यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (विषय: बूंदी स्थापत्य कला (Bundi Architecture)

यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए ब्रेन बूस्टर (Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


यूपीएससी और राज्य पीसीएस परीक्षा के लिए करेंट अफेयर्स ब्रेन बूस्टर (Current Affairs Brain Booster for UPSC & State PCS Examination)


विषय (Topic): बूंदी स्थापत्य कला (Bundi Architecture)

बूंदी स्थापत्य कला (Bundi Architecture)

चर्चा का कारण

  • हाल ही में पर्यटन मंत्रलय ने बूंदीः एक भूली हुई राजपूत राजधानी की स्थापत्य विरासतय् शीर्षक से ‘देखो अपना देश’ वेबिनार शृंखला आयोजित की जो राजस्थान के बूंदी जिला पर केंद्रित थी।

उद्देश्य

  • मध्ययुगीन भारत के भूतपूर्व शक्ति केंद्रों की छाया में, छोटे ऐतिहासिक शहर आज बड़े पैमाने पर अपने तत्कालिक भौगोलिक संदर्भ से परे गुमनामी की दशा में हैं।
  • भारत के विशाल परिक्षेत्र में फैले हुए छोटे-छोटे शहरों और कस्बों को पर्यटकों, उत्साही लोगों और विद्वानों का वांछित से भी कम ध्यान मिल पाया है। इसलिए इन छोटे शहरों के ऐतिहासिक महत्त्व को जानना महत्वपूर्ण है ताकि एक पर्यटन स्थल के तौर पर इनका विकास हो सके।

बूंदी

  • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान स्थित बूंदी पहले हाड़ा राजपूत राज्य की राजधानी थी, जिसे हाडौती के नाम से जाना जाता है। बूंदी को सीढ़ीदार बावड़ी के शहर, नीले शहर और छोटी काशी के रूप में भी जाना जाता है।

बूंदी वास्तुकला

  • बूंदी के विकास के शुरुआती चरण में बने मंदिर शास्त्रीय नागर में शैली में थी, जबकि बाद के चरणों में मंदिरों का नया स्थापत्य शास्त्रीय नागर शैली के साथ पारंपरिक हवेली का मिश्रण आया। जैन मंदिरों ने एक अंतर्मुखी रूप में मंदिर स्थापत्य के तीसरी शैली को विकसित किया, जिसमें विशिष्ट जैन मंदिर की विशेषताओं जैसे प्रवेश द्वार पर सर्पीय तोरण द्वार, बड़े घनाकार अपारदर्शी पत्थर और गर्भगृह पर नागर शैली के शिकारे के साथ केंद्रीय प्रांगण को जोड़ा गया।
  • ऊंचे स्थान वाले मंदिरों के रूप में मंदिर स्थापत्य की एक चौथी शैली भी उभरी। बूंदी में मंदिरों की एक विशेषता उनके पैमानों में स्मारकता का अभाव भी है। इसके लिए एक कारण घनिष्ठ संबंध था। मंदिर के स्वरूप में विद्यमान विविधता और शास्त्रीय व स्थापित मानदंडों से हटकर निर्माण में अपनाई गई छूट स्थानीय समुदायों की भागीदारी और स्वतंत्रता का संकेत देती हैं।

बूंदी की स्थापत्य विरासत

  • गढ़ (किला) - तारागढ़
  • गढ़ महल (शाही महल)
  • भज महल
  • छत्र महल
  • खम्मेद महल
  • बावड़ी (सीढ़ीदार बावड़ी)
  • खोज दरवाजा की बावड़ी
  • भावलदी बावड़ी
  • कुंड (सीढ़ीदार तालाब)
  • धाभाई जी का कुंड
  • नागर कुंड व सागर कुंड
  • रानी कुंड
  • सागर महल (लेक पैलेस)
  • मोती महल
  • सुख महल
  • शिकार बुर्ज
  • छतरी (सेनटैफ) - चौरासी खंभों वाली छतरी

बूंदी के प्रमुख किले

  • तारागढ़ किला- तारागढ़ किले का निर्माण राव राजा बैर सिंह ने 1426 फीट ऊंची एक पहाड़ी पर 1354 में करवाया था। किले के केंद्र में भीम बुर्ज स्थित है, जिस पर एक बार एक बड़ी तोप को चढ़ाया गया था, जिसे गर्भ गुंजम या गर्भ से गर्जन कहा जाता था। किले में हजारी दरवाजा, हाथी पोल, नौ धान, रतन दौलतखाना, दरीखाना, रतन निवास, छत्र महल, बादल महल और मोती महल शामिल हैं।
  • सुख महल- जैतसागर झील के तट पर इस महल का निर्माण राव राजा विष्णु सिंह ने 1773 ईस्वी में कराया था।
  • रानी की बावड़ी- बूंदी में 50 से ज्यादा सीढ़ीदार बावडि़यां हैं और इसे सीढ़ीदार बावड़ी के शहर के रूप में पहचाना जाना सही है। यह बहु-मंजिला सीढ़ीदार बावड़ी सूंड अंदर की ओर मोड़कर खड़े गजराजों की उत्कृष्ट नक्काशी प्रदर्शित करती है।
  • 84 खंभों वाली छतरी- 84 खंभों वाली छतरी एक ऐसी संरचना है, जिसे 84 स्तंभ सहारा देते हैं। इस छतरी का निर्माण बूंदी के महाराजा राव अनिरुद्ध द्वारा अपनी सेविका देवा की याद में कराया गया था

देखो अपना देश वेबिनार शृंखला

  • एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत देखो अपना देश वेबिनार शृंखला भारत की संपन्न विविधता को प्रदर्शित करने के लिए है। इस शृंखला को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रलय के राष्ट्रीय ई गवर्नेंस विभाग के साथ तकनीकी साझेदारी में प्रस्तुत किया जाता है।