Survey 2020)

कुकिंग एनर्जी एक्सेस सर्वे 2020 (Cooking Energy Access Survey 2020)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (Council on Energy, Environment and Water-CEEW) के द्वारा शहरी मलिन बस्तियों/ झुग्गियों में एलपीजी के प्रयोग से संबंधित एक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

कुकिंग एनर्जी एक्सेस सर्वे 2020 से जुड़े मुख्य तथ्य

  • कुकिंग एनर्जी एक्सेस सर्वे 2020 के तहत अध्ययन में 6 राज्यों के 58 जिलों में शामिल 83 मलीन बस्तियों का सर्वेक्षण किया गया। उल्लेखनीय है कि इन 6 राज्यों में की शहरी मलिन बस्तियों में भारत की कुल स्लम आबादी का एक चौथाई हिस्सा निवास करता है। उल्लेखनीय है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में झुग्गियों में निवास कर रहे लोगों की संख्या 13.7 मिलियन से भी अधिक है।
  • अध्ययन में यह पाया गया कि 16 फीसदी घरों में अभी भी पारंपरिक ईंधन (लकड़ी, गोबर के उपले, कृषि अवशेष, लकड़ी का कोयला और मिट्टी के तेल/केरोसिन आयल) का प्रयोग प्राथमिक ईंधन के रूप में किया जाता है। इसके साथ ही एक तिहाई से ज्यादा लोग एलपीजी के साथ-साथ इन पारंपरिक ईंधन का प्रयोग कर रहे हैं। पारंपरिक ईंधन का प्रयोग इनडोर वातावरण यानी घरों के अंदर के वायु प्रदूषण के जोखिम को बढ़ा देता है।
  • इसके साथ ही अध्ययन में यह भी तथ्य सामने आया है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के कारण पिछले एक दशक में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है लेकिन मुख्य ईंधन के रूप में एलपीजी का प्रयोग झुग्गियों में मात्र आधे ही घरों तक सीमित है।
  • इस अध्ययन के निष्कर्ष इस तथ्य को सत्यापित करते है कि गरीबी और ऊर्जा तक पहुंच में सीधा संबंध होता है। एलपीजी कनेक्शन होने के बावजूद प्रदूषणकारी ईंधनों के निरंतर उपयोग से यह तथ्य रेखांकित होता है कि इनमें से अधिकांश घर एलपीजी के खर्च को वहन करने में सक्षम नहीं है।
  • इस अध्ययन में प्रमुख लेखिका के रूप में शामिल शाली झा ने कहा है कि शहरी झुग्गियों में एक चौथाई से भी कम घरों में उज्जवला कनेक्शन है। अतः झुग्गियों में सरकार के द्वारा उज्जवला योजना के तहत दिए जाने वाले एलपीजी कनेक्शनों की मात्रा में वृद्धि करना चाहिए।

काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (CEEW) के बारे में

  • काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर (Council on Energy, Environment and Water-CEEW) एशिया के अग्रणी नॉट-फॉर-प्रॉफिट पॉलिसी रिसर्च संस्थानों में से एक है। एक अग्रणी नीति अनुसंधान संस्थान और थिंक टैंक के रूप में स्थापित इस संस्था का मुख्यालय दिल्ली, भारत में स्थित है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के बारे में

  • केंद्र सरकार द्वारा 1 मई 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) का शुभारंभ किया था और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियां जैसे-आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल के देश भर में फैले अपने वितरकों के नेटवर्क के माध्यम से इसे लागू कर रहा है।
  • पीएमयूवाई के माध्यम से, प्रारंभ में, 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को 31 मार्च, 2019 तक बिना किसी जमा राशि के मुफ्त एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। अपने प्रारंभ के 28 महीनों के ही रिकार्ड समय में, पीएमयूवाई ने 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को एलपीजी कनेक्शन प्रदान करने का प्रारंभिक लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस योजना की अपार सफलता को देखते हुए 12,800 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ 8 करोड़ का लक्ष्य संशोधित किया गया जिसे पिछले वर्ष ही प्राप्त कर लिया गया।
  • पीएमयूवाई को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन्डोर स्वास्थ्य प्रदूषण दूर करने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना है, जिसके कारण देश में एक वर्ष में लगभग 10 लाख मौतें होती थी।
  • पीएमयूवाई का लक्ष्य गरीब परिवारों को खाना पकाने के लिए स्वच्छ-ईंधन प्रदान करना है, इससे इन परिवारों को इनडोर (अंतरीय) वायु प्रदूषण से जुड़े विभिन्न स्वास्थ्य खतरों से निजात मिली है और उनके जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आए हैं। पीएमयूवाई को सभी राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशों में लागू किया गया है।
  • लाभार्थियों की पहचान सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना सूची-2011 के आधार पर किया गया है और ऐसे मामलों में जहां नाम एसईसीसी सूची के तहत शामिल नहीं हैं तो ऐसे अन्य लाभार्थियों की पहचान सात श्रेणियों-एससी/एसटी, पीएमएवाई (ग्रामीण) के लाभार्थियों, अंत्योदय अन्न योजना, सबसे पिछड़ा वर्ग, वन निवासियों, द्वीप/नदी द्वीप समूह के निवासियों और चाय बागान और पूर्व-चाय बागान जनजातियों के आधार पर की जाती है।